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Kathua News: पांच साल पुराने मामले में आरोपी को कोर्ट ने किया बरी
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कठुआ। उप-न्यायाधीश अमनदीप कौर ने पांच साल पुराने आबकारी मामले में आरोपी को बाइज्जत बरी कर दिया है। आदेश के अनुसार, मामले में जांच एक ऐसे अधिकारी की ओर से की गई है जो आबकारी मामले में जांच करने में सक्षम नहीं था। इसके चलते आरोपी की दोषसिद्धि की कोई संभावना नहीं है। मामले में दायर चालान को केवल इस आधार पर खारिज करने का आदेश दिया जाता है। इसके अलावा आरोपी के जमानत और व्यक्तिगत बांड को भी खारिज करने का निर्देश दिया है।
पुलिस की ओर से दायर रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी सुनीता देवी निवासी डडौलियां को कठुआ पुलिस ने वर्ष 2019 में अवैध शराब के साथ गिरफ्तार किया था। इसके बाद पुलिस ने थाना कठुआ में आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 48 (ए) के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू की गई। मामले में आरोपी के खिलाफ 8 जनवरी 2020 को आरोप तय किए गए थे। इसके बाद अभियोजन पक्ष को साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए लेकिन अभियोजन पक्ष की ओर से कोई भी गवाह पेश नहीं किया गया। आरोपी के वकील ने सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष तर्क दिया कि मामले की जांच सहायक उपनिरीक्षक मोहन लाल की ओर से की गई है। जोकि आबकारी अधिनियम के प्रावधानों के तहत ऐसा करने में सक्षम नहीं थे। स्थापित कानूनों के मुताबिक जांच कम से कम उप-निरीक्षक स्तर के अधिकारी या उसके ऊपर के स्तर के अधिकारी की ओर से की जानी चाहिए थी। इसके बाद कोर्ट ने आरोपी को बरी करने का आदेश सुनाया।
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पुलिस की ओर से दायर रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी सुनीता देवी निवासी डडौलियां को कठुआ पुलिस ने वर्ष 2019 में अवैध शराब के साथ गिरफ्तार किया था। इसके बाद पुलिस ने थाना कठुआ में आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 48 (ए) के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू की गई। मामले में आरोपी के खिलाफ 8 जनवरी 2020 को आरोप तय किए गए थे। इसके बाद अभियोजन पक्ष को साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए लेकिन अभियोजन पक्ष की ओर से कोई भी गवाह पेश नहीं किया गया। आरोपी के वकील ने सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष तर्क दिया कि मामले की जांच सहायक उपनिरीक्षक मोहन लाल की ओर से की गई है। जोकि आबकारी अधिनियम के प्रावधानों के तहत ऐसा करने में सक्षम नहीं थे। स्थापित कानूनों के मुताबिक जांच कम से कम उप-निरीक्षक स्तर के अधिकारी या उसके ऊपर के स्तर के अधिकारी की ओर से की जानी चाहिए थी। इसके बाद कोर्ट ने आरोपी को बरी करने का आदेश सुनाया।
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