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Kathua News: एफएम कठुआ के 34 साल का सफर पूरा, आज भी पहली पसंद
Tue, 29 Apr 2025 01:36 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Tue, 29 Apr 2025 01:36 AM IST
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कठुआ, सांबा, उधमपुर, चंबा, डोडा, पठानकोट व गुरदासपुर तक पहुंच
कठुआ। यह आकाशवाणी कठुआ है 102.2 मेगाहर्ट्ज पर। यह आवाज रेडियो के मुरीद लाखों लोग आज भी अपने रेडियो सेट पर सुनते हैं। 29 अप्रैल, 1991 की शाम पांच बजकर 58 मिनट पर शुरू हुआ आकाशवाणी कठुआ का सफर सोमवार को 34 वर्ष पूरे कर गया है।
मीडियम वेव रेडियो के जमाने में न सिर्फ कठुआ बल्कि सांबा, उधमपुर, चंबा, डोडा, पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर और कांगड़ा तक पहुंचने वाले कठुआ रेडियो ने लाखों लोगों को अपने कार्यक्रमों का देखते ही देखते मुरीद बना लिया। 34 साल में रेडियो की कई आवाजें बदली, लेकिन सुनने वाले आज भी कठुआ एफएम को सुनना नहीं भूलते। खेतों में काम करते किसानों से लेकर दूरदराज के जंगलों में मवेशियों को चराते चरवाहे हो या फिर युवा, महिलाएं और बुजुर्ग आज भी रेडियो के कार्यक्रमों को सुनना और उसमें भाग लेना नहीं भूलते हैं। सूचना तकनीक के जमाने में भी रेडियो कठुआ आज भी अपने चाहने वालों के बीच जगह बनाए हुए है।
रेडियो से जुड़े श्रोता बताते हैं कि जमाने में भले ही ट्रेंड बदलते रहें, लेकिन जो लोग रेडियो से जुड़े हैं वह आज भी रेडियो की है अपनी जगह रेडियो ने बदलते ट्रेंड में कई बदलाव देखे हैं। कैसेट के जमाने से लेकर सीडी, इयरपॉड, मोबाइल में गीतों की भरमार से लेकर अब उपलब्ध ऑनलाइन गीतों की शृंखला और निजी एफएफ युवाओं की बदलती पसंद तो हैं। मगर आज भी रेडियो की अपनी अलग ही पहचान है। बदलते समय के साथ कार्यक्रमों में बदलाव कर श्रोताओं की हर पसंद को ध्यान में रखने के साथ ही रेडियो कठुआ ने विभिन्न संस्कृतियों को भी मिलाया है। संवाद
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स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा रेडियो, प्राेडक्शन में 10 में से 9 पद रिक्तआधी ही रह गई ट्रांसमीटर की क्षमता
भले ही भागदौड़ भरी जिंदगी में रेडियो लोगों के साथ अपना साथ निभाता चला गया हो, लेकिन आज आकाशवाणी कठुआ स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है। एक ही कार्यक्रम अधिकारी पूरे स्टेशन की देखरेख कर रहा है। आकाशवाणी कठुआ के साथ 50 से ज्यादा कैजुअल अनाउंसर जुड़े हैं। इसमें कई लोग शुरुआत से जुड़े हुए हैं। रिक्त पदों को भरने से रेडियो में नई जान आ सकती है।
उधर, 34 साल पहले स्थापित ट्रांसमीटर भी अब दम तोड़ता नजर आ रहा है। दूरदराज इलाकों तक सुना जाने वाला यह रेडियो खास तौर से पाकिस्तान के दुष्प्रचार से निपटने का काम करता रहा है। सूत्रों के अनुसार दस किलोवॉट क्षमता का ट्रांसमीटर छह किलोवॉट या कभी इससे भी कम पर चलता है। इससे इसकी पहुंच कम हो गई है।
.....................
