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प्रदूषण के खिलाफ ग्रामीणों ने खोला मोर्चा
ब्यूरो/अमर उजाला, कठुआ
Updated Wed, 08 Oct 2014 01:59 AM IST
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औद्योगिक क्षेत्र के प्रदूषण से हलकान ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया। सकता चक इलाके में टायर कारखाने से निकलने वाले प्रदूषण से परेशान ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी।
ग्रामीणों ने कहा कि यदि प्रदूषण की समस्या को दूर करने के लिए जल्द प्रशासन ने पुख्ता कदम नहीं उठाए तो वह जिला उपायुक्त कार्यालय का घेराव करने और जम्मू-पठानकोट नेशनल हाईवे पर प्रदर्शन करने को बाध्य हो जाएंगे।
प्रदर्शनकारियों में शामिल अंचल सिंह, मेहरम दीन, सोहन लाल, राधा कृष्ण, पूरण चंद, आलमगीर ने कहा कि सकता चक में चल रहे टायर के कारखाने से क्षेत्र में दुर्गंध और कालिख छोड़ने वाला धुंआ ग्रामीणों का जीना दूभर कर रहा है। घरों में रखे कपड़ों से लेकर दीवारों पर कालिख हो जाती है।
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वहीं गंदे पानी से इलाके में चर्म रोग के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इतना ही नहीं अब तक कई मवेशी मारे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि उज्ज दरिया से सटकर चल रहा कारखाना प्रदूषण नियंत्रण नियम कायदों के अधीन आता है लेकिन नियमों पर अमल के मामले में कोई व्यवस्था नहीं है।
ऐसे में ग्रामीणों के लिए राहत की सांस लेना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने कहा कि पहले भी कई दफा वह प्रशासन को समस्या से अवगत करवा चुके हैं लेकिन सुनवाई नहीं की जा रही है।
ग्रामीणों को आखिरकार आंदोलन का रास्ता इख्तियार करना पड़ रहा है। ग्रामीणाें ने कहा कि प्रशासन को वह आखिरी चेतावनी दे रहे हैं इसके बावजूद भी सुनवाई नहीं की गई तो उन्हें आंदोलन कड़ा करना पड़ेगा।
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ग्रामीणों ने कहा कि यदि प्रदूषण की समस्या को दूर करने के लिए जल्द प्रशासन ने पुख्ता कदम नहीं उठाए तो वह जिला उपायुक्त कार्यालय का घेराव करने और जम्मू-पठानकोट नेशनल हाईवे पर प्रदर्शन करने को बाध्य हो जाएंगे।
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प्रदर्शनकारियों में शामिल अंचल सिंह, मेहरम दीन, सोहन लाल, राधा कृष्ण, पूरण चंद, आलमगीर ने कहा कि सकता चक में चल रहे टायर के कारखाने से क्षेत्र में दुर्गंध और कालिख छोड़ने वाला धुंआ ग्रामीणों का जीना दूभर कर रहा है। घरों में रखे कपड़ों से लेकर दीवारों पर कालिख हो जाती है।
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वहीं गंदे पानी से इलाके में चर्म रोग के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इतना ही नहीं अब तक कई मवेशी मारे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि उज्ज दरिया से सटकर चल रहा कारखाना प्रदूषण नियंत्रण नियम कायदों के अधीन आता है लेकिन नियमों पर अमल के मामले में कोई व्यवस्था नहीं है।
ऐसे में ग्रामीणों के लिए राहत की सांस लेना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने कहा कि पहले भी कई दफा वह प्रशासन को समस्या से अवगत करवा चुके हैं लेकिन सुनवाई नहीं की जा रही है।
ग्रामीणों को आखिरकार आंदोलन का रास्ता इख्तियार करना पड़ रहा है। ग्रामीणाें ने कहा कि प्रशासन को वह आखिरी चेतावनी दे रहे हैं इसके बावजूद भी सुनवाई नहीं की गई तो उन्हें आंदोलन कड़ा करना पड़ेगा।