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Kathua News: शहर में फैला है 250 टन कचरा, मुंह ढककर गुजर रहे लोग
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अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन करते सफाई कर्मी। संवाद
- फोटो : KATHUA
कठुआ। सफाई कर्मचारियों की पांच दिनों से जारी हड़ताल के चलते शहर के सभी चौक-चौराहों पर कचरे का अंबार लग गया। इससे उठने वाली बदबू अब लोगों को परेशान कर रही है। लोगों को नाक दबाकर गुजरना पड़ रहा है। हड़ताल के कारण शहर में कचरा न उठने के कारण मुखर्जी चौक, कॉलेज मार्ग, जराई चौक, ओल्ड सुपर बाजार, अंबेडकर ब्रिज के साथ शहर के सभी वार्डों के गली-मोहल्ले कचरे से पट गई है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए शनिवार को नगर परिषद प्रशासन ने सफाई कराने की कोशिश की। इस दौरान भनक लगते ही मौके पर पहुंचे हड़ताली सफाई कर्मियों ने कूड़ा उठाने वाले वाहनों के टायर से हवा निकाल दी। साथ ही विरोध प्रदर्शन किया। इससे लोगों का जीना मुहाल हो गया है। वहीं, लगातार पांच दिनों से शहर के सभी 21 वार्डों में झाड़ू न चलने के कारण करीब 250 टन कचरे ने शहर के प्रमुख स्थलों को बदसूरत बना दिया है।
अस्थायी सफाई कर्मचारियों को नियमित किए जाने और अन्य लंबित मांगों को लेकर अर्बन लोकल बॉडी सफाई कर्मचारी यूनियन की हड़ताल लगातार पांचवें दिन भी जारी रही। शनिवार को नगर परिषद कार्यालय में जमा हुए सफाई कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए अपने गुस्से का इजहार किया और जब तक मांगें पूरी नहीं हो जातीं तब तक सफाई कर्मचारियों ने हड़ताल पर रहने का ऐलान किया। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण सबसे ज्यादा बदहाल शहर का कॉलेज रोड दिखाई दिया। जहां वार्ड 2 को जाने वाली मुख्य गली के सामने, कोआपरेटिव मार्केटिंग सोसायटी के पास, जिला पुलिस मुख्यालय के पास कचरे का उठान नहीं हुआ। इसके अलावा शहर के विभिन्न वार्डों के मोहल्लों में लगे डस्टबिन की हालत भी बदहाल हो गई है। जहां डस्टबिन से ज्यादा कचरा गली में फैल रहा है। हड़ताल का असर नाले-नालियों की सफाई पर भी देखने को मिला।
नगर परिषद कार्यालय में प्रदर्शन कर रहे सफाई कर्मचारियों का नेतृत्व कर रहे यूनियन के जिला प्रधान सोमराज ने कहा कि वह लोग पहले भी सात साल की सेवा अवधि पूरी कर चुके सफाई कर्मचारियों को नियमित करने, सफाई कर्मचारियों को ढाई दिन का अतिरिक्त वेतन देने, सफाई कर्मचारियों के खाली पदों को भरे जाने और सफाई कर्मचारी की भर्ती के लिए अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता के प्रावधान को खत्म करने की मांग को लेकर अपनी लड़ाई लड़ चुके हैं। लेकिन तब विभाग के उच्चाधिकारियों ने हर उन्हें आश्वासन देकर हड़ताल से उठा दिया लेकिन इस बार वह अपना हक लेने के बाद ही हड़ताल को खत्म करेंगे। इसके लिए पूरे जम्मू-कश्मीर में सफाई कर्मचारी अपनी आवाज उठा रहे है। उन्होंने कहा कि बीते शुक्रवार को भी परिषद के अधिकारियों द्वारा उन्हें झूठा आश्वासन देकर हड़ताल से उठाने का प्रयास किया गया था, लेकिन अब सफाई कर्मचारी सजग हो चुके हैं और किसी के भी द्वारा छले नहीं जा सकते हैं। सरकार अगर उनकी आवाज को दबाने का प्रयास करती है तो वह लोग जो अभी तक शांतिपूर्वक अपना धरना प्रदर्शन कर रहे हैं वह उग्र हो सकते हैं।
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शहर में साफ-सफाई का जिम्मा नगर परिषद का है। जिसमें सरकार अगर अस्थायी कर्मचारियों से काम लेना चाहती है तो उसे इसके लिए मानकों को तय कर कर्मचारियों की भर्ती करनी चाहिए। इस तरह से अगर हर महीने हड़ताल होती रहेगी। तो डेंगू के कारण पहले परेशान लोगों की मुश्किल और बढ़ जाएगी। अस्थायी कर्मचारी अगर हड़ताल पर बैठे हैं तो विभाग अपने नियमित सफाई कर्मचारियों से शहर में लगे कचरे के ढेर को हटवाए।
रमेश भारती, निवासी वार्ड 5
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सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के चलते पूरा शहर कचरे के ढेर के नीचे दबा हुआ है। सरकार न तो कचरे को हटाने के लिए कोई व्यवस्था कर रही है और न ही हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मचारियों की मांग को पूरा कर रही है। ऐसे हालात में लोगों को कचरे से भरे प्रदूषित वातावरण में जीना पड़ रहा है। अगर हड़ताल और लंबी चली तो आने वाले दिनों में शहर में बीमारियां फैल सकती है।
