कठुआ। शहर के वार्ड 8 में जारी श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के छठे दिन शनिवार को भगवान श्रीकृष्ण व रुकमणी के विवाह की झांकी प्रस्तुत की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जमकर पुष्प वर्षा कर अपनी खुशी का इजहार किया। वहीं कथा व्यास महेश दास शास्त्री ने भागवत कथा के महत्व को बताते हुए कहा कि जो भक्त प्रेमी कृष्ण- रुकमणी के विवाह उत्सव में शामिल होते है, उनकी वैवाहिक समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है।
कथाव्यास ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि मन में उठते अशुभ विचार दूसरों से ईर्ष्या, घृणा, असंतोष, क्रोध, सदा शक करने वाला और पराये आसरे जीने वाला मनुष्य सदा दु:खी रहता है। इन दोषों से बचने का उपाय है कि जब क्रोध आये तो मुस्कराने लगें, जब कोई चिंता सताए तो चिंतन करने लगें, जब कोई बुरा विचार आये तो प्रभु नाम का स्मरण करने लगे और जब मन में कोई क्लेश की स्थिति बने तब भूतकाल में घटित किसी सुखद और मनोरंजक घटना की याद करने लगे। यानी किसी भी उपाय से क्रोध, चिंता और क्लेश इत्यादि करने से बचते रहें। शास्त्री जी ने कहा कि यह प्रकृति का नियम है कि आप जितना बोते हैं, उससे कई गुणा अधिक आपको मिलता है। इसकी जीती-जागती मिसाल हमारे किसान हैं। वह यदि 50 किलो बीज खेतों में लगाते हैं तो उसकी फसल कई गुना अधिक होकर उन्हें वापस मिलती है। इसलिय याद रहे, इस जीवन में हमें, वही लौट कर मिलता है जो हम देते हैं, चाहे तत्काल मिले या कभी बाद में मिले। हमें आज जो भी मिल रहा है, वह हमारा ही दिया हुआ मिल रहा है, क्योंकि नियमानुसार बिना दिये यहां कुछ नहीं मिलता, इसीलिए हमें दूसरों को वैसा ही देना चाहिए जैसा हम खुद पाना चाहते हैं। अंत में शास्त्री जी ने समझाया कि यदि दुखों से वास्तव में बचना चाहते हो तो मन को दूषित न होने दें, वाणी से संयत रहे, मन में बुरे विचार न आते दें, बुरे काम न करें, सदा अच्छा आचरण ही करें तो फल दु:ख हो ही नहीं सकता।