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हेड रेस टनल की मरम्मत के बाद बिजली उत्पादन हुआ शुरू
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कठुआ। एक साल और पांच महीने की लंबी अवधि तक ठप रहने के बाद सोमवार को आखिरकार एनएचपीसी संचालित सेवा जलविद्युत परियोजना की टरबाइनें चलने लगीं। कार्यपालक निदेशक, क्षेत्रीय कार्यालय बनीखेत अनिल कुमार जैन परियोजना के बहाल होने पर विशेष रूप से पहुंचे और सेवा परियोजना टीम की भी प्रशंसा की। सितंबर 2020 में भारी भूस्खलन के चलते परियोजना की बनी से माश्का के बीच भूमिगत टनल का एक हिस्सा टूट गया था। बांध से पॉवर हाउस तक पानी के वेग को पहुंचाने वाले हेड रेस टनल के क्षतिग्रस्त हिस्से को बाईपास करते हुए 720 मीटर का नया हिस्सा तैयार किया गया।
परियोजना में बीते सप्ताह से ही जलाशय को भरने के साथ ही हेड रेस टनल में पानी भरने का काम भी शुरू करवा दिया गया था। जिसके बाद बिजली उत्पादन शुरू होने से कर्मचारियों में खासा उत्साह है।
इन दिनों पहाड़ों पर हुई भारी बर्फबारी के बीच मौसम खुलने से बर्फ पिघलने का सिलसिला भी जारी है। ऐसे में 16 क्यूबिक मीटर पानी के इनफ्लो से परियोजना की दो टरबाइनों को आसानी से चलाया जा सकेगा। फिलहाल परियोजना की टरबाइनें पीक समय पर ही बिजली उत्पादन करेंगी जब बिजली की मांग अधिक रहती है। इससे प्रदेश को एक बार फिर अपने हिस्से की 23 मेगावाट बिजली की आपूर्ति भी शुरू हो गई है।120 मेगावाट क्षमता की सेवा जलविद्युत परियोजना में टनल की मरम्मत का काम 50 करोड़ की लागत से पूरा किया गया है। बिजली उत्पादन ठप रहने से गर्मियों में जिले में बिजली संकट भी बढ़ गया यहां तक कि सर्दियों में पीक समय पर अधिक कटौती की वजह सेवा परियोजना से बिजली आपूर्ती ठप होना भी रहा है। 120 मेगावाट की सेवा परियोजना के ठप होने से कई अन्य राज्यों में बिजली संकट गहराया हुआ था, जिससे अब मुक्ति मिल जाएगी। टैरिफ के अनुसार औसतन सेवा दो जलविद्युत परियोजना 75 लाख रुपये की बिजली पैदा करती रही है। पानी अधिक उपलब्ध होने पर बिजली उत्पादन प्रतिदिन एक करोड़ तक पहुंच जाता है। बांध में बिजली उत्पादन शुरू होने पर पहुंचे अधिकारियों में प्रभारी ग्रुप महाप्रबंधक चमेरा परियोजना चरण एक प्रवेश कुमार जैन, प्रभारी ग्रुप महाप्रबंधक सेवा दो परियोजना सुप्रकाश अधिकारी, क्षेत्रीय कार्यालय से ग्रुप महाप्रबंधक तक्नीकी संदीप कुमार, ग्रुप महाप्रबंधक विद्युत ओम प्रकाश आदि मौजूद रहे।
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परियोजना में बीते सप्ताह से ही जलाशय को भरने के साथ ही हेड रेस टनल में पानी भरने का काम भी शुरू करवा दिया गया था। जिसके बाद बिजली उत्पादन शुरू होने से कर्मचारियों में खासा उत्साह है।
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इन दिनों पहाड़ों पर हुई भारी बर्फबारी के बीच मौसम खुलने से बर्फ पिघलने का सिलसिला भी जारी है। ऐसे में 16 क्यूबिक मीटर पानी के इनफ्लो से परियोजना की दो टरबाइनों को आसानी से चलाया जा सकेगा। फिलहाल परियोजना की टरबाइनें पीक समय पर ही बिजली उत्पादन करेंगी जब बिजली की मांग अधिक रहती है। इससे प्रदेश को एक बार फिर अपने हिस्से की 23 मेगावाट बिजली की आपूर्ति भी शुरू हो गई है।120 मेगावाट क्षमता की सेवा जलविद्युत परियोजना में टनल की मरम्मत का काम 50 करोड़ की लागत से पूरा किया गया है। बिजली उत्पादन ठप रहने से गर्मियों में जिले में बिजली संकट भी बढ़ गया यहां तक कि सर्दियों में पीक समय पर अधिक कटौती की वजह सेवा परियोजना से बिजली आपूर्ती ठप होना भी रहा है। 120 मेगावाट की सेवा परियोजना के ठप होने से कई अन्य राज्यों में बिजली संकट गहराया हुआ था, जिससे अब मुक्ति मिल जाएगी। टैरिफ के अनुसार औसतन सेवा दो जलविद्युत परियोजना 75 लाख रुपये की बिजली पैदा करती रही है। पानी अधिक उपलब्ध होने पर बिजली उत्पादन प्रतिदिन एक करोड़ तक पहुंच जाता है। बांध में बिजली उत्पादन शुरू होने पर पहुंचे अधिकारियों में प्रभारी ग्रुप महाप्रबंधक चमेरा परियोजना चरण एक प्रवेश कुमार जैन, प्रभारी ग्रुप महाप्रबंधक सेवा दो परियोजना सुप्रकाश अधिकारी, क्षेत्रीय कार्यालय से ग्रुप महाप्रबंधक तक्नीकी संदीप कुमार, ग्रुप महाप्रबंधक विद्युत ओम प्रकाश आदि मौजूद रहे।
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