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ऑटो रिक्शा के रूट से ई-रिक्शा को हटाने की मांग उठाई
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कठुआ। शहर में बढ़ते ई-रिक्शा के चलते रोजगार के संकट से जूझ रहे डीजल ऑटो यूनियन के सदस्यों ने क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी सुनील कुमार से मिलकर सभी ई-रिक्शा को ऑटो रिक्शा के रूट से हटाए जाने की मांग की है। शनिवार को क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी से मिलने पहुंचे ऑटो यूनियन के सदस्यों की ओर से उठाई गई मांग के बाद क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने मामले की जांच करने के लिए सोमवार को कॉलेज रोड पर विशेष नाका लगाए जाने का आश्वासन दिया है।
क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय पहुंचे ऑटो यूनियन के प्रधान विजय कुमार ने बताया कि शहर के कॉलेज रोड पर पहले से ही करीब 140 ऑटो रिक्शा चलते हैं। अब 100 से अधिक ई-रिक्शा आ जाने के कारण उनका रोजगार पूरी तरह से ठप हो गया है। इससे ऑटो चला कर अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले लोगों के सामने रोजी रोटी का संकट आ गया है। उन्होंने कहा कि करीब 3 माह पूर्व भी उन्होंने इसको लेकर जब अपना रोष जताया था तो ई-रिक्शा को उनके रूट से हटाए जाने का आदेश दिया गया था, लेकिन उसे लागू करने के लिए कोई कार्यवाही नहीं की गई। मौजूदा समय में स्थिति यह है कि इंश्योरेंस, टोकन, पैसेंजर टैक्स, परमिट जैसे दस्तावेज बनाने में 70 से 80 हजार रुपया खर्च करने वाले ऑटो चालकों के पास शाम के समय डीजल भरवाने के भी पैसे नहीं बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी ही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में ऑटो चला कर अपना गुजारा करने वाले लोग दरबदर होने के लिए मजबूर हो जाएंगे। लिहाजा इस संबंध में जल्द कोई कार्यवाही की जाए। ऑटो चालकों की समस्या सुनने के बाद क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी सुनील कुमार ने कहा कि शहर में चलने वाले ई-रिक्शा के लिए अलग से रूट निर्धारित किए गए हैं। लेकिन अगर इसके बावजूद वह ऑटो के रूट पर चल रहे हैं तो इसकी जांच के लिए सोमवार को वह कॉलेज रोड पर नाका लगाएंगे और जिन यात्री वाहनों के रूट परमिट या अन्य दस्तावेज उचित नहीं पाए जाएंगे। उनके ऊपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय पहुंचे ऑटो यूनियन के प्रधान विजय कुमार ने बताया कि शहर के कॉलेज रोड पर पहले से ही करीब 140 ऑटो रिक्शा चलते हैं। अब 100 से अधिक ई-रिक्शा आ जाने के कारण उनका रोजगार पूरी तरह से ठप हो गया है। इससे ऑटो चला कर अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले लोगों के सामने रोजी रोटी का संकट आ गया है। उन्होंने कहा कि करीब 3 माह पूर्व भी उन्होंने इसको लेकर जब अपना रोष जताया था तो ई-रिक्शा को उनके रूट से हटाए जाने का आदेश दिया गया था, लेकिन उसे लागू करने के लिए कोई कार्यवाही नहीं की गई। मौजूदा समय में स्थिति यह है कि इंश्योरेंस, टोकन, पैसेंजर टैक्स, परमिट जैसे दस्तावेज बनाने में 70 से 80 हजार रुपया खर्च करने वाले ऑटो चालकों के पास शाम के समय डीजल भरवाने के भी पैसे नहीं बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी ही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में ऑटो चला कर अपना गुजारा करने वाले लोग दरबदर होने के लिए मजबूर हो जाएंगे। लिहाजा इस संबंध में जल्द कोई कार्यवाही की जाए। ऑटो चालकों की समस्या सुनने के बाद क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी सुनील कुमार ने कहा कि शहर में चलने वाले ई-रिक्शा के लिए अलग से रूट निर्धारित किए गए हैं। लेकिन अगर इसके बावजूद वह ऑटो के रूट पर चल रहे हैं तो इसकी जांच के लिए सोमवार को वह कॉलेज रोड पर नाका लगाएंगे और जिन यात्री वाहनों के रूट परमिट या अन्य दस्तावेज उचित नहीं पाए जाएंगे। उनके ऊपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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