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Kathua News: सरकार ने आंखें फेरी, बाहर अल्ट्रासाउंड करवाना मजबूरी
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कठुआ। जिले में पांच सामुदायिक सेवा केंद्र हैं, जिन्हें उपजिला अस्पतालों का दर्जा हासिल है लेकिन इनमें से एक में भी रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं है। ऐसे में जिले की लगभग सात लाख से अधिक आबादी दूरदराज के इलाकों से कठुआ जीएमसी में या फिर निजी क्लीनिकों में अल्ट्रासाउंड और एक्सरे करवाने को मजबूर है।
वैकल्पिक व्यवस्था के तहत स्वास्थ्य विभाग फिलहाल जुगाड़ से काम चला रहा है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को तीन तीन महीने के कोर्स करवाकर कुछ स्वास्थ्य संस्थानों में सप्ताह में एक बार जांच के लिए भेजा जाता है। ऐसे में मरीजों को सप्ताह भर तक जांच का इंतजार करना पड़ता है। दिक्कत ज्यादा हो तो निजी क्लीनिक ही विकल्प बच जाते हैं। यहां मोटी रकम चुकाने के साथ ही डॉक्टरों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
बनी उपजिला अस्पताल में सप्ताह में एक ही दिन अल्ट्रासाउंड के लिए बसोहली से तकनीशियन पहुंचते हैं। लगभग 70 हजार से ज्यादा आबादी वाले दूर दराज के इस इलाके में लोगों के पास वैकल्पिक सुविधा भी नहीं है। लिहाजा लोग कई घंटों का सफर तय कर कठुआ या फिर पठानकोट में जांच के लिए जाने को मजबूर होते हैं। सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड और एक्स रे जहां 300 रुपये में जो जाते हैं, वहीं निजी क्लीनिकों में मरीजों को 700 रुपये से लेकर दो हजार तक चुकाने को मजबूर होना पड़ता है। बसोहली उपजिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की मशीन तो उपलब्ध है लेकिन यहां अल्ट्रासाउंड करने वाला रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर उपलब्ध नहीं है। इसके कारण मरीज को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को एनेस्थेसिया स्पेशिलिस्ट डॉ. विनोद अल्ट्रासाउंड करते हैं, वहीं सप्ताह के प्रत्येक मंगलवार को डाॅ. विनोद सरकारी अस्पताल बनी में भी मरीजों का अल्ट्रासाउंड करते हैं।
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रामकोट के मुख्य चिकित्सा केंद्र प्राथमिक उपचार केंद्र में अल्ट्रासाउंड की सुविधा मौजूद नहीं है। इसके साथ ही एक्सरे मशीन तो अस्पताल में उपलब्ध है लेकिन तकनीशियन उपलब्ध नहीं होने की वजह से वह भी कई सालों से बंद पड़ी है। लोगों को अल्ट्रासाउंड और एक्सरे करवाने के लिए 40 किलोमीटर दूर बिलावर जाना पड़ता है।
उप जिला अस्पताल बिलावर में अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने के कारण मरीजों को निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता है। उपमंडल के प्राथमिक उपचार केंद्र मल्हार, प्राथमिक उपचार केंद्र मछेडी, प्राथमिक उपचार केंद्र कोहग, प्राथमिक उपचार केंद्र भड्डू, प्राथमिक उपचार केंद्र गोडू फलाल में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नहीं है नतीजतन दूर दराज क्षेत्र के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यहां भी रेडियोलॉजिस्ट के पद खाली हैं।
नगरी उपजिला अस्पताल में पिछले चार महीने से अल्ट्रासाउंड की सुविधा पूरी तरह से ठप पड़ी है। कमोवेश कुछ ऐसे ही हालात उपजिला अस्पताल हीरानगर में भी हैं।
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जिले में रेडियोलॉजिस्ट की पोस्ट खाली पड़ी हैं। एक भी रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं है। बसोहली उपजिला अस्पताल से वैकल्पिक व्यवस्था के तहत तकनीशियन बनी और महानपुर के साथ बसोहली उपजिला अस्पतालों में सेवाएं दे रहे हैं।
