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अस्पताल के साथ लगते मोहल्ले में है समस्याओं का मकड़जाल

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Drinking water problem
कठुआ। गली, नाली और साफ-सफाई जैसी समस्याओं के मकड़जाल में फंसे शहर के विभिन्न वार्डों की तरह वार्ड 20 में एक नजर डालने पर इस तरह की समस्याएं नहीं दिखतीं। लेकिन, इसी वार्ड के जिला अस्पताल से सटे मोहल्ले में सभी समस्याएं मौजूद हैं।
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वार्ड 20 में न तो लोगों को पर्याप्त मात्रा में पीने का साफ पानी उपलब्ध है, और न ही आवागमन के लिए बेहतर गली व साफ सफाई की व्यवस्था है। जिसके कारण यहां रहने वाले लोगों में रोष है। मोहल्ले में व्याप्त इन समस्याओं से यहां रहने वाले 35 के करीब परिवारों को दशकों से इन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद न तो प्रशासन ने कभी समाधान के लिए कोई उपाय किया, और न ही नगर परिषद की नजरें इस ओर पड़ रही हैं। अब यहां रहने वाले लोगों की गांव जैसे हालात में जीवन-यापन करना मजबूरी बन गई है।
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क्या कहते हैं स्थानीय
मोहल्ले में लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के विभाग ने मात्र डेढ़ इंच का पाइप लगाया है। इससे सप्लाई होने वाला पानी पहले तो कभी तीन दिनों और कभी चार दिनों के बाद आता है। वह भी इतने कम समय के लिए कि लोग अपनी जरूरत भर का पानी एकत्र भी नहीं कर पाते। मोहल्ले में पहले एक पब्लिक स्टैंड होता था। वह भी काफी समय से बंद है। ऐसे में यहां रहने वाले ज्यादातर लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है।
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- राज कुमार
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मोहल्ले के पानी का निकास जिस ओर था, आज वहां नए अस्पताल का निर्माण हो चुका है। जिसके कारण पानी की निकासी का परंपरागत रास्ता बंद हो गया है। अस्पताल बनने के बाद कोई ऐसा प्रावधान नहीं है कि यहां से निकलने वाला पानी आराम से बह सके। इसके कारण गर्मी और सर्दी के मौसम में तो परेशानी नहीं आती, लेकिन बारिश होने के बाद गलियों का जलमग्न हो जाना आम है।
- श्याम लाल
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मोहल्ले में गलियों की हालत ऐसी है कि यहां कभी भी आने-जाने वाला गिरकर घायल हो सकता है। करीब तीन वर्ष पूर्व सात लाख की लागत के साथ गली में तारकोल डाली गई थी। लेकिन, उसकी गुणवत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि निर्माण के कुछ माह बाद से तारकोल जगह-जगह से उखड़ने लगी। आज हालत ऐसी है कि 60 प्रतिशत तारकोल पूरी तरह से गायब हो चुकी है।
- दलवीर कुमार
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मोहल्ले में सफाई के लिए शायद ही कभी कोई कर्मचारी आया हो। लोग अपने घरों ने निकलने वाला कचरा खुद दूर लेकर फेंकते हैं। इसी तरह जब भी नालियां बंद होती हैं तो लोग खुद ही उनकी सफाई करने के लिए मजबूर हैं। लोग नालियों से गंदगी और कचरा तो निकाल लेते हैं लेकिन उसे उठाने का कोई प्रबंध न होने पर वह वापस फिर उन्हीं नालियों में समा जाता है। जिसके कारण समस्या बनी ही रहती है।

- बलिंदर कुमार
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वार्ड के 90 प्रतिशत हिस्सों में पानी, बिजली और गली जैसी समस्याएं नहीं हैं। कुछ समय पूर्व सफाई की समस्या थी, वह भी अब नगर परिषद की ओर से ठेके के आधार लिए गए सफाई कर्मचारियों के आ जाने से समाप्त हो गई है। अस्पताल के साथ लगते मोहल्ले में कुछ समस्याएं उसके हाइवे से काफी नीचे होने के कारण हैं, जिनका समाधान करने लिए काफी फंड की जरूरत है। उम्मीद है कि वहां भी जल्द लोगों की समस्याओं का समाधान किया जा सकेगा।
- रविंद्र सिंह पठानिया, पार्षद, वार्ड 20, नगर परिषद, कठुआ
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