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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Kathua News ›   imported from Australia 450 Taxel and 230 Darper sheep; She reached Jammu and Kashmir after traveling 8000 km

J&K: आस्ट्रेलिया से मंगवाईं टैक्सल और डार्पर नस्ल की भेड़ें; 8000 किलोमीटर का सफर तय कर जम्मू-कश्मीर पहुंचीं

Fri, 30 May 2025 03:02 PM IST
निकिता गुप्ता साहिल खजूरिया अमर उजाला, नेटवर्क कठुआ
साहिल खजूरिया अमर उजाला, नेटवर्क कठुआ Published by: निकिता गुप्ता Updated Fri, 30 May 2025 03:02 PM IST
सार

भेड़ पालन को बढ़ावा देने के लिए जम्मू-कश्मीर में ऑस्ट्रेलिया से टेक्सेल और डार्पर नस्ल की 900 भेड़ें आयात की जा रही हैं, जिनमें से 450 टेक्सेल भेड़ें खिंबर और 235 डार्पर भेड़ें कठुआ के राजबाग में क्वारंटीन की गई हैं।

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imported from Australia 450 Taxel and 230 Darper sheep; She reached Jammu and Kashmir after traveling 8000 km
आस्ट्रेलिया से टैक्सल और डार्पर प्रजाति की भेड़ें जम्मू कश्मीर में पहुंच गई हैं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भेड़ों की नस्ल को बढ़ावा देने के लिए आस्ट्रेलिया से टैक्सल और डार्पर प्रजाति की भेड़ें जम्मू कश्मीर में पहुंच गई हैं। समग्र कृषि विकास योजना के तहत 26 करोड़ से इन भेड़ाें की खरीद की गई है। टैक्सल नस्ल की 450 भेड़ें कश्मीर के खिंबर और 235 भेड़ें कठुआ के राजबाग में क्वारंटीन की गई हैं।

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यहां इनके सैंपल जांचे जा रहे हैं ताकि किसी भी तरह की बीमारी मुक्त भेड़ों का ही जम्मू कश्मीर के भेड़ बेड़े में शामिल किया जा सके। क्वारंटीन के बाद डाॅर्पर भेड़ों को पैंथल स्थिति भेड़ फार्म में प्रजनन के लिए रखा जाएगा तो वहीं टैक्सल का प्रजनन खिंबर फार्म में ही करवाया जाएगा। इनसे हासिल होने वाली नस्ल को फिर आगे प्रजनन के लिए भेड़ पालन के अन्य केंद्रों में भेजे जाने की योजना है।

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ऑस्ट्रेलिया से 900 उन्नत नस्ल की भेड़ों का आयात
प्रदेश में पशुधन की गुणवत्ता सुधारने और पशुपालन उद्योग को नई दिशा देने के लिए समग्र कृषि विकास योजना के तहत कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में 8000 किलोमीटर दूर ऑस्ट्रेलिया से जम्मू कश्मीर के लिए 900 भेड़ें आयात की जा रही हैं।

फरवरी माह में प्रदेश से विशेषज्ञों का दल भेड़ों को जांचने के लिए आस्ट्रेलिया भी भेजा गया था। जिसके बाद 27 अप्रैल को जहां टैक्सल नस्ल की भेड़ों लॉट क्वारंटीन के लिए कश्मीर के खिंभर पहुंचा वहीं 13 मई को डार्पर प्रजाति की 235 भेड़ें कठुआ के राजबाग में क्वारंटीन की गई हैं। इन भेड़ों के प्रजनन से जम्मू कश्मीर में बेहतर और अधिक मीट उपलब्ध करवाने वाली नस्लों को बढ़ावा मिलने जा रहा है।

जम्मू कश्मीर सरकार ने डार्पर नस्ल की 450 भेड़ें जम्मू संभाग और टैक्सेल की 450 भेड़ें कश्मीर संभाग के लिए खरीद की हैं। जम्मू संभाग के लिए शेष भेड़ों का अगला लॉट अगस्त माह में जम्मू कश्मीर में पहुंचेगा। यह पहल प्रदेश के पशुपालकों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है।

