{"_id":"605a589d8ebc3edbca371e31","slug":"cultural-kathua-news-jmu231989759","type":"story","status":"publish","title_hn":"समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार को मिटाने का संकल्प लें- सुभाष शासत्री।","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार को मिटाने का संकल्प लें- सुभाष शासत्री।
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बसोहली के जंजघर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन संत सुभाष शास्त्री ने संगत को संबोधित करते हुए कहा कि भक्ति का यही प्रमाण है कि यहां इतनी संख्या में श्रद्धालु श्रीमद्भागवत कथा को सुनने के लिए पहुंचते हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी चीज में अच्छे व बुरे संस्कार होते हैं। यह धारण करने वाले पर निर्भर करता है कि वह अच्छे संस्कार ग्रहण करता है या बुरे। मनुष्य को अपने भविष्य के प्रति सजग रहना चाहिए। वर्तमान पर जिनकी पकड़ होती है, उनका भविष्य की उज्जवल होता है।
उन्होंने कहा कि इस संसार में कुछ भी स्थिर नहीं है। बचपन के बाद जवानी और उसके बाद बुढ़ापा आता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मनुष्य को धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। शास्त्री ने कहा कि जब हम आपसे धर्म अनुसार जीवन जीने का अनुरोध करते हैं तो इसमें दो बातें मुख्य हैं। पहला सभी जीव धारियों से प्रेम करें और दूसरा समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार को मिटाने का संकल्प लें। न तो घूस लेंगे और न ही घूस लेने देंगे। क्योंकि यह समाज को सबसे अधिक दूषित करता है।
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उन्होंने कहा कि किसी भी चीज में अच्छे व बुरे संस्कार होते हैं। यह धारण करने वाले पर निर्भर करता है कि वह अच्छे संस्कार ग्रहण करता है या बुरे। मनुष्य को अपने भविष्य के प्रति सजग रहना चाहिए। वर्तमान पर जिनकी पकड़ होती है, उनका भविष्य की उज्जवल होता है।
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उन्होंने कहा कि इस संसार में कुछ भी स्थिर नहीं है। बचपन के बाद जवानी और उसके बाद बुढ़ापा आता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मनुष्य को धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। शास्त्री ने कहा कि जब हम आपसे धर्म अनुसार जीवन जीने का अनुरोध करते हैं तो इसमें दो बातें मुख्य हैं। पहला सभी जीव धारियों से प्रेम करें और दूसरा समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार को मिटाने का संकल्प लें। न तो घूस लेंगे और न ही घूस लेने देंगे। क्योंकि यह समाज को सबसे अधिक दूषित करता है।
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