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Kathua News: नए राशनकार्ड न बनने से लोग परेशान
Mon, 09 Jun 2025 01:22 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Mon, 09 Jun 2025 01:22 AM IST
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रामकोट। नए राशनकार्ड बनाने की प्रकिया बंद होने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नए राशन कार्ड न बन पाने के कारण लोग बुढ़ापा और विधवा पेंशन आदि सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने से भी वंचित हो रहे हैं। लोगों ने राज्य सरकार से राशन कार्ड बनवाने की मांग की है।
ग्रामीणों ने बताया कि 14 वर्ष पूर्व राशन कार्ड बनाने के लिए सर्वे की गई थी। उसके बाद नए राशन कार्ड बनाने के लिए कोई भी सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है। लोगों का कहना है कि संयुक्त परिवार होने के कारण दिक्कतें और भी ज्यादा हैं। नए राशन कार्ड न बन पाने के कारण तहसील के 22 पंचायतों से लोगों को बुढ़ापा पेंशन लगाने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीण राम कुमार ने बताया कि न तो विभाग राशन कार्ड बनवा रहा है और न ही पुराने राशन कार्ड में दर्ज आर्थिक स्थिति में कोई तब्दीली करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को वर्तमान आबादी और आर्थिक स्थिति के हिसाब से राशन कार्ड बनवाने चाहिए, ताकि लोगों की समस्याओं का समाधान हो सके।
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धान जसदार पंचायत के निवासी ब्रह्मदत्त ने बताया कि नए राशन कार्ड बनवाने के लिए लोग संबंधित कार्यालय के चक्कर लगाकर थक चुके हैं। इसके बावजूद सरकार, जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी लोगों की इस मांग को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
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ग्रामीणों ने बताया कि 14 वर्ष पूर्व राशन कार्ड बनाने के लिए सर्वे की गई थी। उसके बाद नए राशन कार्ड बनाने के लिए कोई भी सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है। लोगों का कहना है कि संयुक्त परिवार होने के कारण दिक्कतें और भी ज्यादा हैं। नए राशन कार्ड न बन पाने के कारण तहसील के 22 पंचायतों से लोगों को बुढ़ापा पेंशन लगाने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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ग्रामीण राम कुमार ने बताया कि न तो विभाग राशन कार्ड बनवा रहा है और न ही पुराने राशन कार्ड में दर्ज आर्थिक स्थिति में कोई तब्दीली करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को वर्तमान आबादी और आर्थिक स्थिति के हिसाब से राशन कार्ड बनवाने चाहिए, ताकि लोगों की समस्याओं का समाधान हो सके।
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धान जसदार पंचायत के निवासी ब्रह्मदत्त ने बताया कि नए राशन कार्ड बनवाने के लिए लोग संबंधित कार्यालय के चक्कर लगाकर थक चुके हैं। इसके बावजूद सरकार, जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी लोगों की इस मांग को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।