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Kathua News: एनडीपीएस के आरोपी ने जुर्म कबूला, अदालत ने सुनाई चार दिन की सजा
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न्यायिक मजिस्ट्रेट हीरानगर ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में आरोपी को दोषी ठहराया
कठुआ। न्यायिक मजिस्ट्रेट हीरानगर ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में आरोपी को दोषी ठहराया है। अदालत ने दोषी नरेश सिंह को चार दिन के साधारण कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला आरोपी के स्वेच्छा से अपना जुर्म कबूल करने के बाद आया है।
मामले की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट लक्ष्य बडयाल ने 27 अक्तूबर को की थी। हीरानगर पुलिस ने इसी वर्ष नरेश सिंह निवासी हीरानगर के खिलाफ एनडीपीएस की धारा 8/27 में मामला दर्ज किया था। मामले का चालान भी 27 अक्तूबर को ही अदालत में प्रस्तुत किया गया था। सुनवाई के दौरान आरोपी ने अदालत में एक आवेदन दिया। आरोपी ने स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार करने और इकबालिया बयान दर्ज करवाने की इच्छा जताई।
अदालत ने उसे स्पष्ट किया कि वह बयान देने के लिए बाध्य नहीं है। अदालत ने यह भी बताया कि उसके बयान का इस्तेमाल उसके खिलाफ किया जा सकता है। उसे संबंधित अपराध में निर्धारित सजा के बारे में भी जानकारी दी गई। साथ ही उसे अपने फैसले पर दोबारा विचार करने के लिए पर्याप्त समय भी दिया गया। इसके बावजूद, आरोपी अपने फैसले पर कायम रहा। इसके बाद आरोपी को दोषी करार दिया गया। उसे चार दिन के साधारण कारावास के साथ 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। दोषी ने मौके पर ही जुर्माना अदालत में जमा करवा दिया।
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हिरासत अवधि का समायोजन
अदालत ने एक और महत्वपूर्ण आदेश दिया। जांच के दौरान हिरासत में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने का निर्देश दिया गया। यह फैसला कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया गया। इससे आरोपी की कुल सजा अवधि प्रभावित होगी।
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कठुआ। न्यायिक मजिस्ट्रेट हीरानगर ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में आरोपी को दोषी ठहराया है। अदालत ने दोषी नरेश सिंह को चार दिन के साधारण कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला आरोपी के स्वेच्छा से अपना जुर्म कबूल करने के बाद आया है।
मामले की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट लक्ष्य बडयाल ने 27 अक्तूबर को की थी। हीरानगर पुलिस ने इसी वर्ष नरेश सिंह निवासी हीरानगर के खिलाफ एनडीपीएस की धारा 8/27 में मामला दर्ज किया था। मामले का चालान भी 27 अक्तूबर को ही अदालत में प्रस्तुत किया गया था। सुनवाई के दौरान आरोपी ने अदालत में एक आवेदन दिया। आरोपी ने स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार करने और इकबालिया बयान दर्ज करवाने की इच्छा जताई।
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अदालत ने उसे स्पष्ट किया कि वह बयान देने के लिए बाध्य नहीं है। अदालत ने यह भी बताया कि उसके बयान का इस्तेमाल उसके खिलाफ किया जा सकता है। उसे संबंधित अपराध में निर्धारित सजा के बारे में भी जानकारी दी गई। साथ ही उसे अपने फैसले पर दोबारा विचार करने के लिए पर्याप्त समय भी दिया गया। इसके बावजूद, आरोपी अपने फैसले पर कायम रहा। इसके बाद आरोपी को दोषी करार दिया गया। उसे चार दिन के साधारण कारावास के साथ 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। दोषी ने मौके पर ही जुर्माना अदालत में जमा करवा दिया।
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हिरासत अवधि का समायोजन
अदालत ने एक और महत्वपूर्ण आदेश दिया। जांच के दौरान हिरासत में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने का निर्देश दिया गया। यह फैसला कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया गया। इससे आरोपी की कुल सजा अवधि प्रभावित होगी।