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Kathua News: धान की पकती फसल पर बारिश और तेज हवा का खतरा
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हीरानगर। जम्मू-कश्मीर में 6 अक्तूबर की रात मौसम ने अचानक करवट बदली। ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी हुई, जबकि मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में ओलावृष्टि की खबरें सामने आईं। कठुआ जिले में भी कई स्थानों पर बारिश के साथ हवाएं चलीं। मौसम सुहावना होने से आम लोगों ने राहत की सांस ली लेकिन खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
हीरानगर उपमंडल और सीमावर्ती क्षेत्रों में इन दिनों धान की फसल पकने के दौर में है। कई स्थानों पर किसानों ने कटाई भी शुरू कर दी है। ऐसे में अचानक बदले मौसम ने किसानों को नुकसान की आशंका से चिंतित कर दिया है। किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में तेज हवाओं के साथ बारिश होती है तो खेतों में खड़ी पक चुकी फसल गिर सकती है, जबकि कटाई के लिए तैयार फसल भी बारिश के कारण प्रभावित हो सकती है।
हीरानगर उपमंडल के कुछ हिस्सों से धान की फसल के खेतों में गिरने की सूचनाएं भी सामने आ रही हैं। किसानों को आशंका है कि यदि मौसम और बिगड़ा तो पहले से कमजोर हो चुकी फसल को भारी नुकसान हो सकता है। इससे उनकी महीनों की मेहनत और लागत पर पानी फिरने का खतरा है।
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किसान यशपाल ने कहा कि हर साल धान की फसल पकने के समय किसानों को मौसम की मार झेलनी पड़ती है। कभी तेज हवाएं तो कभी बारिश पकती फसल के लिए परेशानी बन जाती है। उन्होंने कहा कि कई बार फसल खेतों में गिरने के बाद समय पर कटाई नहीं हो पाती और खेत में ही फसल खराब होने लगती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
वहीं किसान बोधराज ने बताया कि इस बार पिछले वर्ष की तुलना में बारिश कम हुई है। उन्होंने कहा कि पिछले साल बारिश अधिक होने के कारण धान की फसल को दोहरी मार झेलनी पड़ी थी। पहले अत्यधिक बारिश और फिर फसल पकने के समय हुई बारिश से किसानों को काफी नुकसान हुआ था। इस बार बारिश औसत रहने के बाद किसानों ने बड़ी मेहनत से फसल को तैयार किया है।
बोधराज ने कहा कि अब फसल पकने लगी है और कई जगह कटाई भी शुरू हो चुकी है। ऐसे में यदि तेज हवा चलती है और फसल खेतों में गिर जाती है तो किसानों को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। एक ओर खेत में खड़ी फसल खराब होने का खतरा रहेगा, वहीं दूसरी ओर गिरी हुई फसल की कटाई में भी अतिरिक्त मेहनत और खर्च आएगा।
किसानों का कहना है कि मौसम की मार से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए सरकार की ओर से मुआवजा तो दिया जाता है लेकिन कई बार यह राशि वास्तविक नुकसान की तुलना में काफी कम होती है। किसानों ने मांग की कि फसल खराब होने की स्थिति में नुकसान का उचित आकलन कर उन्हें पर्याप्त मुआवजा दिया जाए ताकि मौसम की मार से पहले ही आर्थिक दबाव झेल रहे किसानों को कुछ राहत मिल सके।
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हीरानगर उपमंडल और सीमावर्ती क्षेत्रों में इन दिनों धान की फसल पकने के दौर में है। कई स्थानों पर किसानों ने कटाई भी शुरू कर दी है। ऐसे में अचानक बदले मौसम ने किसानों को नुकसान की आशंका से चिंतित कर दिया है। किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में तेज हवाओं के साथ बारिश होती है तो खेतों में खड़ी पक चुकी फसल गिर सकती है, जबकि कटाई के लिए तैयार फसल भी बारिश के कारण प्रभावित हो सकती है।
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हीरानगर उपमंडल के कुछ हिस्सों से धान की फसल के खेतों में गिरने की सूचनाएं भी सामने आ रही हैं। किसानों को आशंका है कि यदि मौसम और बिगड़ा तो पहले से कमजोर हो चुकी फसल को भारी नुकसान हो सकता है। इससे उनकी महीनों की मेहनत और लागत पर पानी फिरने का खतरा है।
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किसान यशपाल ने कहा कि हर साल धान की फसल पकने के समय किसानों को मौसम की मार झेलनी पड़ती है। कभी तेज हवाएं तो कभी बारिश पकती फसल के लिए परेशानी बन जाती है। उन्होंने कहा कि कई बार फसल खेतों में गिरने के बाद समय पर कटाई नहीं हो पाती और खेत में ही फसल खराब होने लगती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
वहीं किसान बोधराज ने बताया कि इस बार पिछले वर्ष की तुलना में बारिश कम हुई है। उन्होंने कहा कि पिछले साल बारिश अधिक होने के कारण धान की फसल को दोहरी मार झेलनी पड़ी थी। पहले अत्यधिक बारिश और फिर फसल पकने के समय हुई बारिश से किसानों को काफी नुकसान हुआ था। इस बार बारिश औसत रहने के बाद किसानों ने बड़ी मेहनत से फसल को तैयार किया है।
बोधराज ने कहा कि अब फसल पकने लगी है और कई जगह कटाई भी शुरू हो चुकी है। ऐसे में यदि तेज हवा चलती है और फसल खेतों में गिर जाती है तो किसानों को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। एक ओर खेत में खड़ी फसल खराब होने का खतरा रहेगा, वहीं दूसरी ओर गिरी हुई फसल की कटाई में भी अतिरिक्त मेहनत और खर्च आएगा।
किसानों का कहना है कि मौसम की मार से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए सरकार की ओर से मुआवजा तो दिया जाता है लेकिन कई बार यह राशि वास्तविक नुकसान की तुलना में काफी कम होती है। किसानों ने मांग की कि फसल खराब होने की स्थिति में नुकसान का उचित आकलन कर उन्हें पर्याप्त मुआवजा दिया जाए ताकि मौसम की मार से पहले ही आर्थिक दबाव झेल रहे किसानों को कुछ राहत मिल सके।