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हाई सिक्योरिटी जेल के विरोध में प्रदर्शन जारी
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महानपुर। पंचायत डांबरा के मोड़ा मादनी में प्रस्तावित हाई सिक्योरिटी जेल का विरोध जारी है। डांबरा के लोगों समेत सरपंच राजेंद्र सिंह, सरपंच सुरजीत, पूर्व सरपंच रामनरेश का आरोप है कि घास चिराई जमीन पर जबरन जेल प्रस्तावित की गई है। जिसके विरोध में प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा की जेल बनाने के लिए पीपल के पेड़ और वट वृक्ष काटे गए हैं। इतना ही नहीं नाग बर्मियों को भी नष्ट कर दिया गया।
वीरवार को प्रदर्शन की अध्यक्षता करते हुए धीरज बसौत्रा ने हाई सिक्योरिटी जेल बनाने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहां कि हम लोग यहां पर जेल नहीं बनने देंगे। इस भूमि पर सरकार खेल मैदान, स्कूल, अस्पताल बनाए तो कोई आपत्ति नहीं है। इसी तरह समाज सेवक देशराज ने बताया कि मादनी इलाके का गोचरण का क्षेत्र है। जबकि जहां पर नाग देवताओं का वास है, इसके बावजूद चार पीपल और वट वृक्षों को काट दिया गया है। नाग की भूमियों को भी नष्ट कर दिया गया।
उन्होंने बताया कि घास चराए 148 कनाल भूमि के बदले लोगों को यहां से आठ किमी दूर लगभग 106 कनाल भूमि दी गई है, लेकिन हमें मजबूर नहीं है। डांबरा प्रदर्शन में शामिल होकर उपरोक्त सरपंचों ने कहा कि जेल नहीं बननी चाहिए, क्योंकि इस इलाके से लोगों की आस्था जुड़ी है। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार एवं उपराज्यपाल से आग्रह किया है कि वह अपने इस फैसले पर फिर से विचार करें और प्रस्तावित जेल को कहीं और स्थानांतरित करें। साथ ही चेतावनी दी कि जब तक फैसला नहीं बदला जाता, तब तक लोगों का प्रदर्शन जारी रहेगा।
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वीरवार को प्रदर्शन की अध्यक्षता करते हुए धीरज बसौत्रा ने हाई सिक्योरिटी जेल बनाने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहां कि हम लोग यहां पर जेल नहीं बनने देंगे। इस भूमि पर सरकार खेल मैदान, स्कूल, अस्पताल बनाए तो कोई आपत्ति नहीं है। इसी तरह समाज सेवक देशराज ने बताया कि मादनी इलाके का गोचरण का क्षेत्र है। जबकि जहां पर नाग देवताओं का वास है, इसके बावजूद चार पीपल और वट वृक्षों को काट दिया गया है। नाग की भूमियों को भी नष्ट कर दिया गया।
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उन्होंने बताया कि घास चराए 148 कनाल भूमि के बदले लोगों को यहां से आठ किमी दूर लगभग 106 कनाल भूमि दी गई है, लेकिन हमें मजबूर नहीं है। डांबरा प्रदर्शन में शामिल होकर उपरोक्त सरपंचों ने कहा कि जेल नहीं बननी चाहिए, क्योंकि इस इलाके से लोगों की आस्था जुड़ी है। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार एवं उपराज्यपाल से आग्रह किया है कि वह अपने इस फैसले पर फिर से विचार करें और प्रस्तावित जेल को कहीं और स्थानांतरित करें। साथ ही चेतावनी दी कि जब तक फैसला नहीं बदला जाता, तब तक लोगों का प्रदर्शन जारी रहेगा।
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