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Kathua News: आतंकियों तक हथियार पहुंचाने के आरोपी को जमानत नहीं
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जम्मू। जम्मू की विशेष एनआईए अदालत ने आतंकी संगठन लश्कर-ए-मुस्तफा तक हथियार पहुंचाने के आरोपी को जमानत देने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने चार साल से जेल में बंद बिहार के छपरा जिले के रहने वाले मोहम्मद एहसानुल्लाह उर्फ गुड्डू अंसारी की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत पहली नजर में आरोपी के साजिश में शामिल होने की ओर इशारा करते हैं। मामले की गंभीरता और राज्य की सुरक्षा को देखते हुए उसे जमानत नहीं दी जा सकती।
एनआईए के अनुसार, तीन जनवरी 2021 को एहसानुल्लाह ने सह आरोपी जावेद आलम से हथियारों की खेप ली थी। इसमें चार पिस्तौल, आठ मैगजीन और 200 कारतूस थे। इसके बाद वह अंबाला पहुंचा और वहां दूसरे आरोपी जान मोहम्मद टीली उर्फ इरशाद को यह खेप सौंप दी।
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि इस काम के बदले एहसानुल्लाह को 10 हजार रुपये मिले थे। आरोपी की ओर से अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल को झूठे मामले में फंसाया गया है।
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उसे यह जानकारी नहीं थी कि हथियारों की खेप का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए होना था। आरोपी चार साल से अधिक समय से जेल में है और जांच पूरी हो चुकी है। अब तक जिन गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं, उनसे भी आरोपी की भूमिका साबित नहीं हुई है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश प्रेम सागर ने कहा कि यूएपीए के तहत जमानत देने की सख्त शर्तों को केवल लंबे समय से जेल में रहने के आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने साफ किया कि जमानत याचिका पर की गई टिप्पणियों का मुख्य मुकदमे के फैसले पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
यह मामला वर्ष 2021 में जम्मू के गंग्याल थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जिसकी जांच बाद में एनआईए ने की थी। जेएनएफ
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एनआईए के अनुसार, तीन जनवरी 2021 को एहसानुल्लाह ने सह आरोपी जावेद आलम से हथियारों की खेप ली थी। इसमें चार पिस्तौल, आठ मैगजीन और 200 कारतूस थे। इसके बाद वह अंबाला पहुंचा और वहां दूसरे आरोपी जान मोहम्मद टीली उर्फ इरशाद को यह खेप सौंप दी।
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अभियोजन पक्ष का आरोप है कि इस काम के बदले एहसानुल्लाह को 10 हजार रुपये मिले थे। आरोपी की ओर से अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल को झूठे मामले में फंसाया गया है।
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उसे यह जानकारी नहीं थी कि हथियारों की खेप का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए होना था। आरोपी चार साल से अधिक समय से जेल में है और जांच पूरी हो चुकी है। अब तक जिन गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं, उनसे भी आरोपी की भूमिका साबित नहीं हुई है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश प्रेम सागर ने कहा कि यूएपीए के तहत जमानत देने की सख्त शर्तों को केवल लंबे समय से जेल में रहने के आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने साफ किया कि जमानत याचिका पर की गई टिप्पणियों का मुख्य मुकदमे के फैसले पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
यह मामला वर्ष 2021 में जम्मू के गंग्याल थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जिसकी जांच बाद में एनआईए ने की थी। जेएनएफ