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Kathua News: कोर्ट ने अवैध खनन के मामले में खारिज की चार्जशीट
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संवाद न्यूज एजेेंसी
कठुआ। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन के एक साल पुराने मामले में पुलिस की ओर से दायर आरोप पत्र खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में संज्ञान लेने के लिए सक्षम एवं अधिकृत अधिकारी की लिखित शिकायत अनिवार्य है। केवल पुलिस के आरोप पत्र के आधार पर अदालत मामले का संज्ञान नहीं ले सकती।
मामले की सुनवाई गत 27 अक्तूबर को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीन पंडोह की अदालत में की गई। मामला गत वर्ष अप्रैल माह का है। आरोपी शमशेर सिंह निवासी साधपुरा अमृतसर के खिलाफ जिला खनन अधिकारी के पत्र के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले में वाहन को खनिजों के अवैध परिवहन में तीसरी बार जब्त किया गया था। इस मामले में चालान गत 17 जुलाई को अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि खनन विभाग के अधिकारी ने पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने के लिए पत्र तो लिखा था, लेकिन अदालत में किसी अधिकृत अधिकारी की ओर से निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत लिखित शिकायत पेश नहीं की गई थी।
इलाहाबाद और चेन्नई उच्च न्यायालयों के फैसलों का दिया हवाला
अदालत ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 4/21 और धारा 22 का हवाला दिया। साथ ही जम्मू-कश्मीर सरकार के संबंधित नियमों का भी उल्लेख किया गया। अदालत ने कहा कि इस तरह के अपराधों में संज्ञान लेने के लिए अधिकृत अधिकारी की शिकायत आवश्यक है। आदेश में इलाहाबाद और चेन्नई उच्च न्यायालयों के फैसलों का भी उल्लेख किया गया। अदालत ने दोनों पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद कहा कि अधिकृत अधिकारी की शिकायत के अभाव में मामले में संज्ञान नहीं लिया जा सकता। इसी आधार पर अभियोजन पक्ष की संज्ञान लेने की मांग स्वीकार नहीं की गई और आरोप पत्र खारिज कर दिया गया। अदालत ने आरोपी शमशेर सिंह को राहत देते हुए उसके व्यक्तिगत मुचलके और जमानती मुचलकों को भी मुक्त करने का आदेश दिया।ो
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कठुआ। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन के एक साल पुराने मामले में पुलिस की ओर से दायर आरोप पत्र खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में संज्ञान लेने के लिए सक्षम एवं अधिकृत अधिकारी की लिखित शिकायत अनिवार्य है। केवल पुलिस के आरोप पत्र के आधार पर अदालत मामले का संज्ञान नहीं ले सकती।
मामले की सुनवाई गत 27 अक्तूबर को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीन पंडोह की अदालत में की गई। मामला गत वर्ष अप्रैल माह का है। आरोपी शमशेर सिंह निवासी साधपुरा अमृतसर के खिलाफ जिला खनन अधिकारी के पत्र के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले में वाहन को खनिजों के अवैध परिवहन में तीसरी बार जब्त किया गया था। इस मामले में चालान गत 17 जुलाई को अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि खनन विभाग के अधिकारी ने पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने के लिए पत्र तो लिखा था, लेकिन अदालत में किसी अधिकृत अधिकारी की ओर से निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत लिखित शिकायत पेश नहीं की गई थी।
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इलाहाबाद और चेन्नई उच्च न्यायालयों के फैसलों का दिया हवाला
अदालत ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 4/21 और धारा 22 का हवाला दिया। साथ ही जम्मू-कश्मीर सरकार के संबंधित नियमों का भी उल्लेख किया गया। अदालत ने कहा कि इस तरह के अपराधों में संज्ञान लेने के लिए अधिकृत अधिकारी की शिकायत आवश्यक है। आदेश में इलाहाबाद और चेन्नई उच्च न्यायालयों के फैसलों का भी उल्लेख किया गया। अदालत ने दोनों पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद कहा कि अधिकृत अधिकारी की शिकायत के अभाव में मामले में संज्ञान नहीं लिया जा सकता। इसी आधार पर अभियोजन पक्ष की संज्ञान लेने की मांग स्वीकार नहीं की गई और आरोप पत्र खारिज कर दिया गया। अदालत ने आरोपी शमशेर सिंह को राहत देते हुए उसके व्यक्तिगत मुचलके और जमानती मुचलकों को भी मुक्त करने का आदेश दिया।ो
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