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जिले में घोषित कटौती के शेड्यूल हुए रद्द
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कठुआ। प्रदेश के अन्य जिलों की ही तरह कठुआ जिला भी भारी बिजली संकट से जूझ रहा है। हालात यह है कि जिले की डिमांड 220 मेगावॉट बिजली की है तो वहीं मात्र सौ मेगावॉट के लगभग ही बिजली हासिल हो पा रही है। यह सिलसिला नवरात्र के बाद से ही शुरू हो गया था। उधर, बढ़ी हुई बिजली कटौती के बीच लोगों को स्थानीय स्तर पर राहत देने का प्रयास बिजली विभाग ने किया है। इसके लिए जिले के शहरी इलाकों में होने वाली चार घंटे और ग्रामीण इलाकों में छह से सात घंटे की घोषित कटौती को रद्द कर दिया गया है।
दरअसल, पहले बिजली की अघोषित कटौती एसएलडीसी के नियंत्रण में थी, वहीं से जिला स्तर पर फीडरों की कटौती उपलब्धता अनुरूप करने के निर्देश दिए जाते थे लेकिन वर्तमान में संकट इतना बढ़ चुका है कि ग्रिड ही बंद कर दिए जा रहे हैं। ऐसे में जिला स्तर पर होने वाला नियंत्रण पूरी तरह से ठप है। ग्रिड बहाल होने के बाद घोषित कटौती लगने से लोगों का और भी बुरा हाल था, ऐसे में विभाग ने बिजली कटौती का घोषित शेड्यूल रद्द कर दिया है। विभाग के कार्यकारी अभियंता मदन लाल भगत ने बताया कि वर्तमान में 11 केवी फीडरों पर होने वाले रूटीन की शेड्यूल कटौती अगले आदेश तक रद्द कर दी गई है। पहले ही दस से बारह घंटे की बिजली कटौती हो रही है ऐसे में यह राहत देने की कोशिश है। उन्होंने बताया कि बिजली संकट नवरात्र में शुरू हुआ था। जब गर्मी की शुरूआत हुई थी। बताया कि भारत में बिजली का 70 फीसदी उत्पादन कोयले से होता है और रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते कोयले का निर्यात नहीं हो पा रहा है। जम्मू संभाग में 14 सौ मेगावॉट की मांग के विपरीत 50 फीसदी ही बिजली उपलब्ध हो पा रही है। उम्मीद है कि जल्द हालात सुधरेंगे।
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दरअसल, पहले बिजली की अघोषित कटौती एसएलडीसी के नियंत्रण में थी, वहीं से जिला स्तर पर फीडरों की कटौती उपलब्धता अनुरूप करने के निर्देश दिए जाते थे लेकिन वर्तमान में संकट इतना बढ़ चुका है कि ग्रिड ही बंद कर दिए जा रहे हैं। ऐसे में जिला स्तर पर होने वाला नियंत्रण पूरी तरह से ठप है। ग्रिड बहाल होने के बाद घोषित कटौती लगने से लोगों का और भी बुरा हाल था, ऐसे में विभाग ने बिजली कटौती का घोषित शेड्यूल रद्द कर दिया है। विभाग के कार्यकारी अभियंता मदन लाल भगत ने बताया कि वर्तमान में 11 केवी फीडरों पर होने वाले रूटीन की शेड्यूल कटौती अगले आदेश तक रद्द कर दी गई है। पहले ही दस से बारह घंटे की बिजली कटौती हो रही है ऐसे में यह राहत देने की कोशिश है। उन्होंने बताया कि बिजली संकट नवरात्र में शुरू हुआ था। जब गर्मी की शुरूआत हुई थी। बताया कि भारत में बिजली का 70 फीसदी उत्पादन कोयले से होता है और रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते कोयले का निर्यात नहीं हो पा रहा है। जम्मू संभाग में 14 सौ मेगावॉट की मांग के विपरीत 50 फीसदी ही बिजली उपलब्ध हो पा रही है। उम्मीद है कि जल्द हालात सुधरेंगे।
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