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Kathua News: अब जीएमसी कठुआ में होगा थैलेसीमिया और हीमोफीलिया का इलाज
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कठुआ। हीमोफीलिया और थैलेसीमिया बीमारी से पीड़ित लोगों को अब जांच, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, इंजेक्शन और दवा के लिए जम्मू मेडिकल काॅलेज और डीएमसी लुधियाना नहीं जाना पड़ेगा क्योंकि इन बीमारियों के मरीजों को उक्त सारी सुविधाएं इसी माह से जीएमसी कठुआ में मिलने लगेंगी। जीएमसी प्रबंधन का दावा है कि कठुआ जीएमसी में मशीनें पहुंच चुकी हैं। कुछ कलपुर्जे बाकी हैं, उनके आते ही डे-केयर सेंटर की शुरुआत कर दी जाएगी। इस सेंटर में थैलेसीमिया और हीमोफिलिया से पीड़ित मरीजों को ब्लड चढ़ाने, दवा, इंजेक्शन समेत अन्य ट्रीटमेंट दिया जाएगा।
बता दें कि जिले में हीमोफिलिया के 25-30 और थैलेसीमिया के 30 मरीजों की जानकारी उपलब्ध है। संख्या इसलिए कम है क्योंकि अधिकतर लोग जम्मू या लुधियाना से इलाज करवा रहे हैं। सेंटर की शुरुआत होने से मरीजों का बड़ा आंकड़ा सामने आ सकता है। जीएमसी प्रबंधन का कहना है कि इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए दवाई व इंजेक्शन का पर्याप्त स्टाॅक उपलब्ध है। जैसे-जैसे मरीजों की रजिस्ट्रेशन होगी, इंजेक्शन और दवा की डिमांड भेजकर मंगवाई जाएगी। अस्पताल प्रबंधन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि अगर कोई थैलेसीमिया और हीमोफिलिया से ग्रस्त है तो वह जीएमसी अस्पताल में संपर्क कर सकता है।
15 से 20 हजार का टीका मुफ्त में लगेगा
हीमोफीलिया फैक्टर आठ और नौ के मरीजों के लिए फ्री इंजेक्शन और थैलेसीमिया वाले मरीजों के लिए महंगी दवाएं कैल्फर और डैजीरोक्स फ्री मुहैया करवाई गई हैं, जिससे हीमोफीलिया और थैलेसिमिया वाले मरीजों को बड़ी राहत मिली है। हीमोफिलिया वाले मरीजों के लिए प्राइवेट में यह इंजेक्शन 15 से 20 हजार रुपये का लगता है और इंजेक्शन लगवाने के लिए मरीज को पहले ही संबंधित अस्पताल को जानकारी देने के बाद ही उपलब्ध होता है लेकिन जीएमसी में सेंटर शुरू होने के बाद इसका पर्याप्त स्टॉक भी उपलब्ध होगा। इसे महज 10 रुपये की पर्ची कटवाकर लगवाया जा सकेगा।
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हीमोफीलिया में रक्त बहना बंद नहीं होता
जीएमसी प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र कुमार अत्री ने बताया कि हीमोफीलिया एक आनुवांशिक बीमारी है, जो माता-पिता से होने वाले बच्चे में हो सकती है। यह पुरुषों में ज्यादा पाई जाती है। हीमोफीलिया पीड़ित को थोड़ी भी चोट लग जाती है तो उनका खून बहना रुकता नहीं है। इस कारण, एक रक्त प्रोटीन की कमी होती है, जिसे ''''क्लाटिग फैक्टर'''' कहा जाता है। इसकी विशेषता है कि यह बहते हुए रक्त के थक्के जमाकर उसका बहना रोकता है।
जीएमसी में थैलेसीमिया और हीमोफीलिया के मरीजों के लिए डे-केयर सेंटर की शुरुआत की जा रही है। सारी तैयारी कर ली गई है। कुछ पुर्जे आने बाकी हैं। उनके पहुंचते ही थैलेसीमिया और हीमोफीलिया के मरीजों की जांच, इलाज, दवाएं और इंजेक्शन कठुआ में ही उपलब्ध होंगे।
-डॉ. सुरेंद्र कुमार अत्री प्रिंसिपल जीएमसी कठुआ
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बता दें कि जिले में हीमोफिलिया के 25-30 और थैलेसीमिया के 30 मरीजों की जानकारी उपलब्ध है। संख्या इसलिए कम है क्योंकि अधिकतर लोग जम्मू या लुधियाना से इलाज करवा रहे हैं। सेंटर की शुरुआत होने से मरीजों का बड़ा आंकड़ा सामने आ सकता है। जीएमसी प्रबंधन का कहना है कि इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए दवाई व इंजेक्शन का पर्याप्त स्टाॅक उपलब्ध है। जैसे-जैसे मरीजों की रजिस्ट्रेशन होगी, इंजेक्शन और दवा की डिमांड भेजकर मंगवाई जाएगी। अस्पताल प्रबंधन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि अगर कोई थैलेसीमिया और हीमोफिलिया से ग्रस्त है तो वह जीएमसी अस्पताल में संपर्क कर सकता है।
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15 से 20 हजार का टीका मुफ्त में लगेगा
हीमोफीलिया फैक्टर आठ और नौ के मरीजों के लिए फ्री इंजेक्शन और थैलेसीमिया वाले मरीजों के लिए महंगी दवाएं कैल्फर और डैजीरोक्स फ्री मुहैया करवाई गई हैं, जिससे हीमोफीलिया और थैलेसिमिया वाले मरीजों को बड़ी राहत मिली है। हीमोफिलिया वाले मरीजों के लिए प्राइवेट में यह इंजेक्शन 15 से 20 हजार रुपये का लगता है और इंजेक्शन लगवाने के लिए मरीज को पहले ही संबंधित अस्पताल को जानकारी देने के बाद ही उपलब्ध होता है लेकिन जीएमसी में सेंटर शुरू होने के बाद इसका पर्याप्त स्टॉक भी उपलब्ध होगा। इसे महज 10 रुपये की पर्ची कटवाकर लगवाया जा सकेगा।
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हीमोफीलिया में रक्त बहना बंद नहीं होता
जीएमसी प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र कुमार अत्री ने बताया कि हीमोफीलिया एक आनुवांशिक बीमारी है, जो माता-पिता से होने वाले बच्चे में हो सकती है। यह पुरुषों में ज्यादा पाई जाती है। हीमोफीलिया पीड़ित को थोड़ी भी चोट लग जाती है तो उनका खून बहना रुकता नहीं है। इस कारण, एक रक्त प्रोटीन की कमी होती है, जिसे ''''क्लाटिग फैक्टर'''' कहा जाता है। इसकी विशेषता है कि यह बहते हुए रक्त के थक्के जमाकर उसका बहना रोकता है।
जीएमसी में थैलेसीमिया और हीमोफीलिया के मरीजों के लिए डे-केयर सेंटर की शुरुआत की जा रही है। सारी तैयारी कर ली गई है। कुछ पुर्जे आने बाकी हैं। उनके पहुंचते ही थैलेसीमिया और हीमोफीलिया के मरीजों की जांच, इलाज, दवाएं और इंजेक्शन कठुआ में ही उपलब्ध होंगे।
-डॉ. सुरेंद्र कुमार अत्री प्रिंसिपल जीएमसी कठुआ