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Kathua News: ई-रिक्शा के खिलाफ मिनी बस ऑपरेटरों ने रोका परिचालन
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कठुआ। जिले में लगातार बढ़ रहे ई-रिक्शा से मिनी बस ऑपरेटरों और ई-रिक्शा चालकों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को कठुआ-नन्नन रूट पर चलने वाली मिनी बसों का उनके ऑपरेटरों ने संचालन ठप कर दिया और इस मामले में ई-रिक्शा का संचालन उनके रूटों से बंद किए जाने की मांग की। वहीं, मिनी बसों का संचालन बंद होने की सूचना मिलने के बाद बुद्धि पहुंचे आरटीओ केवल कृष्ण ने मिनी बस ऑपरेटरों से बात कर उन्हें शांत करवाया और जल्द इस मामले में कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दिया। जिसके बाद मिनी बसों का संचालन शुरू हो पाया।
इस मौके पर बस ऑपरेटरों की समस्या साझा करते हुए बृजनंदन सिंह ने कहा कि पहले कठुआ शहर में ई-रिक्शा चल रहे थे लेकिन अब तो कई ऐसा रूट नहीं है, जहां ई-रिक्शा मौजूद न हों। इससे मिनी बस ऑपरेटरों को लगातार नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि गत एक मई को भी उन्होंने इसी समस्या के चलते मिनी बसों का संचालन बंद कर अपनी मांगों का ज्ञापन एडीसी कठुआ रंजीत सिंह को दिया था। तब उन्हें आश्वासन दिया गया कि दो दिनों में उनकी समस्या का समाधान किया जाएगा। लेकिन आज तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मजबूर होकर उन्हें आज फिर कड़ा कदम उठाना पड़ा है।
उन्होंने बताया कि मिनी बस के दिन भर चलाने के बाद अब हालात ऐसे हो गए हैं कि कई बार मिनी बस के चालक और कंडक्डर की तनख्वाह भी निकाल पाना मुश्किल हो जाता है। बैंक से लिए गए लाखों कर्ज से ली गई मिनी बसों के ऑपरेटरों को अगर इसी तरह का नुकसान होता रहा तो आने वाले दिनों में वे इस कर्ज के नीचे दब कर रह जाएंगे। लिहाजा अगर ई-रिक्शा को लगाम नहीं लगाई गई तो वे सभी रूट पर चलने वाली मिनी बसों को बंद करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
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इस मौके पर बस ऑपरेटरों की समस्या साझा करते हुए बृजनंदन सिंह ने कहा कि पहले कठुआ शहर में ई-रिक्शा चल रहे थे लेकिन अब तो कई ऐसा रूट नहीं है, जहां ई-रिक्शा मौजूद न हों। इससे मिनी बस ऑपरेटरों को लगातार नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि गत एक मई को भी उन्होंने इसी समस्या के चलते मिनी बसों का संचालन बंद कर अपनी मांगों का ज्ञापन एडीसी कठुआ रंजीत सिंह को दिया था। तब उन्हें आश्वासन दिया गया कि दो दिनों में उनकी समस्या का समाधान किया जाएगा। लेकिन आज तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मजबूर होकर उन्हें आज फिर कड़ा कदम उठाना पड़ा है।
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उन्होंने बताया कि मिनी बस के दिन भर चलाने के बाद अब हालात ऐसे हो गए हैं कि कई बार मिनी बस के चालक और कंडक्डर की तनख्वाह भी निकाल पाना मुश्किल हो जाता है। बैंक से लिए गए लाखों कर्ज से ली गई मिनी बसों के ऑपरेटरों को अगर इसी तरह का नुकसान होता रहा तो आने वाले दिनों में वे इस कर्ज के नीचे दब कर रह जाएंगे। लिहाजा अगर ई-रिक्शा को लगाम नहीं लगाई गई तो वे सभी रूट पर चलने वाली मिनी बसों को बंद करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
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