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ठंड के कारण मैदानों में पहुंची पहाड़ों की आफत

Wed, 30 Dec 2015 01:49 AM IST
कठुआ/अमर उजाला ब्यूरो
कठुआ/अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 30 Dec 2015 01:49 AM IST
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 Due to the cold plains of the disaster reached the mountains

सर्दियों का मौसम आते ही जंगली जानवर मैदानों की ओर रुख कर जाते हैं। इसी के साथ पहाड़ों की यह आफत निचले इलाके के किसानों और पशुपालकों के लिए मुसीबत बन जाती है।

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हर साल जंगली जानवरों के हमलों में जहां दर्जनों मवेशी जान गवाते हैं। वहीं पिछले कुछ सालों में जंगलों के घट रहे अस्तित्व के चलते कई बार मनुष्यों और जंगली जानवरों का आमना सामना भी हो जाता है।
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बीते कुछ महीनों में ही बनी और बिलावर के मल्हार में ऐसा कई बार हुुआ जब इंसान और जंगली जानवर आमने सामने आ गए। ऐसे में हुए हमलों में कई बार जान पर भी बन आई।
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जंगली जानवरों का निचले पहाड़ों और मैदानों में दिखना आम बात नहीं है। लेकिन इसके पीछे बर्फबारी को कारण माना जा रहा है। पहाड़ों पर पिछले दिनों हुई बर्फबारी के बाद पहाड़ बर्फ से लदे हुए हैं ऐसे में खाने की तलाश में जंगली जानवर मैदानों की ओर रुख कर रहे हैं। जंगली जानवरों के आतंक के कारण मैदानी लोगों को कई बार परेशान होना पड़ा है।

गत वर्ष बरवाल और बसंतपुर में भी तेंदुए ने भेड़ों को शिकार बनाया था। इस बार बिलावर और महानपुर के इलाकों में भी तेंदुए दिखाई देने लगे हैं। उधर, बंदरों ने भी किसानों को परेशान करना शुरू कर दिया है। हालांकि जानवरों के मैदानों की ओर आने का एक कारण वनों की अंधाधुंध कटाई भी है।

समाज सेवी शशि शर्मा ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि वनों की कटाई के कारण भी जंगली जानवर मैदानों की ओर रुख कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें रहने के लिए माकूल वातावरण नहीं मिल पा रहा है।

इस बात को सही ठहराते हुए वाइल्ड लाइफ वार्डन प्रियंका सरीन ने कहा कि जंगली जानवरों को रहने के लिए घने और डार्क एरिया चाहिए। ऐसे में बर्फबारी के दौरान यह जानवर सर्दी को सहन नहीं कर पाते हैं और अपने असली निवास से कुछ दूर चलते हैं, लेकिन अब चूंकि जंगलों का क्षेत्रफल कम हो गया है।


 ऐसे में उन्हें मैदानों की ओर रुख करना पड़ता है। जिसके बाद मानवीय द्वंद के कारण अकसर जंगली जानवरों और मानव का आमना सामना भी हो जाता है। उन्होंने कहा कि रामकोट के बरोटा में पिछले दिनों तेंदुए देखे गए थे और इसके बाद विभाग की टीम पूरी तरह से नजर बनाए हुए हैं।

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