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Kathua News: इंटर्न व पीजी छात्रों को मिलेंगे रेजिडेंट डॉक्टरों के हॉस्टल
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जीएमसी कठुआ परिसर में रेजीडेंट डॉक्टरों की आवासीय सुविधा के लिए बनाई गई इमारत। संवाद
- फोटो : kathua news
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कठुआ। जीएमसी कठुआ में रेजीडेंट डॉक्टरों के लिए बनाए गए हॉस्टल को इंटर्न डॉक्टरों और जीएमसी कठुआ में पीजी के विद्यार्थियों को अलॉट करने की तैयारी की गई है। हॉस्टक एक ब्लॉक बनकर तैयार हो चुका है। इन पर 8.12 करोड़ खर्च होंगे। 116 क्वार्टरों को अलाट किए जाने की प्रक्रिया अगले एक से दो दिनों में शुरू हो जाएगी। कायदे से इन क्वार्टरों को रेजीडेंट डॉक्टरों को अलॉट किया जाना चाहिए लेकिन अस्पताल प्रबंधन इसके लिए कोई तय नियम न होने का हवाला दे रहा है।
गत मंगलवार को जीएमसी कठुआ में आयोजित राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज की इंडक्शन सेरेमनी में आईं स्वास्थ्य मंत्री सकीना इट्टू ने नई इमारत के निर्माण का उद्घाटन किया था। दो ब्लॉको वाली इस इमारत के प्रत्येक ब्लॉक में 58 क्वार्टर हैं। इसमें एक ब्लॉक के निर्माण की प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया है, जबकि दूसरे ब्लॉक का निर्माण भी अगले 20 से 25 दिनों के भीतर पूरा होने की बात कही गई है।
नई इमारत का निर्माण पूरा होने के बाद अब इसे जीएमसी कठुआ के इंटर्न डॉक्टरों और जीएमसी कठुआ में पीजी के विद्यार्थियों को अलाॅट करने की बात की जा रही है। ऐसे में जीएमसी कठुआ में अपनी सेवाएं देने वाले 100 के करीब रेजीडेंट डॉक्टरों के पास परिसर में अपना कोई आशियाना नही होगा। हालांकि नई बनाई गई इमारत पर लगाई गई प्लेट के अनुसार उक्त इमारत रेजीडेंट डॉक्टरों का हाॅस्टल है।
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इमारत बनने के बाद भी किराए पर रह रहे रेजीडेंट डॉक्टर
जीएमसी कठुआ के एक रेजीडेंट डॉक्टर ने बताया कि ज्यादातर डॉक्टर किराए की निजी व्यवस्था के तहत जबकि अन्य भी जीएमसी से बाहर ही रह रहे हैं। रेजीडेंट डॉक्टरों को अस्पताल में कभी भी इमरजेंसी में बुलाया जा सकता है, वो आते भी हैं लेकिन यदि उन्हें भीतर ही व्यवस्था मिले तो मरीजों को उनके आने का ज्यादा देर इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
जीएमसी कठुआ में यह पहला मौका नहीं है जब रेजीडेंट डॉक्टरों के नामित हाॅस्टल दूसरे डॉक्टरों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे पहले भी परिसर में अपनी सेवा देने वाले डॉक्टरों के लिए बनाए गए आवासीय परिसर नर्सिंग व अन्य सेवाओं से जुडे़ कर्मचारियों को अलाट किए जा चुके है। हालांकि इस बारे में कोई भी खुलकर बोलने से गुरेज करता है लेकिन दबी जुबान में लोग इसे गलत करार देते हैं।
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कोट
