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Kathua News: नशे से दूर रहने का दिया पैगाम, अमन-शांति की मांगी दुआ
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कठुआ की ईदगाह में नमाज अता करते मुस्लिम समुदाय के लोग
ईद-उल-अजहा पर जिले में जगह-जगह अदा की गई नमाज
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले में ईद-उल-अजहा बुधवार को धार्मिक आस्था और उल्लास के साथ मनाई गई। इस दौरान जिले में विभिन्न स्थानों पर एकत्र मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सामूहिक रूप से नमाज अदा की और गले मिलकर एक-दूसरे को बधाई दी। खास तौर से मुस्लिम समाज ने नशे को समाज पर एक लानत बताते हुए इससे दूर रहने और तौबा करने का पैगाम दिया।
ईद की नमाज पढ़ने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोग कठुआ शहर और आसपास के गांव से बड़ी संख्या में शहर की ईदगाह मैदान में पहुंचे। मौलाना इस्लाम की अगुवाई में नमाज अदा कर अमन और शांति की दुआ मांगी गई। वहां लोगों ने ईदगाह मैदान में लगी दुकानों में धार्मिक किताबों, टोपियों और अन्य धार्मिक उपयोग की वस्तुओं समेत बाजार में भी खरीदारी की। इस कारण बाजार में भी रौनक देखने के लिए मिली।
मुस्लिम वेलफेयर कमेटी के महासचिव मास्टर मो. सदीक ने बताया कि इस्लामिक मान्यता के अनुसार, इस दिन अल्लाह ने हजरत इब्राहिम के सपने में आकर अपनी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी देने का हुक्म दिया। इसके बाद उन्होंने अपने पुत्र हजरत इस्माइल तक को कुर्बान करने के लिए तैयार हो गए थे लेकिन अल्लाह ने उनके पुत्र को जीवनदान दे दिया। तभी से इस त्योहार पर जानवरों की कुर्बानी की प्रथा चल रही है। बुधवार को भी नमाज अदा करने के बाद लोगों ने कुर्बानी की रस्म पूरी की।
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मुस्लिम समुदाय के लोगों ने विशेष रूप से नशे के खिलाफ आह्वान किया। कहा कि इस्लाम में नशे को लानत कहा गया है। कोई भी मजहब इसकी इजाजत नहीं देता। नशा बेचने और इस्तेमाल करने वाले समाज पर एक धब्बा है। पैसा गलत तरीके से कमाने वाला कभी खुश नहीं रहता।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले में ईद-उल-अजहा बुधवार को धार्मिक आस्था और उल्लास के साथ मनाई गई। इस दौरान जिले में विभिन्न स्थानों पर एकत्र मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सामूहिक रूप से नमाज अदा की और गले मिलकर एक-दूसरे को बधाई दी। खास तौर से मुस्लिम समाज ने नशे को समाज पर एक लानत बताते हुए इससे दूर रहने और तौबा करने का पैगाम दिया।
ईद की नमाज पढ़ने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोग कठुआ शहर और आसपास के गांव से बड़ी संख्या में शहर की ईदगाह मैदान में पहुंचे। मौलाना इस्लाम की अगुवाई में नमाज अदा कर अमन और शांति की दुआ मांगी गई। वहां लोगों ने ईदगाह मैदान में लगी दुकानों में धार्मिक किताबों, टोपियों और अन्य धार्मिक उपयोग की वस्तुओं समेत बाजार में भी खरीदारी की। इस कारण बाजार में भी रौनक देखने के लिए मिली।
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मुस्लिम वेलफेयर कमेटी के महासचिव मास्टर मो. सदीक ने बताया कि इस्लामिक मान्यता के अनुसार, इस दिन अल्लाह ने हजरत इब्राहिम के सपने में आकर अपनी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी देने का हुक्म दिया। इसके बाद उन्होंने अपने पुत्र हजरत इस्माइल तक को कुर्बान करने के लिए तैयार हो गए थे लेकिन अल्लाह ने उनके पुत्र को जीवनदान दे दिया। तभी से इस त्योहार पर जानवरों की कुर्बानी की प्रथा चल रही है। बुधवार को भी नमाज अदा करने के बाद लोगों ने कुर्बानी की रस्म पूरी की।
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मुस्लिम समुदाय के लोगों ने विशेष रूप से नशे के खिलाफ आह्वान किया। कहा कि इस्लाम में नशे को लानत कहा गया है। कोई भी मजहब इसकी इजाजत नहीं देता। नशा बेचने और इस्तेमाल करने वाले समाज पर एक धब्बा है। पैसा गलत तरीके से कमाने वाला कभी खुश नहीं रहता।