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Kathua News: नवरात्र के पहले तीन दिन 1.25 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई मां के दरबार में हाजिरी
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कटड़ा। धर्मनगरी में इस बार के नवरात्र पर पहले तीन दिन में मां वैष्णो देवी के दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या ने एक लाख 25 हजार का आंकड़ा पार कर लिया है, जबकि पिछले वर्ष 2022 के शारदीय नवरात्र के पहले तीन दिन में 1.08 लाख श्रद्धालुओं ने ही दर्शन किए थे।
वर्ष 2023 के पहले तीन नवरात्र में 1.27 लाख श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे थे। इस वर्ष पहले तीन दिन की संख्या पर अगर नजर डालें तो पिछले नवरात्र के मुकाबले थोड़ी कम संख्या है। इसके साथ ही शनिवार को दोपहर बाद पर्वत पर धुंध व बादल छाए रहने के कारण हेलिकॉप्टर के सुबह कुछ उड़ानें भरने के बाद यह सेवा प्रभावित रही। इसके कारण श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ा लेकिन बैटरी कार और रोपवे सेवा जारी रही। पंजीकरण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार शनिवार विकेंड होने के कारण दोपहर तीन बजे तक 25 हजार श्रद्धालुओं का पंजीकरण हो चुका था। रात नौ बजे तक यह संख्या 45 हजार तक पहुंच गई थी, जबकि कक्ष बंद होने से कुछ समय पहले तक 40 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के पंजीकरण करवाने का अनुमान लगाया जा रहा था।
दूसरी ओर श्राइन बोर्ड के सौजन्य से भवन में भक्तों की बुनियादी सुविधाओं सहित अत्याधुनिक सुविधाओं में भी इजाफा किया हैं। विशेषतौर पर भवन में देश व विदेशी पुष्पों व फलों से भव्य सजावट की गई है, जो हर किसी का मन मोह रही है। जब से श्राइन बोर्ड का गठन हुआ है साल दर साल मों के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होती नजर आ रही है।
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नटरंग ने किया माता की कहानी का मंचन
कटड़ा। धर्मनगरी में तीसरे नवरात्र पर श्राइन बोर्ड के अध्यात्मिक केंद्र में नटरंग की ओर से माता की कहानी के मंचन में शनिवार को गर्भजून की महत्ता का मंचन आकर्ष का केंद्र रहा। नाटक में कलाकारों ने दिखाया कि किस प्रकार से जब भैरो बाबा मां वैष्णो देवी के प्रथम स्थान से कन्या रूपी मां वैष्णो देवी का पीछा कर रहे थे तो मां पहले बांण गंगा में धरती में बाण मार कर हनुमान के पानी से प्यास भुजाती हैं और पने केश धोकर आगे नौ महीने तक अर्दकुंवारी गुफा में रही। इसी कारण इस गुफा को गर्भजून के नाम से भी जाना जाता है। इस मंचन की शुरुआत परम भक्त श्रीधर के भंडारे से हुई। वहीं माता की कहानी में दर्शाया गया है कि माता महा काली, माता महा लक्ष्मी और माता महा सरस्वती एक दिन एकत्रित हुईं और उन्होंने अपनी सामूहिक तेजस या आध्यात्मिक शक्ति एकत्रित की। आज दुनिया भर में लाखों लोग माता वैष्णो देवी की पूजा करते हैं। माता वैष्णो देवी इच्छाशक्ति, शक्ति और शांति के अवतार के रूप में सामने आई हैं।
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वर्ष 2023 के पहले तीन नवरात्र में 1.27 लाख श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे थे। इस वर्ष पहले तीन दिन की संख्या पर अगर नजर डालें तो पिछले नवरात्र के मुकाबले थोड़ी कम संख्या है। इसके साथ ही शनिवार को दोपहर बाद पर्वत पर धुंध व बादल छाए रहने के कारण हेलिकॉप्टर के सुबह कुछ उड़ानें भरने के बाद यह सेवा प्रभावित रही। इसके कारण श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ा लेकिन बैटरी कार और रोपवे सेवा जारी रही। पंजीकरण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार शनिवार विकेंड होने के कारण दोपहर तीन बजे तक 25 हजार श्रद्धालुओं का पंजीकरण हो चुका था। रात नौ बजे तक यह संख्या 45 हजार तक पहुंच गई थी, जबकि कक्ष बंद होने से कुछ समय पहले तक 40 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के पंजीकरण करवाने का अनुमान लगाया जा रहा था।
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दूसरी ओर श्राइन बोर्ड के सौजन्य से भवन में भक्तों की बुनियादी सुविधाओं सहित अत्याधुनिक सुविधाओं में भी इजाफा किया हैं। विशेषतौर पर भवन में देश व विदेशी पुष्पों व फलों से भव्य सजावट की गई है, जो हर किसी का मन मोह रही है। जब से श्राइन बोर्ड का गठन हुआ है साल दर साल मों के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होती नजर आ रही है।
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नटरंग ने किया माता की कहानी का मंचन
कटड़ा। धर्मनगरी में तीसरे नवरात्र पर श्राइन बोर्ड के अध्यात्मिक केंद्र में नटरंग की ओर से माता की कहानी के मंचन में शनिवार को गर्भजून की महत्ता का मंचन आकर्ष का केंद्र रहा। नाटक में कलाकारों ने दिखाया कि किस प्रकार से जब भैरो बाबा मां वैष्णो देवी के प्रथम स्थान से कन्या रूपी मां वैष्णो देवी का पीछा कर रहे थे तो मां पहले बांण गंगा में धरती में बाण मार कर हनुमान के पानी से प्यास भुजाती हैं और पने केश धोकर आगे नौ महीने तक अर्दकुंवारी गुफा में रही। इसी कारण इस गुफा को गर्भजून के नाम से भी जाना जाता है। इस मंचन की शुरुआत परम भक्त श्रीधर के भंडारे से हुई। वहीं माता की कहानी में दर्शाया गया है कि माता महा काली, माता महा लक्ष्मी और माता महा सरस्वती एक दिन एकत्रित हुईं और उन्होंने अपनी सामूहिक तेजस या आध्यात्मिक शक्ति एकत्रित की। आज दुनिया भर में लाखों लोग माता वैष्णो देवी की पूजा करते हैं। माता वैष्णो देवी इच्छाशक्ति, शक्ति और शांति के अवतार के रूप में सामने आई हैं।