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Kathua News: वामन अवतार का प्रसंग सुनाकर भक्तों को किया भाव-विभोर
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कठुआ। शहर के पटेल नगर रामलीला मैदान में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन जारी है। शुक्रवार को जारी कथा में कथाव्यास आचार्य किशोरी लीला जी महाराज ने वामन अवतार का प्रसंग सुनाते हुए भक्तों को भाव-विभोर कर दिया। वहीं, कथा के दौरान वामन अवतार की झांकी प्रस्तुत की गई। इसके दर्शन पाकर वहां मौजूद भक्त मंत्रमुग्ध हो गए।
श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में तीसरे दिन भगवान के वामन अवतार के प्रसंग पर प्रवचन करते हुए भागवत कथा वाचक आचार्य किशोरी लीला ने बताया कि किस प्रकार राजा बलि ने अपना सर्वस्व ईश्वर को दान कर दिया। गुरु ने ईश्वर से साक्षात्कार करवाया और राजा बलि से भगवान वामन देव ने जब दो पग में ही तीन लोक माप लिया, तब तीसरे पग को उनके मस्तक पर धारण कर लिया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा सुनना और भगवान को अपने मन में बसाने से व्यक्ति के जीवन में परिवर्तन आता है। भगवान हमेशा आपने भक्त को पाना चाहता है। जितना भक्त भगवान के बिना अधूरा है, उतना ही अधूरा भगवान भी भक्त के बिना है। भगवान ज्ञानी को नहीं, अपितु भक्त को दर्शन देते हैं और सच्चे मन से ही भगवान प्राप्त होता है।
उन्होंने हिरण्यकश्यप और भक्त प्रह्लाद का प्रसंग सुनाते हुए भक्तों को बताया कि भक्त जो हमेशा भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहते थे, जबकि उनके पिता हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु को अपना शत्रु मानते थे। पुत्र को भगवान विष्णु की भक्ति करते देखकर उन्होंने उसे ही जान से मारने की ठान ली लेकिन प्रभु पर सच्ची निष्ठा और आस्था की वजह से हिरण्यकश्यप प्रह्लाद का कुछ भी अनिष्ट नहीं कर पाए।
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आचार्य किशोरी लीला जी ने बताया कि वामन अवतार के रूप में भगवान विष्णु ने राजा बलि को यह शिक्षा दी कि अहंकार से जीवन में कुछ भी हासिल नहीं होता है, इसलिए इस जीवन में परोपकार करो। उन्होंने कहा कि अहंकार, गर्व, घृणा और ईर्ष्या से मुक्त होने पर ही मनुष्य को ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। यदि हम संसार में पूरी तरह मोहग्रस्त और लिप्त रहते हुए सांसारिक जीवन जीते हैं तो हमारी सारी भक्ति एक दिखावा ही रह जाएगी।
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श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में तीसरे दिन भगवान के वामन अवतार के प्रसंग पर प्रवचन करते हुए भागवत कथा वाचक आचार्य किशोरी लीला ने बताया कि किस प्रकार राजा बलि ने अपना सर्वस्व ईश्वर को दान कर दिया। गुरु ने ईश्वर से साक्षात्कार करवाया और राजा बलि से भगवान वामन देव ने जब दो पग में ही तीन लोक माप लिया, तब तीसरे पग को उनके मस्तक पर धारण कर लिया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा सुनना और भगवान को अपने मन में बसाने से व्यक्ति के जीवन में परिवर्तन आता है। भगवान हमेशा आपने भक्त को पाना चाहता है। जितना भक्त भगवान के बिना अधूरा है, उतना ही अधूरा भगवान भी भक्त के बिना है। भगवान ज्ञानी को नहीं, अपितु भक्त को दर्शन देते हैं और सच्चे मन से ही भगवान प्राप्त होता है।
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उन्होंने हिरण्यकश्यप और भक्त प्रह्लाद का प्रसंग सुनाते हुए भक्तों को बताया कि भक्त जो हमेशा भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहते थे, जबकि उनके पिता हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु को अपना शत्रु मानते थे। पुत्र को भगवान विष्णु की भक्ति करते देखकर उन्होंने उसे ही जान से मारने की ठान ली लेकिन प्रभु पर सच्ची निष्ठा और आस्था की वजह से हिरण्यकश्यप प्रह्लाद का कुछ भी अनिष्ट नहीं कर पाए।
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आचार्य किशोरी लीला जी ने बताया कि वामन अवतार के रूप में भगवान विष्णु ने राजा बलि को यह शिक्षा दी कि अहंकार से जीवन में कुछ भी हासिल नहीं होता है, इसलिए इस जीवन में परोपकार करो। उन्होंने कहा कि अहंकार, गर्व, घृणा और ईर्ष्या से मुक्त होने पर ही मनुष्य को ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। यदि हम संसार में पूरी तरह मोहग्रस्त और लिप्त रहते हुए सांसारिक जीवन जीते हैं तो हमारी सारी भक्ति एक दिखावा ही रह जाएगी।