नई बनी इमारत के नाम के अनुसार वह रेजीडेंट डॉक्टरों का हाॅस्टल है, लेकिन ऐसा कोई अनिवार्य नियम नही है कि इमारत रेजीडेंट डॉक्टरों को ही अलाॅट की जा सकती है। जीएमसी कठुआ में हाॅस्टल की कमी को देखते हुए नई इमारत इंटर्न डॉक्टरों को अलाट की जानी है। इसमें तैयार हो चुके ब्लॉक में पहले महिला इंटर्न डॉक्टरों की अलाटमेंट की जाएगी। जो प्रक्रिया एक से दो दिनों में शुरू कर दी जाएगी, जबकि एक महीने के बाद तैयार होने वाली इमारत को पुरुष इंटर्न डॉक्टरों के अलावा पीजी के विद्यार्थियों को अलाॅट किया जाएगा।
-डॉ. सुरिंदर कुमार अत्री, प्रधानाचार्य जीएमसी कठुआ।
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गत मंगलवार को जीएमसी कठुआ में आयोजित राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज की इंडक्शन सेरेमनी में आईं स्वास्थ्य मंत्री सकीना इट्टू ने नई इमारत के निर्माण का उद्घाटन किया था। दो ब्लॉको वाली इस इमारत के प्रत्येक ब्लॉक में 58 क्वार्टर हैं। इसमें एक ब्लॉक के निर्माण की प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया है, जबकि दूसरे ब्लॉक का निर्माण भी अगले 20 से 25 दिनों के भीतर पूरा होने की बात कही गई है।
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नई इमारत का निर्माण पूरा होने के बाद अब इसे जीएमसी कठुआ के इंटर्न डॉक्टरों और जीएमसी कठुआ में पीजी के विद्यार्थियों को अलाॅट करने की बात की जा रही है। ऐसे में जीएमसी कठुआ में अपनी सेवाएं देने वाले 100 के करीब रेजीडेंट डॉक्टरों के पास परिसर में अपना कोई आशियाना नही होगा। हालांकि नई बनाई गई इमारत पर लगाई गई प्लेट के अनुसार उक्त इमारत रेजीडेंट डॉक्टरों का हाॅस्टल है।
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इमारत बनने के बाद भी किराए पर रह रहे रेजीडेंट डॉक्टर
जीएमसी कठुआ के एक रेजीडेंट डॉक्टर ने बताया कि ज्यादातर डॉक्टर किराए की निजी व्यवस्था के तहत जबकि अन्य भी जीएमसी से बाहर ही रह रहे हैं। रेजीडेंट डॉक्टरों को अस्पताल में कभी भी इमरजेंसी में बुलाया जा सकता है, वो आते भी हैं लेकिन यदि उन्हें भीतर ही व्यवस्था मिले तो मरीजों को उनके आने का ज्यादा देर इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
जीएमसी कठुआ में यह पहला मौका नहीं है जब रेजीडेंट डॉक्टरों के नामित हाॅस्टल दूसरे डॉक्टरों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे पहले भी परिसर में अपनी सेवा देने वाले डॉक्टरों के लिए बनाए गए आवासीय परिसर नर्सिंग व अन्य सेवाओं से जुडे़ कर्मचारियों को अलाट किए जा चुके है। हालांकि इस बारे में कोई भी खुलकर बोलने से गुरेज करता है लेकिन दबी जुबान में लोग इसे गलत करार देते हैं।
कोट
नई बनी इमारत के नाम के अनुसार वह रेजीडेंट डॉक्टरों का हाॅस्टल है, लेकिन ऐसा कोई अनिवार्य नियम नही है कि इमारत रेजीडेंट डॉक्टरों को ही अलाॅट की जा सकती है। जीएमसी कठुआ में हाॅस्टल की कमी को देखते हुए नई इमारत इंटर्न डॉक्टरों को अलाट की जानी है। इसमें तैयार हो चुके ब्लॉक में पहले महिला इंटर्न डॉक्टरों की अलाटमेंट की जाएगी। जो प्रक्रिया एक से दो दिनों में शुरू कर दी जाएगी, जबकि एक महीने के बाद तैयार होने वाली इमारत को पुरुष इंटर्न डॉक्टरों के अलावा पीजी के विद्यार्थियों को अलाॅट किया जाएगा।
-डॉ. सुरिंदर कुमार अत्री, प्रधानाचार्य जीएमसी कठुआ।