{"_id":"684f2712349ea1272403ed6c","slug":"chhinj-fair-will-be-more-attractive-and-organized-kathua-news-c-201-1-knt1006-121074-2025-06-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kathua News: अधिक आकर्षक एवं व्यवस्थित होगा ऐतिहासिक छिंज मेला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kathua News: अधिक आकर्षक एवं व्यवस्थित होगा ऐतिहासिक छिंज मेला
Mon, 16 Jun 2025 01:33 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Mon, 16 Jun 2025 01:33 AM IST
विज्ञापन
बनी में बैठक करते पहाड़ी कलर मंच के पदाधिकारी।
बनी। पहाड़ी कल्चर मंच की विशेष बैठक रविवार को हुई, जिसमें इस वर्ष होने वाले ऐतिहासिक छिंज मेले को और अधिक आकर्षक एवं व्यवस्थित बनाने की तैयारी की गई।
बैठक के दौरान पहाड़ी कलर मंच ने स्थानीय गायक एवं कलाकारों के लिए एक अधिसूचना भी जारी की है। इसके लिए इस मेले के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने के इच्छुक स्थानीय गायक 21 जून तक पहाड़ी कल्चर मंच कार्यालय में संपर्क कर अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। इस अंतिम तिथि के बाद किसी भी नामांकन पर विचार नहीं किया जाएगा।
मंच के प्रधान सुभाष चंदर ने बताया कि मेले की योजना को लगातार बैठकों के माध्यम से निखारा जा रहा है, ताकि यह आयोजन पहले से अधिक समृद्ध, सांस्कृतिक रूप से जीवंत और दर्शकों के लिए आकर्षक बन सके।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि यह मेला पिछले 100 वर्षों से लगातार आयोजित होता आ रहा है और इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता के कारण इसमें देशभर से हजारों लोग आते हैं।
हर साल की तरह इस बार भी पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से भारी संख्या में दर्शकों के आने की संभावना है। मेले में विभिन्न प्रकार के पारंपरिक और आधुनिक स्टॉल लगाए जाते हैं, जिनमें खान-पान, हस्तशिल्प, कपड़े और स्थानीय उत्पादों की बिक्री होती है। सांस्कृतिक मंच पर लोक संगीत, पारंपरिक नृत्य विशेष रूप से कुड नृत्य जैसे आकर्षक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं।
विज्ञापन
बैठक के दौरान पहाड़ी कलर मंच ने स्थानीय गायक एवं कलाकारों के लिए एक अधिसूचना भी जारी की है। इसके लिए इस मेले के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने के इच्छुक स्थानीय गायक 21 जून तक पहाड़ी कल्चर मंच कार्यालय में संपर्क कर अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। इस अंतिम तिथि के बाद किसी भी नामांकन पर विचार नहीं किया जाएगा।
विज्ञापन
मंच के प्रधान सुभाष चंदर ने बताया कि मेले की योजना को लगातार बैठकों के माध्यम से निखारा जा रहा है, ताकि यह आयोजन पहले से अधिक समृद्ध, सांस्कृतिक रूप से जीवंत और दर्शकों के लिए आकर्षक बन सके।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि यह मेला पिछले 100 वर्षों से लगातार आयोजित होता आ रहा है और इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता के कारण इसमें देशभर से हजारों लोग आते हैं।
हर साल की तरह इस बार भी पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से भारी संख्या में दर्शकों के आने की संभावना है। मेले में विभिन्न प्रकार के पारंपरिक और आधुनिक स्टॉल लगाए जाते हैं, जिनमें खान-पान, हस्तशिल्प, कपड़े और स्थानीय उत्पादों की बिक्री होती है। सांस्कृतिक मंच पर लोक संगीत, पारंपरिक नृत्य विशेष रूप से कुड नृत्य जैसे आकर्षक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं।