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Kathua News: जीवन मरण के बंधन से छुटकारा दिला सकता है सत्संग
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कठुआ। शहर के वार्ड 12 ठाकुरद्वारा मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन जारी है। यहां कथा व्यास आचार्य लीला किशोरी की ओर से किए जा रहे प्रवचन को सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। तीसरे दिन की कथा में उन्होंने कहा कि सच्चा सुख भौतिक वस्तुओं से नहीं, सत्संग से मिलता है, इसलिए सभी को सत्संग जरूर सुनना चाहिए। सत्संग ही व्यक्ति को जीवन मरण के बंधन से छुटकारा दिला सकता है।
कथा व्यास आचार्य लीला किशोरी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को श्री सूत जी और शनकादिक ऋषि को भागवत का उपदेश देते हुए भगवान की कथाओं का प्रसंग सुनाया। इसमें सूत जी महाराज ने हरि अनंत हरि कथा अनंता का उदाहरण देते हुए कहा कि परमात्मा की लीला को कोई पार नहीं पा सकता है। उन्होंने श्रीमद्भागवत पुराण में भगवान के 24 अवतारों का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को बताया कि इस धरती पर जब भी धर्म की हानि होती है तो उसकी स्थापना के लिए परमात्मा अवतार लेने आए हैं। भगवान संतों, ब्राह्मणों, गो माता और अपने भक्तों की रक्षा के लिए विकराल रूप धारण कर लेते हैं। जैसे भगवान ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नरसिंह का रूप धारण कर पापी हिरण्यकश्यप का वध किया। उन्होंने कहा कि भगवान को जानने के लिए हमें भागवत पुराण की कथा को जानना होगा। यह भगवान के स्वरूप का अनुभव कराने वाला और समस्त वेदों का सार है। शास्त्री जी ने कहा कि मनुष्य भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए अपना पूरा जीवन खर्च कर देता है और अंत में वह खाली हाथ इस लोक से चला जाता है। उसे परमधाम की प्राप्ति नहीं हो पाती है।
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कथा व्यास आचार्य लीला किशोरी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को श्री सूत जी और शनकादिक ऋषि को भागवत का उपदेश देते हुए भगवान की कथाओं का प्रसंग सुनाया। इसमें सूत जी महाराज ने हरि अनंत हरि कथा अनंता का उदाहरण देते हुए कहा कि परमात्मा की लीला को कोई पार नहीं पा सकता है। उन्होंने श्रीमद्भागवत पुराण में भगवान के 24 अवतारों का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को बताया कि इस धरती पर जब भी धर्म की हानि होती है तो उसकी स्थापना के लिए परमात्मा अवतार लेने आए हैं। भगवान संतों, ब्राह्मणों, गो माता और अपने भक्तों की रक्षा के लिए विकराल रूप धारण कर लेते हैं। जैसे भगवान ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नरसिंह का रूप धारण कर पापी हिरण्यकश्यप का वध किया। उन्होंने कहा कि भगवान को जानने के लिए हमें भागवत पुराण की कथा को जानना होगा। यह भगवान के स्वरूप का अनुभव कराने वाला और समस्त वेदों का सार है। शास्त्री जी ने कहा कि मनुष्य भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए अपना पूरा जीवन खर्च कर देता है और अंत में वह खाली हाथ इस लोक से चला जाता है। उसे परमधाम की प्राप्ति नहीं हो पाती है।
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