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सात वर्षों से चिल्ड्रन पार्क का काम पूरा होने का इंतजार कर रहे लोग
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हीरानगर। कस्बे में मिनी स्पोर्ट्स स्टेडियम के नजदीक करीब सात वर्ष पहले शुरू हुआ चिल्ड्रन पार्क का कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। करीब पौने दो करोड़ रुपये की लागत से 14 कनाल भूमि पर बनने वाले चिल्ड्रन पार्क में अभी तक एक व्यू प्वाइंट, सैर करने के लिए आधा अधूरा ट्रैक और कुछ झूले ही स्थापित हो पाए हैं। अभी भी इसका निर्माण कार्य करवा रहे फ्लोरीकल्चर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इसके पूरे होने में दो वर्ष तक का समय लग सकता है। कछुआ चाल से चल रहा यह निर्माण कार्य अब कस्बे में चर्चा का विषय बन गया है और लोगों में विभाग के खिलाफ भारी रोष है।
स्थानीय निवासी धीरज गुप्ता ने कहा कि सात साल पहले यह कार्य शुरू हुआ था तब यह कहा गया था कि दो या तीन वर्ष में यह पूरा हो जाएगा। लेकिन बड़े अफसोस की बात है कि इतने साल गुजरने के बाद भी यहां आधा काम भी नहीं हो पाया है। अगर इसी धीमी गति से इसका निर्माण कार्य चलता रहा तो जो काम सात वर्ष पहले हुआ है वह किसी काम का नहीं रहेगा। जैसे कि जहां पैदल चलने के लिए जो ट्रैक बना हुआ है वह पूरी तरह से झाड़ियों में समा गया है और पानी की निकासी न होने के कारण जगह-जगह कीचड़ फैला हुआ है। यहां साल में कुछ महीने ही काम होता दिखता है उसके बाद फिर इसे इसके हालत पर छोड़ दिया जाता है। उम्मीद थी कि यह पार्क बनने पर कस्बे के बच्चे यहां आकर खेल सकते और अन्य लोग भी सुबह शाम यहां शुद्ध वातावरण में जल्द सैर कर सकेंगे। लेकिन विभाग के सुस्त रवैया की वजह से अभी भी यह काम कई वर्षों तक पूरा होता नहीं दिख रहा है। इस कार्य को जल्द पूरा करने की मांग को लेकर जल्द विभाग के उच्चाधिकारियों से जम्मू में मिलेंगे अगर मांग पूरी नहीं हुई तो प्रदर्शन का सिलसिला शुरू करना पड़ेगा। नगर पालिका समिति के सदस्य रमेश कुमार ने कहा कि पहले भी कई बार अधिकारियों से इस कार्य को जल्द पूरा करने की मांग कर चुके हैं। सात सालों से थोड़ा-थोड़ा कर यह कार्य हो रहा है। लेकिन अब अगर विभाग ने निर्माण कार्य की गति तेज नहीं की तो कस्बे के लोग विभाग के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे।
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1.74 करोड़ की लागत से यह पार्क बनेगा। अब तक इस पर 53 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। जल्द ही बाकी राशि जारी होते ही बाकी काम भी पूरा होगा। केपेक्स के तहत हर साल जितनी राशि मिलती है उसी हिसाब से कार्य होता है। जम्मू प्रांत में इस तरह के 55 प्रोजेक्ट चल रहे हैं हर साल इनके लिए 13 करोड़ रुपयों का बजट होता है जिसे बांट कर लगाया जाता है। एक व्यू प्वाइंट पहले बनाया गया है दूसरे का निर्माण कार्य जारी है। इसी के साथ बच्चों के खेलने के लिए झूले स्थापित कर दिए गए हैं। दो वर्षों के भीतर यह पार्क बनकर तैयार हो जाएगा। - डीके कैथ, मुख्य अभियंता फ्लोरीकल्चर विभाग
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स्थानीय निवासी धीरज गुप्ता ने कहा कि सात साल पहले यह कार्य शुरू हुआ था तब यह कहा गया था कि दो या तीन वर्ष में यह पूरा हो जाएगा। लेकिन बड़े अफसोस की बात है कि इतने साल गुजरने के बाद भी यहां आधा काम भी नहीं हो पाया है। अगर इसी धीमी गति से इसका निर्माण कार्य चलता रहा तो जो काम सात वर्ष पहले हुआ है वह किसी काम का नहीं रहेगा। जैसे कि जहां पैदल चलने के लिए जो ट्रैक बना हुआ है वह पूरी तरह से झाड़ियों में समा गया है और पानी की निकासी न होने के कारण जगह-जगह कीचड़ फैला हुआ है। यहां साल में कुछ महीने ही काम होता दिखता है उसके बाद फिर इसे इसके हालत पर छोड़ दिया जाता है। उम्मीद थी कि यह पार्क बनने पर कस्बे के बच्चे यहां आकर खेल सकते और अन्य लोग भी सुबह शाम यहां शुद्ध वातावरण में जल्द सैर कर सकेंगे। लेकिन विभाग के सुस्त रवैया की वजह से अभी भी यह काम कई वर्षों तक पूरा होता नहीं दिख रहा है। इस कार्य को जल्द पूरा करने की मांग को लेकर जल्द विभाग के उच्चाधिकारियों से जम्मू में मिलेंगे अगर मांग पूरी नहीं हुई तो प्रदर्शन का सिलसिला शुरू करना पड़ेगा। नगर पालिका समिति के सदस्य रमेश कुमार ने कहा कि पहले भी कई बार अधिकारियों से इस कार्य को जल्द पूरा करने की मांग कर चुके हैं। सात सालों से थोड़ा-थोड़ा कर यह कार्य हो रहा है। लेकिन अब अगर विभाग ने निर्माण कार्य की गति तेज नहीं की तो कस्बे के लोग विभाग के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे।
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1.74 करोड़ की लागत से यह पार्क बनेगा। अब तक इस पर 53 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। जल्द ही बाकी राशि जारी होते ही बाकी काम भी पूरा होगा। केपेक्स के तहत हर साल जितनी राशि मिलती है उसी हिसाब से कार्य होता है। जम्मू प्रांत में इस तरह के 55 प्रोजेक्ट चल रहे हैं हर साल इनके लिए 13 करोड़ रुपयों का बजट होता है जिसे बांट कर लगाया जाता है। एक व्यू प्वाइंट पहले बनाया गया है दूसरे का निर्माण कार्य जारी है। इसी के साथ बच्चों के खेलने के लिए झूले स्थापित कर दिए गए हैं। दो वर्षों के भीतर यह पार्क बनकर तैयार हो जाएगा। - डीके कैथ, मुख्य अभियंता फ्लोरीकल्चर विभाग
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