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सत्संग से ही मिलता है सच्चा सुख : आदियोगी
Sun, 15 Mar 2026 01:18 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sun, 15 Mar 2026 01:18 AM IST
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वार्ड 19 स्थित आदियोगी आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। शहर के वार्ड 19 स्थित आदियोगी आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा जारी है। कथाव्यास आदियोगी गौतम महाराज के प्रवचन सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। प्रवचन के दौरान महाराज ने कहा कि सच्चा सुख भौतिक वस्तुओं से नहीं बल्कि सत्संग से मिलता है। सत्संग व्यक्ति को जीवन-मरण के बंधन से मुक्ति दिला सकता है।
शनिवार को कथा के तीसरे दिन महाराज ने श्री सूत जी और शनकादिक ऋषियों को भागवत उपदेश का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि हरि अनंत हरि कथा अनंता भगवान की लीला का कोई पार नहीं पा सकता। उन्होंने श्रीमद्भागवत पुराण में वर्णित भगवान के 24 अवतारों का विस्तार से उल्लेख करते हुए बताया कि जब-जब धर्म की हानि होती है तब-तब परमात्मा अवतार लेकर संतों, ब्राह्मणों, गो माता और भक्तों की रक्षा करते हैं।
महाराज ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान के नरसिंह अवतार का उदाहरण देते हुए कहा कि परमात्मा भक्तों की रक्षा के लिए विकराल रूप भी धारण कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान को जानने के लिए भागवत कथा को समझना आवश्यक है।
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शास्त्री जी ने कहा कि मनुष्य भौतिक सुखों की प्राप्ति में अपना जीवन व्यतीत कर अंततः खाली हाथ चला जाता है। परमधाम की प्राप्ति केवल सत्संग और भक्ति से ही संभव है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। शहर के वार्ड 19 स्थित आदियोगी आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा जारी है। कथाव्यास आदियोगी गौतम महाराज के प्रवचन सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। प्रवचन के दौरान महाराज ने कहा कि सच्चा सुख भौतिक वस्तुओं से नहीं बल्कि सत्संग से मिलता है। सत्संग व्यक्ति को जीवन-मरण के बंधन से मुक्ति दिला सकता है।
शनिवार को कथा के तीसरे दिन महाराज ने श्री सूत जी और शनकादिक ऋषियों को भागवत उपदेश का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि हरि अनंत हरि कथा अनंता भगवान की लीला का कोई पार नहीं पा सकता। उन्होंने श्रीमद्भागवत पुराण में वर्णित भगवान के 24 अवतारों का विस्तार से उल्लेख करते हुए बताया कि जब-जब धर्म की हानि होती है तब-तब परमात्मा अवतार लेकर संतों, ब्राह्मणों, गो माता और भक्तों की रक्षा करते हैं।
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महाराज ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान के नरसिंह अवतार का उदाहरण देते हुए कहा कि परमात्मा भक्तों की रक्षा के लिए विकराल रूप भी धारण कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान को जानने के लिए भागवत कथा को समझना आवश्यक है।
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शास्त्री जी ने कहा कि मनुष्य भौतिक सुखों की प्राप्ति में अपना जीवन व्यतीत कर अंततः खाली हाथ चला जाता है। परमधाम की प्राप्ति केवल सत्संग और भक्ति से ही संभव है।