-डॉॅ. विजय रैना सीएमओ कठुआ
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वैकल्पिक व्यवस्था के तहत स्वास्थ्य विभाग फिलहाल जुगाड़ से काम चला रहा है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को तीन तीन महीने के कोर्स करवाकर कुछ स्वास्थ्य संस्थानों में सप्ताह में एक बार जांच के लिए भेजा जाता है। ऐसे में मरीजों को सप्ताह भर तक जांच का इंतजार करना पड़ता है। दिक्कत ज्यादा हो तो निजी क्लीनिक ही विकल्प बच जाते हैं। यहां मोटी रकम चुकाने के साथ ही डॉक्टरों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
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बनी उपजिला अस्पताल में सप्ताह में एक ही दिन अल्ट्रासाउंड के लिए बसोहली से तकनीशियन पहुंचते हैं। लगभग 70 हजार से ज्यादा आबादी वाले दूर दराज के इस इलाके में लोगों के पास वैकल्पिक सुविधा भी नहीं है। लिहाजा लोग कई घंटों का सफर तय कर कठुआ या फिर पठानकोट में जांच के लिए जाने को मजबूर होते हैं। सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड और एक्स रे जहां 300 रुपये में जो जाते हैं, वहीं निजी क्लीनिकों में मरीजों को 700 रुपये से लेकर दो हजार तक चुकाने को मजबूर होना पड़ता है। बसोहली उपजिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की मशीन तो उपलब्ध है लेकिन यहां अल्ट्रासाउंड करने वाला रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर उपलब्ध नहीं है। इसके कारण मरीज को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को एनेस्थेसिया स्पेशिलिस्ट डॉ. विनोद अल्ट्रासाउंड करते हैं, वहीं सप्ताह के प्रत्येक मंगलवार को डाॅ. विनोद सरकारी अस्पताल बनी में भी मरीजों का अल्ट्रासाउंड करते हैं।
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रामकोट के मुख्य चिकित्सा केंद्र प्राथमिक उपचार केंद्र में अल्ट्रासाउंड की सुविधा मौजूद नहीं है। इसके साथ ही एक्सरे मशीन तो अस्पताल में उपलब्ध है लेकिन तकनीशियन उपलब्ध नहीं होने की वजह से वह भी कई सालों से बंद पड़ी है। लोगों को अल्ट्रासाउंड और एक्सरे करवाने के लिए 40 किलोमीटर दूर बिलावर जाना पड़ता है।
उप जिला अस्पताल बिलावर में अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने के कारण मरीजों को निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता है। उपमंडल के प्राथमिक उपचार केंद्र मल्हार, प्राथमिक उपचार केंद्र मछेडी, प्राथमिक उपचार केंद्र कोहग, प्राथमिक उपचार केंद्र भड्डू, प्राथमिक उपचार केंद्र गोडू फलाल में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नहीं है नतीजतन दूर दराज क्षेत्र के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यहां भी रेडियोलॉजिस्ट के पद खाली हैं।
नगरी उपजिला अस्पताल में पिछले चार महीने से अल्ट्रासाउंड की सुविधा पूरी तरह से ठप पड़ी है। कमोवेश कुछ ऐसे ही हालात उपजिला अस्पताल हीरानगर में भी हैं।
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जिले में रेडियोलॉजिस्ट की पोस्ट खाली पड़ी हैं। एक भी रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं है। बसोहली उपजिला अस्पताल से वैकल्पिक व्यवस्था के तहत तकनीशियन बनी और महानपुर के साथ बसोहली उपजिला अस्पतालों में सेवाएं दे रहे हैं।
-डॉॅ. विजय रैना सीएमओ कठुआ
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