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Kathua News: बसोहली उत्सव 2026 का भव्य आगाज, कला, संस्कृति और परंपरा के रंगों से सजा ऐतिहासिक किला
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ/बसोहली। ऐतिहासिक नगर बसोहली में सोमवार को तीन दिवसीय बसोहली उत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। बसोहली किले में आयोजित उद्घाटन समारोह में विधायक ठाकुर दर्शन सिंह तथा विधायक बनी रामेश्वर सिंह मुख्य रूप से मौजूद रहे। बसोहली की मिट्टी में कला है, परंपरा में प्राण है, इसी संस्कृति को सहेजने का नाम है बसोहली उत्सव थीम पर आधारित इस सांस्कृतिक महोत्सव के पहले ही दिन हजारों लोगों की भागीदारी ने आयोजन को यादगार बना दिया।
उत्सव की शुरुआत सुबह जम्मू से निकाली गई भव्य बाइक रैली के साथ हुई, जिसमें युवाओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। यह रैली बसोहली पहुंचकर संपन्न हुई। बाइकर्स का कठुआ में भी स्वागत किया गया। इसके बाद ऐतिहासिक किले में एआई और युवाओं का भविष्य विषय पर विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई। चर्चा में आईआईटी और आईआईएम से जुड़े विशेषज्ञों ने युवाओं को उभरती तकनीकों, नवाचार और रोजगार की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी। इसी दौरान आयोजित यूथ पार्लियामेंट में क्षेत्र के युवाओं ने बसोहली के विकास, पर्यटन और रोजगार से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। दोपहर बाद आयोजित अंतर-पंचायत रस्साकशी प्रतियोगिता आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। विभिन्न पंचायतों की टीमों के बीच हुए रोमांचक मुकाबलों का दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया। वहीं रात के समय सांस्कृतिक संध्या के दौरान माता वैष्णो देवी की महिमा पर आधारित जस्मा (नाट्य प्रस्तुति) ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस वर्ष के उत्सव की एक विशेष आकर्षण देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे ख्यातिप्राप्त कार्टूनिस्ट हैं। प्रशासन के अनुसार छत्तीसगढ़ के अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्टूनिस्ट सागर कुमार सहित कई कलाकार स्वच्छ भारत, नशा मुक्ति और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों पर लाइव कार्टून बनाकर कला और जनसंदेश का अनूठा संगम प्रस्तुत करेंगे। आगामी कार्यक्रमों के बारे में जानकारी देते हुए आयोजकों ने बताया कि 20 अक्टूबर को मैराथन, गीत गोविंद पर साहित्यिक संगोष्ठी, देवी परंपरा पर विशेष चर्चा तथा रावी आरती का आयोजन किया जाएगा। वहीं 21 अक्टूबर को पारंपरिक खेल संतोलिया, महाआरती और भव्य समापन समारोह आयोजित होगा। उत्सव का मुख्य उद्देश्य विश्व प्रसिद्ध बसोहली लघु चित्रकला, रामलीला, पश्मीना कला और समृद्ध डोगरा सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाना है। इसके साथ ही स्थानीय कारीगरों, कलाकारों और होमस्टे संचालकों को पर्यटन आधारित रोजगार और आर्थिक अवसरों से जोड़ना भी इस महोत्सव का प्रमुख लक्ष्य है। इस अवसर पर उपायुक्त कठुआ राजेश शर्मा ने कहा कि बसोहली उत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की गौरवशाली विरासत, लोक कला और सामुदायिक एकता का उत्सव है। उन्होंने लोगों से बड़ी संख्या में उत्सव में शामिल होकर अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का आह्वान किया। जिला प्रशासन ने क्षेत्रवासियों और पर्यटकों को बसोहली की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का साक्षी बनने की अपील की है।
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इनसेट-- -
रावी आरती बनी आकर्षण
-- बसोहली उत्सव का चौथे संस्करण रावी की महाआरती का आयोजन किया गया। रावी दरिया की आरती के इस दिव्य कार्यक्रम में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। शंख, घंटियों और वैदिक मंत्रों के उच्चारण से माहौल पूरी तरह आघ्यात्मिक हो गया। वहीं विभिन्न गांव से आई धार्मिक यात्राएं भी आकर्षण का केंद्र बनीं।
वैदिक काल में इरावती और परुष्णी के नाम से जानी जाने वाली रावी नदी का महाभारत और ऋग्वेद में देव नदी के रूप में वर्णन है। हिमाचल से निकलकर बसोहली होते हुए पाकिस्तान में चिनाब से मिलने वाली यह नदी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। आयोजकों के अनुसार वैदिक युग से बसोहली उत्सव तक रावी ने पवित्र धारा का सफर किया है। इसी को नमन करने के लिए लोगों का समूह उमड़ा है। आरती के दौरान अटल सेतु को दीपों से सजाया गया और शंख, घंटियों व वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच श्रद्धालुओं ने रावी को मातृ स्वरूपा मानकर जल में पुष्प अर्पित किए।