आपदा, मनोरंजन, ज्ञान में रेडिया ने कई बार अपनी भूमिका को सार्थक किया है। आकाशवाणी गाना बजाना ही नहीं है, यह मंच है जो प्रशासन और लोगों के बीच सेतु का काम करता है। आज भी दूरदराज इलाके से लोग इससे जुड़े हुए हैं। नियमित रूप से इन लोगों का फीडबैक फोन के माध्यम से हासिल होता रहता है।
राकेश कुमार सत्थु, कार्यक्रम प्रमुख, आकाशवाणी कठुआ
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कठुआ। यह आकाशवाणी कठुआ है 102.2 मेगाहर्ट्ज पर। यह आवाज रेडियो के मुरीद लाखों लोग आज भी अपने रेडियो सेट पर सुनते हैं। 29 अप्रैल, 1991 की शाम पांच बजकर 58 मिनट पर शुरू हुआ आकाशवाणी कठुआ का सफर सोमवार को 34 वर्ष पूरे कर गया है।
मीडियम वेव रेडियो के जमाने में न सिर्फ कठुआ बल्कि सांबा, उधमपुर, चंबा, डोडा, पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर और कांगड़ा तक पहुंचने वाले कठुआ रेडियो ने लाखों लोगों को अपने कार्यक्रमों का देखते ही देखते मुरीद बना लिया। 34 साल में रेडियो की कई आवाजें बदली, लेकिन सुनने वाले आज भी कठुआ एफएम को सुनना नहीं भूलते। खेतों में काम करते किसानों से लेकर दूरदराज के जंगलों में मवेशियों को चराते चरवाहे हो या फिर युवा, महिलाएं और बुजुर्ग आज भी रेडियो के कार्यक्रमों को सुनना और उसमें भाग लेना नहीं भूलते हैं। सूचना तकनीक के जमाने में भी रेडियो कठुआ आज भी अपने चाहने वालों के बीच जगह बनाए हुए है।
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रेडियो से जुड़े श्रोता बताते हैं कि जमाने में भले ही ट्रेंड बदलते रहें, लेकिन जो लोग रेडियो से जुड़े हैं वह आज भी रेडियो की है अपनी जगह रेडियो ने बदलते ट्रेंड में कई बदलाव देखे हैं। कैसेट के जमाने से लेकर सीडी, इयरपॉड, मोबाइल में गीतों की भरमार से लेकर अब उपलब्ध ऑनलाइन गीतों की शृंखला और निजी एफएफ युवाओं की बदलती पसंद तो हैं। मगर आज भी रेडियो की अपनी अलग ही पहचान है। बदलते समय के साथ कार्यक्रमों में बदलाव कर श्रोताओं की हर पसंद को ध्यान में रखने के साथ ही रेडियो कठुआ ने विभिन्न संस्कृतियों को भी मिलाया है। संवाद
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स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा रेडियो, प्राेडक्शन में 10 में से 9 पद रिक्तआधी ही रह गई ट्रांसमीटर की क्षमता
भले ही भागदौड़ भरी जिंदगी में रेडियो लोगों के साथ अपना साथ निभाता चला गया हो, लेकिन आज आकाशवाणी कठुआ स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है। एक ही कार्यक्रम अधिकारी पूरे स्टेशन की देखरेख कर रहा है। आकाशवाणी कठुआ के साथ 50 से ज्यादा कैजुअल अनाउंसर जुड़े हैं। इसमें कई लोग शुरुआत से जुड़े हुए हैं। रिक्त पदों को भरने से रेडियो में नई जान आ सकती है।
उधर, 34 साल पहले स्थापित ट्रांसमीटर भी अब दम तोड़ता नजर आ रहा है। दूरदराज इलाकों तक सुना जाने वाला यह रेडियो खास तौर से पाकिस्तान के दुष्प्रचार से निपटने का काम करता रहा है। सूत्रों के अनुसार दस किलोवॉट क्षमता का ट्रांसमीटर छह किलोवॉट या कभी इससे भी कम पर चलता है। इससे इसकी पहुंच कम हो गई है।
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आपदा, मनोरंजन, ज्ञान में रेडिया ने कई बार अपनी भूमिका को सार्थक किया है। आकाशवाणी गाना बजाना ही नहीं है, यह मंच है जो प्रशासन और लोगों के बीच सेतु का काम करता है। आज भी दूरदराज इलाके से लोग इससे जुड़े हुए हैं। नियमित रूप से इन लोगों का फीडबैक फोन के माध्यम से हासिल होता रहता है।
राकेश कुमार सत्थु, कार्यक्रम प्रमुख, आकाशवाणी कठुआ