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Kathua News: 16 लाख की दो एंबुलेंस बनीं शोपीस, दो साल में स्वास्थ्य विभाग नहीं भर सका पंजीकरण फीस
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रामकोट। पंजीकरण नहीं होने से 16 लाख रुपये की दो मिनी एंबुलेंस दो साल से शोपीस बनकर खड़ी हैं। एक एंबुलेंस प्राथमिक उपचार केंद्र रामकोट और दूसरी लाखड़ी में कबाड़ हो रही है। इन गाड़ियों की मरीजों को सुविधा नहीं मिल रही है। इमरजेंसी में दूर दराज के मरीजों को निजी गाड़ियों से अस्पताल ले जाना पड़ रहा है। इससे जहां लोगों को अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं, वहीं परेशान भी होना पड़ रहा है।
मरीजों की सुविधा के लिए दो साल पहले दोनों एंबुलेंस खरीदी गई थीं। रामकोट अस्पताल को डीडीसी फंड और लाखड़ी को एंबुलेंस लाखड़ी पंचायत के फंड से मिली थी। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग अभी तक न तो इनका पंजीकरण करवा पाया है और न ही इंश्योरेंस। इससे गाड़ियां अस्पताल में महीनों से एक जगह खड़ी जंग खा रही हैं। लोगों ने इन एंबुलेंस को जल्द चलाने की मांग की है। वहीं, लोगों ने प्राथमिक उपचार केंद्र लाखड़ी से उप जिला अस्पताल बिलावर में शिफ्ट की एंबुलेंस का विरोध किया है। मांग की कि जल्द गाड़ी को वापस पंचायत लाखड़ी में भेजा जाए।
मासिक बैठक में दो बार उठाया मामला
मासिक बैठकों में दो बार स्वास्थ्य विभाग को दो साल पहले दी एंबुलेंस के पंजीकरण के लिए कह चुके हैं। लेकिन, बावजूद इसके अभी तक पंजीकरण नहीं करवाया गया है। इससे गाड़ियों का मरीजों को फायदा नहीं मिल रहा है। विभाग जल्द गाड़ियों का पंजीकरण करवाकर लोगों को सुविधा प्रदान करें।
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-नारायण दत्त त्रिपाठी, सदस्य जिला विकास परिषद, नगरोटा गुजरू
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खड़ी रहने से गाड़ियों की बैटरी हो रही खराब
दो साल से एक जगह खड़ी रहने से दोनों गाड़ियों की बैटरी खराब हो रही हैं। पंजीकरण के अलावा अभी इंश्योरेंस भी नहीं करवाया गया है। इसके चलते लोगों को इमरजेंसी में मरीजों को निजी गाड़ियां हायर कर अस्पताल ले जाना पड़ रहा है। विभाग को इस मामले का जल्द समाधान करवाना चाहिए।
मोहिंदर सिंह मनकोटिया, सामाजिक कार्यकर्ता
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कोट
जरूरत में प्राथमिक उपचार केंद्र रामकोट की मिनी एंबुलेंस को चलाया जा रहा है। लेकिन, लाखड़ी में खड़ी एंबुलेंस बंद है। दोनों गाड़ियों के पंजीकरण के लिए उच्चाधिकारियों को फंड मुहैया करवाने के लिए लिखा गया है, लेकिन अभी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। फंड आने पर पंजीकरण और इंश्योरेंस करवाकर गाड़ियों को शुरू कर दिया जाएगा।
डॉ. हरविंदर सिंह, बीएमओ, बिलावर
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मरीजों की सुविधा के लिए दो साल पहले दोनों एंबुलेंस खरीदी गई थीं। रामकोट अस्पताल को डीडीसी फंड और लाखड़ी को एंबुलेंस लाखड़ी पंचायत के फंड से मिली थी। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग अभी तक न तो इनका पंजीकरण करवा पाया है और न ही इंश्योरेंस। इससे गाड़ियां अस्पताल में महीनों से एक जगह खड़ी जंग खा रही हैं। लोगों ने इन एंबुलेंस को जल्द चलाने की मांग की है। वहीं, लोगों ने प्राथमिक उपचार केंद्र लाखड़ी से उप जिला अस्पताल बिलावर में शिफ्ट की एंबुलेंस का विरोध किया है। मांग की कि जल्द गाड़ी को वापस पंचायत लाखड़ी में भेजा जाए।
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मासिक बैठक में दो बार उठाया मामला
मासिक बैठकों में दो बार स्वास्थ्य विभाग को दो साल पहले दी एंबुलेंस के पंजीकरण के लिए कह चुके हैं। लेकिन, बावजूद इसके अभी तक पंजीकरण नहीं करवाया गया है। इससे गाड़ियों का मरीजों को फायदा नहीं मिल रहा है। विभाग जल्द गाड़ियों का पंजीकरण करवाकर लोगों को सुविधा प्रदान करें।
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-नारायण दत्त त्रिपाठी, सदस्य जिला विकास परिषद, नगरोटा गुजरू
खड़ी रहने से गाड़ियों की बैटरी हो रही खराब
दो साल से एक जगह खड़ी रहने से दोनों गाड़ियों की बैटरी खराब हो रही हैं। पंजीकरण के अलावा अभी इंश्योरेंस भी नहीं करवाया गया है। इसके चलते लोगों को इमरजेंसी में मरीजों को निजी गाड़ियां हायर कर अस्पताल ले जाना पड़ रहा है। विभाग को इस मामले का जल्द समाधान करवाना चाहिए।
मोहिंदर सिंह मनकोटिया, सामाजिक कार्यकर्ता
कोट
जरूरत में प्राथमिक उपचार केंद्र रामकोट की मिनी एंबुलेंस को चलाया जा रहा है। लेकिन, लाखड़ी में खड़ी एंबुलेंस बंद है। दोनों गाड़ियों के पंजीकरण के लिए उच्चाधिकारियों को फंड मुहैया करवाने के लिए लिखा गया है, लेकिन अभी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। फंड आने पर पंजीकरण और इंश्योरेंस करवाकर गाड़ियों को शुरू कर दिया जाएगा।
डॉ. हरविंदर सिंह, बीएमओ, बिलावर