{"_id":"638ba472a162563e69584e6d","slug":"kathua-kathua-news-jmu2736476167","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kathua News: सहानुभूति नहीं शिक्षा चाहिए साहब!","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kathua News: सहानुभूति नहीं शिक्षा चाहिए साहब!
विज्ञापन
कठुआ। विशेष रूप से सक्षम बच्चों (दिव्यांगों) के लिए जिले में शिक्षा की लौ घटती नजर आ रही है। शारीरिक और मानसिक चुनौतियों के साथ जन्मे बच्चों को जिले में शिक्षा के पर्याप्त अवसर हासिल नहीं हो रहे हैं। हर साल मूल्यांकन कराया जाता है, दिव्यांग बच्चों को स्कूल भी पहुंचाया जाता है, लेकिन स्कूलों में ऐसे बच्चों के लिए व्यवस्था के नाम पर कुछ भी नहीं है। साफ शब्दों में यदि कहा जाए तो जिले के विभिन्न सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे एक हजार के लगभग दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए मात्र एक प्रशिक्षित शिक्षक ही उपलब्ध है। राजबाग में ऐसे बच्चों के लिए मात्र एक सेंटर है जहां यह शिक्षक तैनात हैं। ऐसे में क्षेत्र के बच्चों को तो कुछ हद तक लाभ मिल जाता है लेकिन अन्य क्षेत्रों के बच्चों के लिए अव्यवस्था में अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाना मुश्किल हो जाता है। थक हार के बच्चे घर बैठ जाते हैं और अभिभावक भी हिम्मत हार जाते हैं।
शिक्षा विभाग ने इसी साल 72 ऐसे बच्चों को स्कूल में दाखिल दिलाया, जो दिव्यांग थे। इनकी पहचान की गई और इन्हें नजदीक स्कूलों में दाखिला दिलाया गया। यह बच्चे या तो कभी स्कूल गए ही नहीं या फिर स्कूल छोड़ चुके थे। हर साल ऐसे बच्चों की पहचान कर स्कूल लाया जाता है। लेकिन न तो विशेष शिक्षक है और न ही विशेष सुविधाएं लिहाजा एक समय पर अभिभावक भी हिम्मत हार जाते हैं और बच्चे पढ़ाई लिखाई छोड़ देते हैं। शारीरिक और मानसिक चुनौती के बीच ऐसे बच्चों के प्रति सरकार का रवैया भी उदासीन है। नए स्पेशल एजूकेटर (विशेष शिक्षक) की न तो तैनाती की जाती है और न ही स्कूलों में तैनात स्टॉफ का बतौर विशेष शिक्षक क्षमतावर्धन किया जाता है। नतीजतन, विशेष रूप से सक्षम यह बच्चे सरकारी उदासीनता से अपने भविष्य को भी खोते जा रहे हैं।
.....................
जिले में दिव्यांग बच्चों के लिए वर्तमान में एक ही स्पेशल एजूकेटर है। हर वर्ष ऐसे बच्चों की पहचान कर शिक्षा विभाग इन्हें स्कूलों में दाखिला दिलाता है। बाकायदा मूल्यांकन कर इन्हें दिव्यांग सहायक उपकरण भी उपलब्ध करवाए जाते हैं।
विज्ञापन
प्रकाश लाल थापा
मुख्य शिक्षा अधिकारी कठुआ
विज्ञापन
शिक्षा विभाग ने इसी साल 72 ऐसे बच्चों को स्कूल में दाखिल दिलाया, जो दिव्यांग थे। इनकी पहचान की गई और इन्हें नजदीक स्कूलों में दाखिला दिलाया गया। यह बच्चे या तो कभी स्कूल गए ही नहीं या फिर स्कूल छोड़ चुके थे। हर साल ऐसे बच्चों की पहचान कर स्कूल लाया जाता है। लेकिन न तो विशेष शिक्षक है और न ही विशेष सुविधाएं लिहाजा एक समय पर अभिभावक भी हिम्मत हार जाते हैं और बच्चे पढ़ाई लिखाई छोड़ देते हैं। शारीरिक और मानसिक चुनौती के बीच ऐसे बच्चों के प्रति सरकार का रवैया भी उदासीन है। नए स्पेशल एजूकेटर (विशेष शिक्षक) की न तो तैनाती की जाती है और न ही स्कूलों में तैनात स्टॉफ का बतौर विशेष शिक्षक क्षमतावर्धन किया जाता है। नतीजतन, विशेष रूप से सक्षम यह बच्चे सरकारी उदासीनता से अपने भविष्य को भी खोते जा रहे हैं।
विज्ञापन
.....................
जिले में दिव्यांग बच्चों के लिए वर्तमान में एक ही स्पेशल एजूकेटर है। हर वर्ष ऐसे बच्चों की पहचान कर शिक्षा विभाग इन्हें स्कूलों में दाखिला दिलाता है। बाकायदा मूल्यांकन कर इन्हें दिव्यांग सहायक उपकरण भी उपलब्ध करवाए जाते हैं।
विज्ञापन
प्रकाश लाल थापा
मुख्य शिक्षा अधिकारी कठुआ