उन्नत नस्लों के आने से भेड़पालकों को उच्च गुणवत्ता वाले ऊन और मांस उत्पादन की संभावना मिलेगी, जिससे उनकी आय में वृद्धि होने की उम्मीद है। खास बात यह है कि प्रजनन योजना के तहत इनकी संख्या को बढ़ाया जाएगा। तेजी से विकास होने वजन बढ़ने के कारण इन दो प्रजातियों को आयात के लिए चुना गया है।

डॉर्पर भेड़ की खासियत
मूल रूप से 1940 के दशक की शुरुआत में पैदा हुई, डोर्पर भेड़ें डोरसेट सींग वाले मेढ़ों और ब्लैकहेड फाररसी भेड़ों का एक क्रॉस ब्रीड हैं। कई क्रॉस नस्लों की तरह, डोर्पर में प्रत्येक नस्ल के सर्वोत्तम गुणों को शामिल किया गया है।

डार्पर प्रजाति के मेमने लगभग चार महीने की उम्र में 35 से 40 के वजन तक पहुंच जाते हैं। व्यस्क भेड़ों का वजन 90 किलो तक होता है। प्रजनन क्षमता और मौसम की स्थिति के अनुकूल होने की वजह से डोर्पर भेड़ें विभिन्न देशों में लोकप्रिय बनती जा रही हैं। विशेषज्ञों ने इस प्रजाति को जम्मू संभाग के लिए उपयुक्त पाया है।

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टैक्सेल भेड़ की खासियत
टेक्सेल घरेलू भेड़ की एक डच नस्ल है जो मूल रूप से टेक्सेल द्वीप, नीदरलैंड के उत्तरी तट से आती है। टेक्सेल नस्ल की भेड़ाें के सिर या पैरों पर कोई ऊन नहीं है। इस नस्ल की विशेषता एक विशिष्ट छोटा, चौड़ा चेहरा है जिसमें काली नाक और चौड़े, छोटे कान हैं जो लगभग क्षैतिज चाल के साथ हैं। इन भेड़ों के खुर भी काले होते हैं। टेक्सेल नस्ल की सबसे खास विशेषता इसकी उल्लेखनीय मांसपेशियों का विकास है।

इन भेड़ों के स्वास्थ्य और अनुकूलता की जांच के लिए भोपाल, लुधियाना और बरेली स्थित लैब में उनके सैंपल की परीक्षण प्रक्रिया शुरू की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह परीक्षण अत्यंत आवश्यक है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आयातित भेड़ें स्थानीय जलवायु और परिस्थितियों के अनुकूल रह सकें।

जांचे जा रहे सैंपल
क्वारंटीन के दौरान आयात की गई भेड़ों के स्वास्थ्य परीक्षण हेतु सैंपल लिए जा रहे हैं। इन सैंपलों की जांच भोपाल, लुधियाना और बरेली स्थित लैब में होगी, जहां इन्हें ब्लू टंग, एंथ्रेक्स, ओआरएफ, फुट रॉट, रिफ्ट वैली फीवर, शीप पॉक्स, स्क्रैपी, पल्मोनरी एडेनोमैटोसिस, ओवाइन प्रोग्रेसिव इंटरस्टिशियल न्यूमोनिया और ब्लैक क्वार्टर जैसी गंभीर बीमारियों के लिए परखा जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इन परीक्षणों से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आयातित भेड़ें स्थानीय जलवायु और परिस्थितियों के अनुकूल हैं और स्वस्थ और उत्पादक बनी रहेंगी।

जम्मू कश्मीर में बेहतर किस्म की भेड़ नस्लों को बढ़ावा देने के लिए जम्मू संभाग के लिए 450 डार्पर और कश्मीर संभाग के लिए 450 टेक्सेल नस्ल की भेड़ें आस्ट्रेलिया से आयात की जा रही हैं। कश्मीर के खिंबर में 450 टैक्सल नस्लों को आयात कर क्वारंटीन किया गया है जबकि कठुआ के राजबाग में 230 डार्पर प्रजाति की भेड़ों को अबतक क्वारंटीन किया जा चुका है। यहां इनके सैंपल जांचे जा रहे हैं ताकि किसी भी तरह की बीमारी से मुक्त भेड़ों को ही प्रदेश में प्रजनन के लिए आगे बढ़ाया जाए। डॉ सैय्यद मोइन उल हक, निदेशक, भेड़ पालन विभाग, जम्मू

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