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Kathua News: शहीदी दिवस पर शहीद प्यार सिंह को किया याद
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कठुआ। वर्ष 2004 को ऑपरेशन मेघदूत के तहत सियाचिन मेंं शहीद होने वाले शहीद प्यार सिंह के 20वें शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन उनके पैतृक गांव कूका चक में किया गया। शहीद के परिवार के सदस्यों की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में उनके परिवार के सदस्यों व ग्रामीणों ने शहीद के स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनकी शहादत को नमन किया।
शहर से सटे गांव कूका चक में शहीद की याद में बनाए गांव के मुख्यद्वार पर आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में शहीद की पत्नी सुखविंदर कौर और बेटी हरमनदीप कौर ने सबसे पहले शहीद को नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। इसके बाद स्थानीय लोगों व परिवार के अन्य सदस्यों ने भी उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसमें काफी संख्या में गांव के युवा और बच्चे भी शामिल रहे।
इस मौके पर शहीद के भाई भजन सिंह ने अपने भाई की शहादत को याद करते हुए कहा कि मात्र 29 वर्ष की आयु में उनके भाई ने अपना सर्वोच्च बलिदान मां भारती के चरणों में अर्पित किया था, जो आज भी उनके गौरव का विषय है। प्यार सिंह ने देश के प्रति सुरक्षा की जिम्मेवारी को निभाते हुए बलिदान देकर आने वाली पीढ़ी को देशभक्ति का पाठ पढ़ाया है। उन्होंने कहा कि देश की खातिर जान देने वाले शहीद सर्वोपरि हैं और उन्हें भुलाया नहीं जा सकता। वहीं कार्यक्रम के अंत में गांव के गुरूद्वारा साहिब में शहीद की याद में अरदास की गई और गुरु का लंगर भी परोसा गया। इसमें शहीद के बड़े भाई थुडू सिंह और वीर सिंह भी मौजूद रहे।
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शहर से सटे गांव कूका चक में शहीद की याद में बनाए गांव के मुख्यद्वार पर आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में शहीद की पत्नी सुखविंदर कौर और बेटी हरमनदीप कौर ने सबसे पहले शहीद को नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। इसके बाद स्थानीय लोगों व परिवार के अन्य सदस्यों ने भी उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसमें काफी संख्या में गांव के युवा और बच्चे भी शामिल रहे।
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इस मौके पर शहीद के भाई भजन सिंह ने अपने भाई की शहादत को याद करते हुए कहा कि मात्र 29 वर्ष की आयु में उनके भाई ने अपना सर्वोच्च बलिदान मां भारती के चरणों में अर्पित किया था, जो आज भी उनके गौरव का विषय है। प्यार सिंह ने देश के प्रति सुरक्षा की जिम्मेवारी को निभाते हुए बलिदान देकर आने वाली पीढ़ी को देशभक्ति का पाठ पढ़ाया है। उन्होंने कहा कि देश की खातिर जान देने वाले शहीद सर्वोपरि हैं और उन्हें भुलाया नहीं जा सकता। वहीं कार्यक्रम के अंत में गांव के गुरूद्वारा साहिब में शहीद की याद में अरदास की गई और गुरु का लंगर भी परोसा गया। इसमें शहीद के बड़े भाई थुडू सिंह और वीर सिंह भी मौजूद रहे।
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