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कठुआ/बसोहली। ऐतिहासिक नगर बसोहली में सोमवार को तीन दिवसीय बसोहली उत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। बसोहली किले में आयोजित उद्घाटन समारोह में विधायक ठाकुर दर्शन सिंह तथा विधायक बनी रामेश्वर सिंह मुख्य रूप से मौजूद रहे। बसोहली की मिट्टी में कला है, परंपरा में प्राण है, इसी संस्कृति को सहेजने का नाम है बसोहली उत्सव थीम पर आधारित इस सांस्कृतिक महोत्सव के पहले ही दिन हजारों लोगों की भागीदारी ने आयोजन को यादगार बना दिया।
उत्सव की शुरुआत सुबह जम्मू से निकाली गई भव्य बाइक रैली के साथ हुई, जिसमें युवाओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। यह रैली बसोहली पहुंचकर संपन्न हुई। बाइकर्स का कठुआ में भी स्वागत किया गया। इसके बाद ऐतिहासिक किले में एआई और युवाओं का भविष्य विषय पर विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई। चर्चा में आईआईटी और आईआईएम से जुड़े विशेषज्ञों ने युवाओं को उभरती तकनीकों, नवाचार और रोजगार की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी। इसी दौरान आयोजित यूथ पार्लियामेंट में क्षेत्र के युवाओं ने बसोहली के विकास, पर्यटन और रोजगार से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। दोपहर बाद आयोजित अंतर-पंचायत रस्साकशी प्रतियोगिता आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। विभिन्न पंचायतों की टीमों के बीच हुए रोमांचक मुकाबलों का दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया। वहीं रात के समय सांस्कृतिक संध्या के दौरान माता वैष्णो देवी की महिमा पर आधारित जस्मा (नाट्य प्रस्तुति) ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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इस वर्ष के उत्सव की एक विशेष आकर्षण देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे ख्यातिप्राप्त कार्टूनिस्ट हैं। प्रशासन के अनुसार छत्तीसगढ़ के अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्टूनिस्ट सागर कुमार सहित कई कलाकार स्वच्छ भारत, नशा मुक्ति और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों पर लाइव कार्टून बनाकर कला और जनसंदेश का अनूठा संगम प्रस्तुत करेंगे। आगामी कार्यक्रमों के बारे में जानकारी देते हुए आयोजकों ने बताया कि 20 अक्टूबर को मैराथन, गीत गोविंद पर साहित्यिक संगोष्ठी, देवी परंपरा पर विशेष चर्चा तथा रावी आरती का आयोजन किया जाएगा। वहीं 21 अक्टूबर को पारंपरिक खेल संतोलिया, महाआरती और भव्य समापन समारोह आयोजित होगा। उत्सव का मुख्य उद्देश्य विश्व प्रसिद्ध बसोहली लघु चित्रकला, रामलीला, पश्मीना कला और समृद्ध डोगरा सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाना है। इसके साथ ही स्थानीय कारीगरों, कलाकारों और होमस्टे संचालकों को पर्यटन आधारित रोजगार और आर्थिक अवसरों से जोड़ना भी इस महोत्सव का प्रमुख लक्ष्य है। इस अवसर पर उपायुक्त कठुआ राजेश शर्मा ने कहा कि बसोहली उत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की गौरवशाली विरासत, लोक कला और सामुदायिक एकता का उत्सव है। उन्होंने लोगों से बड़ी संख्या में उत्सव में शामिल होकर अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का आह्वान किया। जिला प्रशासन ने क्षेत्रवासियों और पर्यटकों को बसोहली की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का साक्षी बनने की अपील की है।
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रावी आरती बनी आकर्षण
वैदिक काल में इरावती और परुष्णी के नाम से जानी जाने वाली रावी नदी का महाभारत और ऋग्वेद में देव नदी के रूप में वर्णन है। हिमाचल से निकलकर बसोहली होते हुए पाकिस्तान में चिनाब से मिलने वाली यह नदी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। आयोजकों के अनुसार वैदिक युग से बसोहली उत्सव तक रावी ने पवित्र धारा का सफर किया है। इसी को नमन करने के लिए लोगों का समूह उमड़ा है। आरती के दौरान अटल सेतु को दीपों से सजाया गया और शंख, घंटियों व वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच श्रद्धालुओं ने रावी को मातृ स्वरूपा मानकर जल में पुष्प अर्पित किए।