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Kathua News: बिल्केश्वर महादेव मंदिर का पांडवों ने अज्ञात वास में किया था निर्माण

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Bilkeshwar Mahadev Temple
बिल्केश्वर महादेव मंदिर बिलावर
... छह महीने की एक रात में हुआ था निर्माण
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। पांडवों की ओर से निर्मित बिल्केश्वर महादेव मंदिर में हर रोज बड़ी संख्या में शिवभक्त पहुंचते हैं। मान्यता है कि भगवान शिव की प्राचीन पिंडी की स्थापना भगवान कृष्ण ने तब करवाई थी जब पांडवों ने अज्ञातवास के अंतिम चरण में बिल्केश्वर महादेव मंदिर का निर्माण किया था। जिसे हरिहरा के रूप में भी जाना जाता है।
मान्यता के अनुसार बिल्केश्वर महादेव का निर्माण पांच हजार साल पहले पांडवों ने अपने अज्ञातवास के समय में किया था। दंतकथा के अनुसार जब बिल्केश्वर महादेव मंदिर बिलावर का पांडव निर्माण कर रहे थे, उसी समय हनुमान जी बिलावर में गंगा को लाने में लगे हुए थे। तब छह महीने की अवधि की एक रात हुई थी। इसका पता तब चला था, जब सरसों का तेल निकालने के लिए तेली ने छह महीने के स्टाॅक को एक ही रात में निचोड़ दिया। इसी दौरान मंदिर का निर्माण भी पूरा हो गया। कठुआ जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर की दूरी पर बिल्केश्वर महादेव मंदिर है, जो जम्मू से करीब 120 किलोमीटर दूर है। मंदिर में भगवान शिव पिंडी रूप में विराजमान हैं।
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कहते हैं कि बिलावर में बेल का जंगल सबसे अधिक हुआ करता था। इसके बीच मंदिर होने के कारण इसे बिल्केश्वर नाम दिया गया है। बिलावर के ऐतिहासिक धरोहर की देखरेख भारतीय पुरातत्व निर्माण विभाग करता है। मंदिर नागर शैली से निर्मित किया गया है। पुरातत्व विभाग ने यह निष्कर्ष निकाला है कि यह मंदिर 10वीं शताब्दी में बनाया गया था।
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किंवदंती यह भी है कि इस मंदिर का निर्माण अर्जुन के पुत्र बभ्रुवाहन द्वारा किया गया था। कहा जाता है कि यह स्थान प्राचीन समय में बेल (बिल्वा) के पेड़ों से भरे घने जंगल का था। पांडव जो वहां से गुजर रहे थे, उन्होंने महसूस किया कि यह एक पवित्र स्थान है और उन्होंने अपने निर्वासन के अंतिम दिनों को तप (व्रत और तपस्या) में भगवान महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए बिताने का निर्णय लिया। भगवान शिव का मंदिर उसी स्थान पर बनाया गया है जहां पांडव भगवान महादेव की पूजा करते थे।
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