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ऑटो चालकों ने आरटीओं के खिलाफ किया प्रदर्शन
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जिला परिवहन अधिकारी के खिलाफ प्रदर्शन करते आटो चालक। संवाद
- फोटो : KATHUA
कठुआ। शहर की सड़कों पर चलने वाले ई-रिक्शा के कारण हो रहे आर्थिक नुकसान से गुस्साए आटो चालकों ने कड़ा रोष जताया है। बुधवार दर्जनों आटो चालकों ने उनकी परेशानी के लिए परिवहन विभाग को जिम्मेदार ठहराते हुए जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि व्यवसायिक इस्तेमाल में आने वाले ई-रिक्शा के लिए अगर विभाग ने कोई मानक नहीं तय किए तो वह लोग भी सड़क पर चलने के लिए दस्तावेज के नाम पर सरकार को भुगतान किए जाने वाले राजस्व को बंद कर देंगे।
प्रदर्शनकारियों में शामिल विजय कुमार ने कहा कि शहर की सड़क पर ऑटो चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले ऑटो चालकों का बढ़ते ई-रिक्शा के कारण अब गुजारा भी चलाना मुश्किल हो गया। उन्होंने कहा कि लाखों की लागत से खरीदे गए उनके आटो को सड़क पर चलने के लिए इंश्योरेंस, फिटनेस, रूट परमिट, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट जैसी दस्तावेजी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए प्रति वर्ष 50 से 60 हजार रुपया खर्च करना पड़ता है। जबकि इसकी आधी कीमत देकर ई-रिक्शा लेने वाले लोग शोरूम से निकलते ही सवारियों को ढोना शुरू कर दे रहे हैं। इनके लिए रजिस्ट्रेशन तक जरूरी नहीं समझा जा रहा है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि इन ई-रिक्शा के लिए कोई रूट भी नहीं निर्धारित किया गया। इससे कड़ी मेहनत करते हुए दिनभर ऑटो चलाने वालों का गुजारा भी नहीं हो पा रहा है।
वहीं प्रदर्शन में शामिल शाम लाल ने कहा कि परिवहन विभाग की सभी दस्तावेजी प्रक्रिया को पूरी करने के बाद उन्हें निर्धारित रूट पर ही चलना होता है। जबकि बिना किसी दस्तावेज के चलने वाले ई-रिक्शा का कोई रूट नहीं है। उन्हें जहां मर्जी की सवारी मिले वह उसी ओर चल देते हैं। मात्र बीस से तीस रुपये के खर्च पर दिन भर चलने वाले इन ई-रिक्शा के कारण उनका धंधा मंदा होता जा रहा है। वहीं इन ई-रिक्शा में दस्तावेज न होने के कारण यात्रियों की सुरक्षा भी प्रभावित होती है। इस ओर ध्यान नही दिया जा रहा है। इससे शहर के विभिन्न रूटों पर चलने वाले लगभग 150 ऑटो पर आश्रित परिवार प्रभावित हो रहे है।
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उन्होंने कहा कि इस बारे में उन्होंने आरटीओ से मिलकर समस्या का समाधान करने की मांग की तो जवाब में समाधान करने के बजाए, उन्हें भी ई-रिक्शा खरीदने की सलाह देकर लौटा दिया गया। उन्होंने डीसी कठुआ से समस्या का समाधान करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि अगर इस बारे में कुछ किया नहीं गया तो वह लोग भी दस्तावेज बनवाने के नाम पर सरकार को राजस्व देना बंद कर देंगे। प्रदर्शन में पिंटू कुमार, अजय शर्मा, बोध राज, महिंदर मजोत्रा, विकास, सोनू राजपूत आदि शामिल रहे।
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प्रदर्शनकारियों में शामिल विजय कुमार ने कहा कि शहर की सड़क पर ऑटो चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले ऑटो चालकों का बढ़ते ई-रिक्शा के कारण अब गुजारा भी चलाना मुश्किल हो गया। उन्होंने कहा कि लाखों की लागत से खरीदे गए उनके आटो को सड़क पर चलने के लिए इंश्योरेंस, फिटनेस, रूट परमिट, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट जैसी दस्तावेजी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए प्रति वर्ष 50 से 60 हजार रुपया खर्च करना पड़ता है। जबकि इसकी आधी कीमत देकर ई-रिक्शा लेने वाले लोग शोरूम से निकलते ही सवारियों को ढोना शुरू कर दे रहे हैं। इनके लिए रजिस्ट्रेशन तक जरूरी नहीं समझा जा रहा है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि इन ई-रिक्शा के लिए कोई रूट भी नहीं निर्धारित किया गया। इससे कड़ी मेहनत करते हुए दिनभर ऑटो चलाने वालों का गुजारा भी नहीं हो पा रहा है।
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वहीं प्रदर्शन में शामिल शाम लाल ने कहा कि परिवहन विभाग की सभी दस्तावेजी प्रक्रिया को पूरी करने के बाद उन्हें निर्धारित रूट पर ही चलना होता है। जबकि बिना किसी दस्तावेज के चलने वाले ई-रिक्शा का कोई रूट नहीं है। उन्हें जहां मर्जी की सवारी मिले वह उसी ओर चल देते हैं। मात्र बीस से तीस रुपये के खर्च पर दिन भर चलने वाले इन ई-रिक्शा के कारण उनका धंधा मंदा होता जा रहा है। वहीं इन ई-रिक्शा में दस्तावेज न होने के कारण यात्रियों की सुरक्षा भी प्रभावित होती है। इस ओर ध्यान नही दिया जा रहा है। इससे शहर के विभिन्न रूटों पर चलने वाले लगभग 150 ऑटो पर आश्रित परिवार प्रभावित हो रहे है।
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उन्होंने कहा कि इस बारे में उन्होंने आरटीओ से मिलकर समस्या का समाधान करने की मांग की तो जवाब में समाधान करने के बजाए, उन्हें भी ई-रिक्शा खरीदने की सलाह देकर लौटा दिया गया। उन्होंने डीसी कठुआ से समस्या का समाधान करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि अगर इस बारे में कुछ किया नहीं गया तो वह लोग भी दस्तावेज बनवाने के नाम पर सरकार को राजस्व देना बंद कर देंगे। प्रदर्शन में पिंटू कुमार, अजय शर्मा, बोध राज, महिंदर मजोत्रा, विकास, सोनू राजपूत आदि शामिल रहे।