विक्रमजीत वर्मा, निवासी वार्ड 14
मामले में मंडलायुक्त और सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रधान की ओर से आश्वासन दिया गया है। मंडलायुक्त की ओर से वरियता सूची पांच दिन के भीतर जारी करने और ढ़ाई दिन के वेतन को लेकर भी आदेश जारी किया गया है। लेकिन सफाई कर्मी मानने को तैयार नहीं है। लोगों को मुसीबत में डाला जा रहा है जो जायज नहीं हैं।
संतोष कोतवाल
मुख्य कार्यकारी अधिकारी
नगर परिषद कठुआ
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अस्थायी सफाई कर्मचारियों को नियमित किए जाने और अन्य लंबित मांगों को लेकर अर्बन लोकल बॉडी सफाई कर्मचारी यूनियन की हड़ताल लगातार पांचवें दिन भी जारी रही। शनिवार को नगर परिषद कार्यालय में जमा हुए सफाई कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए अपने गुस्से का इजहार किया और जब तक मांगें पूरी नहीं हो जातीं तब तक सफाई कर्मचारियों ने हड़ताल पर रहने का ऐलान किया। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण सबसे ज्यादा बदहाल शहर का कॉलेज रोड दिखाई दिया। जहां वार्ड 2 को जाने वाली मुख्य गली के सामने, कोआपरेटिव मार्केटिंग सोसायटी के पास, जिला पुलिस मुख्यालय के पास कचरे का उठान नहीं हुआ। इसके अलावा शहर के विभिन्न वार्डों के मोहल्लों में लगे डस्टबिन की हालत भी बदहाल हो गई है। जहां डस्टबिन से ज्यादा कचरा गली में फैल रहा है। हड़ताल का असर नाले-नालियों की सफाई पर भी देखने को मिला।
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नगर परिषद कार्यालय में प्रदर्शन कर रहे सफाई कर्मचारियों का नेतृत्व कर रहे यूनियन के जिला प्रधान सोमराज ने कहा कि वह लोग पहले भी सात साल की सेवा अवधि पूरी कर चुके सफाई कर्मचारियों को नियमित करने, सफाई कर्मचारियों को ढाई दिन का अतिरिक्त वेतन देने, सफाई कर्मचारियों के खाली पदों को भरे जाने और सफाई कर्मचारी की भर्ती के लिए अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता के प्रावधान को खत्म करने की मांग को लेकर अपनी लड़ाई लड़ चुके हैं। लेकिन तब विभाग के उच्चाधिकारियों ने हर उन्हें आश्वासन देकर हड़ताल से उठा दिया लेकिन इस बार वह अपना हक लेने के बाद ही हड़ताल को खत्म करेंगे। इसके लिए पूरे जम्मू-कश्मीर में सफाई कर्मचारी अपनी आवाज उठा रहे है। उन्होंने कहा कि बीते शुक्रवार को भी परिषद के अधिकारियों द्वारा उन्हें झूठा आश्वासन देकर हड़ताल से उठाने का प्रयास किया गया था, लेकिन अब सफाई कर्मचारी सजग हो चुके हैं और किसी के भी द्वारा छले नहीं जा सकते हैं। सरकार अगर उनकी आवाज को दबाने का प्रयास करती है तो वह लोग जो अभी तक शांतिपूर्वक अपना धरना प्रदर्शन कर रहे हैं वह उग्र हो सकते हैं।
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शहर में साफ-सफाई का जिम्मा नगर परिषद का है। जिसमें सरकार अगर अस्थायी कर्मचारियों से काम लेना चाहती है तो उसे इसके लिए मानकों को तय कर कर्मचारियों की भर्ती करनी चाहिए। इस तरह से अगर हर महीने हड़ताल होती रहेगी। तो डेंगू के कारण पहले परेशान लोगों की मुश्किल और बढ़ जाएगी। अस्थायी कर्मचारी अगर हड़ताल पर बैठे हैं तो विभाग अपने नियमित सफाई कर्मचारियों से शहर में लगे कचरे के ढेर को हटवाए।
रमेश भारती, निवासी वार्ड 5
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सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के चलते पूरा शहर कचरे के ढेर के नीचे दबा हुआ है। सरकार न तो कचरे को हटाने के लिए कोई व्यवस्था कर रही है और न ही हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मचारियों की मांग को पूरा कर रही है। ऐसे हालात में लोगों को कचरे से भरे प्रदूषित वातावरण में जीना पड़ रहा है। अगर हड़ताल और लंबी चली तो आने वाले दिनों में शहर में बीमारियां फैल सकती है।
विक्रमजीत वर्मा, निवासी वार्ड 14
मामले में मंडलायुक्त और सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रधान की ओर से आश्वासन दिया गया है। मंडलायुक्त की ओर से वरियता सूची पांच दिन के भीतर जारी करने और ढ़ाई दिन के वेतन को लेकर भी आदेश जारी किया गया है। लेकिन सफाई कर्मी मानने को तैयार नहीं है। लोगों को मुसीबत में डाला जा रहा है जो जायज नहीं हैं।
संतोष कोतवाल
मुख्य कार्यकारी अधिकारी
नगर परिषद कठुआ