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Kathua News: पति-पत्नी की आपसी सहमति के बाद कोर्ट ने सुनाया तलाक का फैसला
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विवाह के साडे तीन साल बाद पति-पत्नी ने आपसी सहमति से लिया तलाक
........ वर्ष 2021 में हिंदू रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ था विवाह
अदालत से ... का लोगो लगाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिला सत्र न्यायाधीश ने पति-पत्नी की आपसी सहमति के बाद तलाक का फैसला सुनाया है। आदेश के मुताबिक पति की ओर से पत्नी को गुजारा भत्ता नहीं दिया जाएगा। क्योंकि गुजारा भत्ता सहित अन्य विवाह संबंधी खर्चे का मुद्दा दोनों याचिकाकर्ताओं के बीच पहले से ही सुलझा लिया गया है।
शालू देवी और सनी कुमार निवासी जगतपुर मढ़ीन ने 27 सितंबर 2024 को कोर्ट के समक्ष अर्जी दायर कर आपसी सहमति से विवाह को समाप्त करने की मांग की थी। कोर्ट को बताया गया कि दोनों की शादी 4 अप्रैल 2021 को कठुआ में हिंदू रीति-रिवाजों के साथ हुई थी। लेकिन दोनों के अपरिवर्तनीय मतभेदों के चलते वे लंबे समय से अलग रह रहे हैं। हालांकि दोनों परिवारों के सदस्यों के प्रयासों के बाद भी पति-पत्नी के बीच पैदा हुए मतभेद दूर नहीं हुए। जिसके बाद ही दोनों ने अलग होने का निर्णय लिया।
मामले की सुनवाई के दौरान 23 नवंबर 2024 को दोनों याचिकाकर्ताओं ने बयान दर्ज करवाए थे। कोर्ट ने पति-पत्नी के बीच सुलह की संभावना तलाशने के उद्देश्य से मामले की कार्यवाही को स्थगित कर दिया था। इसी महीने फिर से सुनवाई शुरू की गई। दोनों पक्षों ने फिर से दोहराया कि उनके पुनर्मिलन के सभी प्रयास विफल हो चुके हैं। गुजारा भत्ता और दहेज संबंधी खर्चे के मुद्दों को सुलझा लिया गया है। कोर्ट ने मामले का निपटारा करते हुए जम्मू-कश्मीर हिंदू विवाह अधिनियम 1980 की धारा 13-बी के तहत आपसी सहमति से तलाक का फैसला सुनाया।
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........ वर्ष 2021 में हिंदू रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ था विवाह
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कठुआ। जिला सत्र न्यायाधीश ने पति-पत्नी की आपसी सहमति के बाद तलाक का फैसला सुनाया है। आदेश के मुताबिक पति की ओर से पत्नी को गुजारा भत्ता नहीं दिया जाएगा। क्योंकि गुजारा भत्ता सहित अन्य विवाह संबंधी खर्चे का मुद्दा दोनों याचिकाकर्ताओं के बीच पहले से ही सुलझा लिया गया है।
शालू देवी और सनी कुमार निवासी जगतपुर मढ़ीन ने 27 सितंबर 2024 को कोर्ट के समक्ष अर्जी दायर कर आपसी सहमति से विवाह को समाप्त करने की मांग की थी। कोर्ट को बताया गया कि दोनों की शादी 4 अप्रैल 2021 को कठुआ में हिंदू रीति-रिवाजों के साथ हुई थी। लेकिन दोनों के अपरिवर्तनीय मतभेदों के चलते वे लंबे समय से अलग रह रहे हैं। हालांकि दोनों परिवारों के सदस्यों के प्रयासों के बाद भी पति-पत्नी के बीच पैदा हुए मतभेद दूर नहीं हुए। जिसके बाद ही दोनों ने अलग होने का निर्णय लिया।
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मामले की सुनवाई के दौरान 23 नवंबर 2024 को दोनों याचिकाकर्ताओं ने बयान दर्ज करवाए थे। कोर्ट ने पति-पत्नी के बीच सुलह की संभावना तलाशने के उद्देश्य से मामले की कार्यवाही को स्थगित कर दिया था। इसी महीने फिर से सुनवाई शुरू की गई। दोनों पक्षों ने फिर से दोहराया कि उनके पुनर्मिलन के सभी प्रयास विफल हो चुके हैं। गुजारा भत्ता और दहेज संबंधी खर्चे के मुद्दों को सुलझा लिया गया है। कोर्ट ने मामले का निपटारा करते हुए जम्मू-कश्मीर हिंदू विवाह अधिनियम 1980 की धारा 13-बी के तहत आपसी सहमति से तलाक का फैसला सुनाया।
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