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Kathua News: रावी पर जुलाई से पहले बनेगा एक्सप्रेसवे पुल
Thu, 20 Mar 2025 01:32 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Thu, 20 Mar 2025 01:32 AM IST
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रावी दरिया पर कीड़ियां गंडियाल में तैयार हो रहा 1.20 किलोमीटर लंबा पुल। संवाद
- फोटो : kathua
दिल्ली-कटड़ा एक्सप्रेसवे पुल के निर्माण ने पकड़ी रफ्तार, विदेशी निर्भरता को छोड़कर अब गाजियाबाद से मंगवाए गए ढांचेबैलेंस्ड कैंटीलीवर तकनीक के पुल फार्म ट्रैवलर्स तकनीक से 672 सेग्मेंट किए जा रहे तैयार
कठुआ। मलयेशिया से लंबे इंतजार के बाद भी रावी पुल के लिए जब डिजाइन के अनुरूप कास्टिंग ढांचा नहीं मिला तो अब गाजियाबाद में इसे तैयार कर काम शुरू कर दिया है। पिछले नौ महीने से धीमे चल रहे दिल्ली-कटड़ा एक्सप्रेसवे के सबसे लंबे पुल के निर्माण ने अब रफ्तार पकड़ ली है। जुलाई महीने तक इसका बायां हिस्सा ट्रैफिक के लिए तैयार हो जाएगा।
1.20 किलोमीटर लंबा यह पुल दिल्ली-कटड़ा एक्सप्रेस वे पर कीड़ियां गंडियाल के पास तैयार हो रहा है। यह पंजाब के सुंदरनगर के पास से दाखिल हो रहे एक्सप्रेस वे को जम्मू-कश्मीर के साथ लिंक करेगा। खास बात यह है कि प्रदेश में वेल सिंकिंग तकनीक से पिलर और फिर बैलेंस्ड कैंटीलीवर तकनीक पर आधारित यह एकमात्र पुल है। पुल निर्माण में वर्तमान में फार्म ट्रैवलर्स तकनीक के तहत पिलर पर सेग्मेंट बांधने का काम शुरू हो चुका है।
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इस तकनीक में जमीन के साथ शटरिंग का सहारा लेने की आवश्यकता नहीं होती है। ऐसे में एक एक कर कुल 672 सेग्मेंट इस पुल पर इसी तकनीक से जोड़े जाएंगे। जिले में फार्म ट्रैवलर्स तकनीक से तैयार होने वाला यह दूसरा बड़ा पुल है। इससे पहले केबल स्टेयड अटल सेतु पुल का निर्माण भी फार्म ट्रैवलर्स तकनीक से किया जा चुका है।
इससे पहले इन पुल को मजबूती देने और रावी में किसी भी तरह की बाढ़ को झेलने के लिए वेल फाउंडेशन में 125 मीटर नीचे तक की खुदाई कर रावी दरिया के पुल को आने वाले कई दशकों तक मजबूती देने के लिए काम किया गया है।
दिल्ली-कटड़ा एक्सप्रेसवे पर छह लेन की ट्रैफिक चलाई जानी है। खास बात यह है कि बैलेंस्ट कैंटीलीवर तकनीक में इस पुल को ऐसे बांधा जाएगा कि दोनों ओर की ट्रैफिक एक ही फाउंडेशन के सहारे गुजर सकेगी। रावी पर बनने वाले इस तकनीक के पुल की चौड़ाई डेक से 33.5 मीटर रहने वाली है। संवाद
रावी पर बैलेंस्ड कैंटीलीटर तक्नीक से 1.20 किलोमीटर लंबा पुल तैयार किया जा रहा है। इसके निर्माण ने अब तेजी पकड़ ली है और जुलाई तक इसके एक हिस्से को ट्रैफिक चलने योग्य तैयार कर लिया जाएगा। इस पुल निर्माण में सेग्मेंट बांधने के लिए फार्म ट्रैवलर्स तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
राजीव कुमार, परियोजना निदेशक
नेशनल हाईवे प्राधिकरण जम्मू
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कठुआ। मलयेशिया से लंबे इंतजार के बाद भी रावी पुल के लिए जब डिजाइन के अनुरूप कास्टिंग ढांचा नहीं मिला तो अब गाजियाबाद में इसे तैयार कर काम शुरू कर दिया है। पिछले नौ महीने से धीमे चल रहे दिल्ली-कटड़ा एक्सप्रेसवे के सबसे लंबे पुल के निर्माण ने अब रफ्तार पकड़ ली है। जुलाई महीने तक इसका बायां हिस्सा ट्रैफिक के लिए तैयार हो जाएगा।
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1.20 किलोमीटर लंबा यह पुल दिल्ली-कटड़ा एक्सप्रेस वे पर कीड़ियां गंडियाल के पास तैयार हो रहा है। यह पंजाब के सुंदरनगर के पास से दाखिल हो रहे एक्सप्रेस वे को जम्मू-कश्मीर के साथ लिंक करेगा। खास बात यह है कि प्रदेश में वेल सिंकिंग तकनीक से पिलर और फिर बैलेंस्ड कैंटीलीवर तकनीक पर आधारित यह एकमात्र पुल है। पुल निर्माण में वर्तमान में फार्म ट्रैवलर्स तकनीक के तहत पिलर पर सेग्मेंट बांधने का काम शुरू हो चुका है।
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इस तकनीक में जमीन के साथ शटरिंग का सहारा लेने की आवश्यकता नहीं होती है। ऐसे में एक एक कर कुल 672 सेग्मेंट इस पुल पर इसी तकनीक से जोड़े जाएंगे। जिले में फार्म ट्रैवलर्स तकनीक से तैयार होने वाला यह दूसरा बड़ा पुल है। इससे पहले केबल स्टेयड अटल सेतु पुल का निर्माण भी फार्म ट्रैवलर्स तकनीक से किया जा चुका है।
इससे पहले इन पुल को मजबूती देने और रावी में किसी भी तरह की बाढ़ को झेलने के लिए वेल फाउंडेशन में 125 मीटर नीचे तक की खुदाई कर रावी दरिया के पुल को आने वाले कई दशकों तक मजबूती देने के लिए काम किया गया है।
दिल्ली-कटड़ा एक्सप्रेसवे पर छह लेन की ट्रैफिक चलाई जानी है। खास बात यह है कि बैलेंस्ट कैंटीलीवर तकनीक में इस पुल को ऐसे बांधा जाएगा कि दोनों ओर की ट्रैफिक एक ही फाउंडेशन के सहारे गुजर सकेगी। रावी पर बनने वाले इस तकनीक के पुल की चौड़ाई डेक से 33.5 मीटर रहने वाली है। संवाद
रावी पर बैलेंस्ड कैंटीलीटर तक्नीक से 1.20 किलोमीटर लंबा पुल तैयार किया जा रहा है। इसके निर्माण ने अब तेजी पकड़ ली है और जुलाई तक इसके एक हिस्से को ट्रैफिक चलने योग्य तैयार कर लिया जाएगा। इस पुल निर्माण में सेग्मेंट बांधने के लिए फार्म ट्रैवलर्स तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
राजीव कुमार, परियोजना निदेशक
नेशनल हाईवे प्राधिकरण जम्मू