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Kathua News: राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे सफेद हाथी बनकर रह गए सामुदायिक शौचालय
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बंद पड़ा शौचालय।
- फोटो : kathua news
कठुआ। राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे बने चार सामुदायिक शौचालय सिर्फ शो पीस बन कर रहे गए हैं। लाखों की लागत से बने प्रत्येक सामुदायिक शौचालय में साल भर ताला लटका रहता है। दरअसल, स्थायी साफ सफाई और पानी की व्यवस्था न होने से यह शौचालय बदबूदार बने रहते हैं। इनके पास से निकलना भी मुश्किल होता है।
कुछ ऐसा ही आलम ग्रामीण विभाग की ओर से शहर के हटली मोड़, सीटीएम के पास, टूरिस्ट रिसेप्शनिस्ट सेंटर लोगेट मोड़ और लच्छीपुर स्थित बने शौचालयों का है। ग्रामीण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन सामुदायिक शौचालयों को सिर्फ अमरनाथ यात्रियों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे बनाया गया है। इसके लिए हर वर्ष अमरनाथ यात्रा के दौरान संभाग स्तर पर आउटसोर्सिंग कंपनी के माध्यम से कार्यात्मक बनाया जाता है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि लाखों की लागत से बने इन शौचालयों को सरकार को सालभर कार्यात्मक बनाने के लिए स्थायी तौर पर बंदोबस्त करना चाहिए, ताकि इसका फायदा स्थानीय लोगों के साथ-साथ राजमार्ग पर सफर करने वाले यात्री ले सकें। स्थानीय सुरेश कुमार, अमृतपाल सिंह और शिवराज का कहना है कि कहने को तो यह सामुदायिक शौचालय हैं, लेकिन साल भर बंद रहने से यात्री खुले में शौच करने को मजबूर हो रहे हैं। एक तो इन शौचालयों का निर्माण ऐसी जगहों पर करवाया गया है कि यात्रियों को दिखाई ही नहीं देते हैं। इस शौचालयों के चारों तरफ इतनी झाड़ियां हैं कि लोगों को पता ही नहीं चलता है कि यहां कोई शौचालय भी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कम से कम विभाग को राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे शौचालय का साइनबोर्ड तो लगाना चाहिए।
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कोट
अमरनाथ यात्रा के शुरू होने से पहले ही सरकार ने संभाग स्तर के सभी शौचालयों के मरम्मत कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके बाद आउटसोर्सिंग के माध्यम से यात्रा के दौरान इन सभी शौचालय को कार्यात्मक बनाया जाएगा। यह सारी प्रक्रिया अमरनाथ यात्रा शुरू होने से पहले पूरी कर ली जाएगी।
-सुनील डोगरा, ब्लॉक विकास अधिकारी कठुआ।
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कुछ ऐसा ही आलम ग्रामीण विभाग की ओर से शहर के हटली मोड़, सीटीएम के पास, टूरिस्ट रिसेप्शनिस्ट सेंटर लोगेट मोड़ और लच्छीपुर स्थित बने शौचालयों का है। ग्रामीण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन सामुदायिक शौचालयों को सिर्फ अमरनाथ यात्रियों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे बनाया गया है। इसके लिए हर वर्ष अमरनाथ यात्रा के दौरान संभाग स्तर पर आउटसोर्सिंग कंपनी के माध्यम से कार्यात्मक बनाया जाता है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि लाखों की लागत से बने इन शौचालयों को सरकार को सालभर कार्यात्मक बनाने के लिए स्थायी तौर पर बंदोबस्त करना चाहिए, ताकि इसका फायदा स्थानीय लोगों के साथ-साथ राजमार्ग पर सफर करने वाले यात्री ले सकें। स्थानीय सुरेश कुमार, अमृतपाल सिंह और शिवराज का कहना है कि कहने को तो यह सामुदायिक शौचालय हैं, लेकिन साल भर बंद रहने से यात्री खुले में शौच करने को मजबूर हो रहे हैं। एक तो इन शौचालयों का निर्माण ऐसी जगहों पर करवाया गया है कि यात्रियों को दिखाई ही नहीं देते हैं। इस शौचालयों के चारों तरफ इतनी झाड़ियां हैं कि लोगों को पता ही नहीं चलता है कि यहां कोई शौचालय भी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कम से कम विभाग को राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे शौचालय का साइनबोर्ड तो लगाना चाहिए।
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अमरनाथ यात्रा के शुरू होने से पहले ही सरकार ने संभाग स्तर के सभी शौचालयों के मरम्मत कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके बाद आउटसोर्सिंग के माध्यम से यात्रा के दौरान इन सभी शौचालय को कार्यात्मक बनाया जाएगा। यह सारी प्रक्रिया अमरनाथ यात्रा शुरू होने से पहले पूरी कर ली जाएगी।
-सुनील डोगरा, ब्लॉक विकास अधिकारी कठुआ।