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आबियाना कर का किसानों ने किया विरोध
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कठुआ। जम्मू कश्मीर सरकार के वित्त विभाग द्वारा अधिसूचना जारी की गई है। इसके तहत नहर के पानी का सिंचाई के लिए इस्तेमाल करने वाले किसानों से सिंचाई कर (आबियाना) वसूला जाएगा। इससे किसान आक्रोशित हैं। किसानों ने सरकार से आबियाना को लेकर पुनर्विचार करने की मांग की। किसानों ने कहा कि सरकार ने अगर अपना फैसला वापस नहीं लिया तो किसान सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे।
सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता अनिल गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2015 से अबतक का आबियाना वसूले जाने के संबंध में विभाग को आदेश हासिल हो चुका है। फिलहाल खरीफ की लगाई गई फसल का डाटा रिकार्ड किया जा रहा है। जिले में नहरी नेटवर्क से जुड़े किसानों को पूर्व की तरह ही बकाया आबियाना चुकाना होगा। उधर राजस्व विभाग के अधिकारी भी फिलहाल आदेश को लेकर पसोपेश में हैं। लंबे अर्से तक बंद रहे इस कर का पुराना रिकार्ड खंगाले जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने बताया सरकार के आदेश को जमीनी स्तर पर लागू करवाया जाएगा।
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किसानों और किसान संगठनों की प्रतिक्रिया
सरकार द्वारा सिंचाई कर लगाने से पहले नहरों की दशा का जायजा लें। जहां से किसानों को पानी मिल ही नहीं पा रहा है। किसानों से सिंचाई कर वसूला जाना किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं हो सकता है। इस तरह के फैसले पहले से ही आर्थिक संकट का सामना कर रहे किसानों को कर्ज के तले दाबने के प्रयास से ज्यादा कुछ नहीं हैं।
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सुरेश कुमार शर्मा, किसान ठुनून।
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किसानों की आय को दो गुना करने की घोषणा करने वाली सरकार मौसम की मार से हुए फसलों के नुकसान का मुआवजे देने के बजाए किसानों से सिंचाई कर वसूला जाना, उसकी पूंजीवादी सोच का उदाहरण है। अगर सरकार ऐसे फैसले लागू करेगी तो आने वाले समय में अपने खेत में काम कर रहे लोगों को इसे छोड़कर रोजीरोटी के लिए महानगरों की ओर पलायन करना पड़ सकता है।
सतपाल चौधरी, किसान पल्ली।
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किसानों से सिंचाई कर वसूला जाना किसी तरह से ठीक नही है। अगर किसी भी प्रकार के वित्तीय नुकसान से बचने के लिए इसे दोबारा शुरू करना पड़ रहा है तो भी किसानों से बकाया नहीं वसूला जाना चाहिए। क्योंकि सिंचाई कर में छूट सरकार का खुद से लिया गया फैसला था। इसके लिए कभी किसानों ने मांग नहीं की थी।
सेवा राम, कृषक नेता किसान तहरीक।
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गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों को कोई राहत देने के बजाए उनसे अब एक बार फिर से सिंचाई कर वसूला जाना निंदनीय है। इस तरह के फैसले कृषि प्रधान देश के किसानों को हतोत्साहित करते हैं। अगर ऐसे ही फैसले लागू किए जाते रहे तो आने वाली पीढ़ी खेती करने के बजाए कोई अन्य रोजगार की तलाश करेंगी। ऐसे स्थिति में बेरोजगारों की बड़ी फौज मुख्य समस्या बन जाएगी।
मोहिंदर सिंह, कृषक नेता आल इंडिया किसान सभा।
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सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता अनिल गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2015 से अबतक का आबियाना वसूले जाने के संबंध में विभाग को आदेश हासिल हो चुका है। फिलहाल खरीफ की लगाई गई फसल का डाटा रिकार्ड किया जा रहा है। जिले में नहरी नेटवर्क से जुड़े किसानों को पूर्व की तरह ही बकाया आबियाना चुकाना होगा। उधर राजस्व विभाग के अधिकारी भी फिलहाल आदेश को लेकर पसोपेश में हैं। लंबे अर्से तक बंद रहे इस कर का पुराना रिकार्ड खंगाले जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने बताया सरकार के आदेश को जमीनी स्तर पर लागू करवाया जाएगा।
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किसानों और किसान संगठनों की प्रतिक्रिया
सरकार द्वारा सिंचाई कर लगाने से पहले नहरों की दशा का जायजा लें। जहां से किसानों को पानी मिल ही नहीं पा रहा है। किसानों से सिंचाई कर वसूला जाना किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं हो सकता है। इस तरह के फैसले पहले से ही आर्थिक संकट का सामना कर रहे किसानों को कर्ज के तले दाबने के प्रयास से ज्यादा कुछ नहीं हैं।
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सुरेश कुमार शर्मा, किसान ठुनून।
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किसानों की आय को दो गुना करने की घोषणा करने वाली सरकार मौसम की मार से हुए फसलों के नुकसान का मुआवजे देने के बजाए किसानों से सिंचाई कर वसूला जाना, उसकी पूंजीवादी सोच का उदाहरण है। अगर सरकार ऐसे फैसले लागू करेगी तो आने वाले समय में अपने खेत में काम कर रहे लोगों को इसे छोड़कर रोजीरोटी के लिए महानगरों की ओर पलायन करना पड़ सकता है।
सतपाल चौधरी, किसान पल्ली।
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किसानों से सिंचाई कर वसूला जाना किसी तरह से ठीक नही है। अगर किसी भी प्रकार के वित्तीय नुकसान से बचने के लिए इसे दोबारा शुरू करना पड़ रहा है तो भी किसानों से बकाया नहीं वसूला जाना चाहिए। क्योंकि सिंचाई कर में छूट सरकार का खुद से लिया गया फैसला था। इसके लिए कभी किसानों ने मांग नहीं की थी।
सेवा राम, कृषक नेता किसान तहरीक।
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गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों को कोई राहत देने के बजाए उनसे अब एक बार फिर से सिंचाई कर वसूला जाना निंदनीय है। इस तरह के फैसले कृषि प्रधान देश के किसानों को हतोत्साहित करते हैं। अगर ऐसे ही फैसले लागू किए जाते रहे तो आने वाली पीढ़ी खेती करने के बजाए कोई अन्य रोजगार की तलाश करेंगी। ऐसे स्थिति में बेरोजगारों की बड़ी फौज मुख्य समस्या बन जाएगी।
मोहिंदर सिंह, कृषक नेता आल इंडिया किसान सभा।