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निचला बेला गांव में मिला मगरमच्छ
ब्यूरो/अमर उजाला,कठुआ/सांबा/जम्मू
Updated Tue, 30 Aug 2016 01:20 AM IST
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crocodile
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रियासत में पहली बार मगरमच्छ देखे जाने की सूचना पुष्ट निकली। पिछले दिनों सांबा जिले के छन्न मलागरां गांव के तालाब में मगरमच्छ मिलने और रात के अंधेरे में उसके गायब होने के बाद से कयास लगाने का दौर जारी था। सोमवार को यहां से करीब आठ किलोमीटर दूर सांबा के निचला बेला गांव की झाड़ियों से करीब छह फुट लंबा मगरमच्छ पकड़ लिया गया।
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वन्य जीव विभाग और पुलिस टीम ने मगरमच्छ को पकड़कर पहले जसरोटा वन्यजीव अभयारण्य और फिर जम्मू के मांडा पार्क शिफ्ट कर दिया। मगरमच्छ सांबा में कैसे आया, इसकी जांच की जा रही है। सोमवार को निचला बेला गांव की झाड़ियों के पास से गुजर रहे युवक ने सबसे पहले मगरमच्छ की खबर दी। युवक के अनुसार खड्ड से करीब पचास मीटर की दूरी पर झाड़ियों में आराम करते मगरमच्छ पर उसने पत्थर समझकर पांव रख दिया।
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फुर्ती से मगरमच्छ झाड़ियों की तरफ चला गया। यह देखकर उसके होश उड़ गए। उसने इसकी सूचना गांव के लोगाें को दी जिसके बाद मामला पुलिस और वन्यजीव विभाग के संज्ञान में लाया गया। निचला बेला गांव सांबा और कठुआ की सरहद पर है। सूचना मिलने पर हीरानगर और घगवाल थाना प्रभारी अपनी टीमें लेकर पहुंच गए। वन्य जीव विभाग के अमले के पहुंचते ही तीन घंटे बाद मगरमच्छ को जाल में फंसाकर जसरोटा वन्यजीव अभयारण्य लाया गया।
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अधिकारियाें के निर्देश पर बाद में उसे जम्मू के मांडा पार्क शिफ्टकर दिया गया। वाइल्ड लाइफ वार्डन कठुआ सांबा रेंज प्रियंका सरीन ने बताया कि बेला गांव में वन्यजीव विभाग की टीम ने सुबह नौ बजे के लगभग मगरमच्छ को काबू कर लिया। छह फुट का मगरमच्छ युवावस्था में है। इसके नर या मादा होने का फिलहाल पता नहीं चल पाया है। पहले छन्न मलागरां में मगरमच्छ देखा गया था, जो बेला गांव से आठ किलोमीटर की दूरी पर है।
उसको पकड़ने के लिए आने वाली विशेष टीम के पहुंचने से पहले ही यह निकल गया था। मगरमच्छ को सोमवार दोपहर जम्मू के मांडा में शिफ्ट कर दिया गया है। जम्मू कश्मीर में मगरमच्छ देखे जाने का यह पहला मामला है संभवत यह बाढ़ में किसी दरिया से इलाके में पहुंचा होगा।
सांबा के निचला बेला गांव से पकड़ा गया मगरमच्छ अब जम्मू में ही रहेगा। वन्यजीव विभाग ने इसे फिलहाल जम्मू के मांडा डियर पार्क के डक क्लोजर (बतखों का बाड़ा) में रखा है, लेकिन जम्मू के नगरोटा में बनने जा रहे राष्ट्र्र्र स्तरीय चिड़ियाघर के तैयार होते ही इसे चिड़ियाघर में शिफ्ट कर दिया जाएगा। यह फैसला वन एवं पर्यावरण मंत्री के आदेश के बाद लिया गया।
दिलचस्प है कि जम्मू कश्मीर सहित हिमाचल प्रदेश और पंजाब में भी कहीं पर मगरमच्छ नहीं होते। सांबा में मगरमच्छ कहां से और कैसे आया, इसे लेकर वन्यजीव विभाग अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाया है। वन्य जीव विभाग के डीएफओ अमित शर्मा ने बताया कि मगरमच्छ मार्श क्रोकोडाइल प्रजाति का है, जिसका सबसे बड़ा आकार 16 फीट तक होता है। पकड़ा गया मगरमच्छ 6 फुट 4 इंच का है, जिसे सब एडल्ट श्रेणी का माना जाता है। उन्होंने बताया कि वन्यजीव विभाग पहले इसे चंडीगढ़ में शिफ्ट करने की सोच रहा था, लेकिन मंत्री द्वारा निर्देश मिलने पर इसे जम्मू में ही स्थायी रूप से रखने का निर्णय लिया गया है।
जम्मू-कश्मीर की जलवायु में मगरमच्छ को पालने के औचित्य पर उन्होंने कहा कि इस प्रजाति के मगरमच्छ बलूचिस्तान से असम तक की जलवायु में आसानी से रह सकते हैं। ऐसे में जलवायु से संबंधित कोई समस्या नहीं होगी। मगरमच्छ सांबा तक कैसे पहुंचा, इस पर उन्हाेंने कहा कि यह पाकिस्तान से भी हो सकता है, क्योंकि पाकिस्तान से कई दरियाई नाले जुड़ते हैं और मगरमच्छ धारा के विपरीत भी आसानी से तैर
सकते हैं। जमीन पर मीलों चल सकते हैं।