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Kathua News: गाली-गलौज और धमकी देने के चार साल पुराने मामले में दो आरोपी बरी
Thu, 07 May 2026 01:43 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Thu, 07 May 2026 01:43 AM IST
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अदालत से
साल 2022 का बनी के फतेहपुर का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। न्यायिक मजिस्ट्रेट बनी ने चार साल पुराने गाली-गलौज और धमकी देने के मामले में दो आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। अदालत ने माना कि मामला मूल रूप से पैसों के लेनदेन से जुड़ा निजी विवाद है।
यह चालान न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवानी अत्री की अदालत में दायर किया गया था। पीड़िता रानों देवी ने सुखदेव और स्वामी राज निवासी फतेहपुर बनी के खिलाफ गाली-गलौज और धमकी देने का आरोप लगाया था। उसने पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज करवाई। उसने बताया कि दोनों आरोपियों ने 1 अप्रैल 2022 को सुबह साढ़े छह बजे उसके घर के सामने पहुंचकर गाली-गलौज की, अपमानित किया और पुलिस के माध्यम से परेशान करने की धमकी दी।
शिकायतकर्ता का कहना था कि उसके दो बेटों की मजदूरी के 1600 रुपये और सिलाई के 1400 रुपये सहित कुल 3000 रुपये आरोपियों पर बकाया थे। जब उसने यह रकम मांगी तो आरोपी भड़क गए और अभद्र भाषा का प्रयोग कर उसे व उसके परिवार को धमकाया। जांच के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 504 (गाली-गलौज और धमकी देना) के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर चालान को 13 अप्रैल 2022 को कोर्ट में प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के बयान में कई विरोधाभास सामने आए। उसने माना कि यदि आरोपी उसके तीन हजार रुपये दे दें तो वह मामला वापस लेने को तैयार है। अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत स्वतंत्र गवाह कोर्ट में आरोपियों की सही पहचान तक नहीं कर पाया। इससे उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। कोर्ट ने शिकायतकर्ता और अन्य गवाह के बयानों में गंभीर विरोधाभास पाए गए। इसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि मामला मूल रूप से पैसों के भुगतान से जुड़ा निजी विवाद है, जिसे आपराधिक रंग दिया गया। इसके बाद कोर्ट ने दोनों आरोपी के जमानती बांड निरस्त कर उन्हें बरी करने का फैसला सुनाया गया।
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साल 2022 का बनी के फतेहपुर का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। न्यायिक मजिस्ट्रेट बनी ने चार साल पुराने गाली-गलौज और धमकी देने के मामले में दो आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। अदालत ने माना कि मामला मूल रूप से पैसों के लेनदेन से जुड़ा निजी विवाद है।
यह चालान न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवानी अत्री की अदालत में दायर किया गया था। पीड़िता रानों देवी ने सुखदेव और स्वामी राज निवासी फतेहपुर बनी के खिलाफ गाली-गलौज और धमकी देने का आरोप लगाया था। उसने पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज करवाई। उसने बताया कि दोनों आरोपियों ने 1 अप्रैल 2022 को सुबह साढ़े छह बजे उसके घर के सामने पहुंचकर गाली-गलौज की, अपमानित किया और पुलिस के माध्यम से परेशान करने की धमकी दी।
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शिकायतकर्ता का कहना था कि उसके दो बेटों की मजदूरी के 1600 रुपये और सिलाई के 1400 रुपये सहित कुल 3000 रुपये आरोपियों पर बकाया थे। जब उसने यह रकम मांगी तो आरोपी भड़क गए और अभद्र भाषा का प्रयोग कर उसे व उसके परिवार को धमकाया। जांच के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 504 (गाली-गलौज और धमकी देना) के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर चालान को 13 अप्रैल 2022 को कोर्ट में प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के बयान में कई विरोधाभास सामने आए। उसने माना कि यदि आरोपी उसके तीन हजार रुपये दे दें तो वह मामला वापस लेने को तैयार है। अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत स्वतंत्र गवाह कोर्ट में आरोपियों की सही पहचान तक नहीं कर पाया। इससे उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। कोर्ट ने शिकायतकर्ता और अन्य गवाह के बयानों में गंभीर विरोधाभास पाए गए। इसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि मामला मूल रूप से पैसों के भुगतान से जुड़ा निजी विवाद है, जिसे आपराधिक रंग दिया गया। इसके बाद कोर्ट ने दोनों आरोपी के जमानती बांड निरस्त कर उन्हें बरी करने का फैसला सुनाया गया।
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