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Kathua News: दाखिला नियम बदलने पर बिफरे विद्यार्थी डिग्री कॉलेज के बाहर सड़क की जाम

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new rule, protest
-समझाने पर भी सड़क से नहीं हटे तो पुलिस ने जबरन उठा खाली कराई सड़क
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। पांचवें सेमेस्टर में दाखिला नियम बदलने पर विद्यार्थियों का रोष थमने का नाम नहीं ले रहा है। वीरवार को स्टूडेंट एक्शन फ्रंट के बैनर तले विद्यार्थियों ने राजकीय डिग्री कॉलेज के सामने रोड को अवरुद्ध कर दिया। समझाने पर भी सड़क से नहीं हटे तो पुलिस ने जबरन उठाकर सड़क खाली कराई।
नए नियमों के खिलाफ विद्यार्थियों के शुरू धरने की सूचना पर कठुआ थाना प्रभारी अजय सिंह चिब मौके पर पहुंचे। उन्होंने विद्यार्थियों को वहां से हटने के लिए कहा, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने यह कहते हुए इंकार कर दिया कि गत शनिवार को भी कॉलेज प्रबंधन ने दो दिनों के भीतर विश्वविद्यालय प्रबंधन से इस मसले में बात कर समाधान करने का आश्वासन दिया था, लेकिन कोई राहत नहीं मिली है। इससे वे दोबारा सड़क पर उतरने के लिए मजबूर हुए हैं। अब वह तभी हटेंगे जब विश्वविद्यालय उनके हक में फैसला देगा।
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इसके बाद कॉलेज प्रो. यशपाल शर्मा पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को बताया कि प्रबंधन विश्वविद्यालय से बात कर रहा है। 24 घंटे में अच्छी खबर मिलेगी। लेकिन विद्यार्थी नहीं माने और कहा कि ऐसा है तो कॉलेज प्रबंधन मीडिया में रिपोर्ट दे। इसके बाद वह प्रदर्शन बंद कर देंगे। इसके बाद पुलिस ने जबरन विद्यार्थियों को सड़क से हटा दिया। इस मौके पर स्टूडेंट एक्शन फ्रंट कॉलेज अध्यक्ष अभय, अमन, सुमित, पुशविंदर, विशाल, अंश, पीयुष, राहुल, प्रगति शर्मा, विशाली, वंशिका, अंजली, वंदना, आरती, सुमित उपस्थित रहे।
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पुलिस की कार्रवाई पर विद्यार्थियों ने जताया रोष
पुलिस की कार्रवाई पर विद्यार्थियों ने रोष जताया। छात्र नेता सन्नी डोगरा ने कहा कि यह मौलिक अधिकार का हनन है। पर वह डरे नहीं हैं। 24 घंटे में विश्वविद्यालय प्रबंधन ने राहत नहीं प्रदान की तो दोबारा दोगुनी संख्या विद्यार्थी सड़क पर उतरेंगे। तब तक प्रदर्शन जारी रखेंगे जब तक विद्यार्थियों को उनका हक नहीं दिया जाता। डोगरा ने कहा कि नई शिक्षा नीति का हवाला देते हुए सरकार ने दाखिले के नए मापदंड निर्धारित किए हैं। जो शिक्षा स्तर को उठाने के बजाय असफलता को छिपाने के प्रयास मात्र हैं। सरकार ने युवाओं को दो करोड़ रोजगार का वायदा किया था जिसे वे आजतक पूरा नहीं कर पाई है। लिहाजा वह रोजगार देने से बचने के लिए उच्च शिक्षा पूरी ही नहीं देना चाहती है। इसलिए हथकंडे अपना रही है।
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