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Kathua News: कृषि में उत्कृष्टता के लिए अरुण को मिला नवोन्मेषी किसान पुरस्कार

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Arun Sharma of Kathua Got National Award
-लगभग एक दशक से बड़े पैमाने पर मशरूम का कर रहे हैं उत्पादन
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईएआरआई) ने कठुआ जिले के अरुण शर्मा को नवोन्मेषी किसान पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया है। यह पुरस्कार उन्हें दिल्ली में आयोजित कृषि विज्ञान मेले में प्रदान किया गया। अरुण को यह राष्ट्रीय पुरस्कार कृषि के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया है।
बता दें कि वह जहां पिछले लगभग एक दशक से बड़े पैमाने पर मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं वहीं अब अन्य लोगों को प्रेरित करने और उनकी सुविधा के लिए पाश्चुरिकृत मशरूम खाद तैयार करने का काम भी बड़े पैमाने पर कर रहे हैं। दिल्ली में आयोजित मेले के दौरान देशभर से 34 नवोन्मेषी किसानों को पुरस्कार दिया गया जिसमें जम्मू-कश्मीर से केवल कठुआ के अरुण शर्मा शामिल रहे। कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से उन्नत किसानों ने मुलाकात भी की। मेले के दौरान अरुण ने अपने नवोन्मेषी कार्यों और अनुभवों को अन्य किसानों के साथ साझा किया।
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एमबीए कर मशरूम की खेती चुनी, आज सालाना 65 लाख रुपये कमा रहे

अरुण शर्मा ने मशरूम की खेती में अपनी मेहनत और नवाचार से नई पहचान बनाई है। एमबीए की डिग्री प्राप्त करने के बाद उन्होंने नौकरी के बजाय मशरूम की खेती को चुना। आज वह सालाना 65 लाख रुपये का कारोबार कर रहे हैं। अरुण ने बताया कि उन्होंने मशरूम की खेती घर के एक छोटे से कमरे से शुरू की। उनके पास न तो ज्यादा पूंजी थी और न ही बड़ी जगह, लेकिन उन्होंने अपने सीमित संसाधनों का बेहतर उपयोग किया। शुरुआत में उन्होंने सिर्फ 100 मशरूम बैग खरीदे, जिन पर कुल नौ हजार रुपये खर्च हुआ। उनकी पहली फसल दो महीने बाद तैयार हुई और उन्हें 16,000 रुपये की पहली कमाई हुई।
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2019 में मशरूम खाद का उत्पादन शुरू किया
इस पहली सफलता ने अरुण को अपने कारोबार का विस्तार करने की प्रेरणा दी। 2015 में अरुण ने बैंक से सात लाख रुपये का कर्ज लिया और अपनी बचत से तीन लाख रुपये मिलाकर मशरूम उत्पादन के लिए एक प्रोफेशनल सेटअप तैयार किया। घर के पास एक हजार वर्ग फुट जगह पर मशरूम उत्पादन यूनिट बनाया और 1.5 टन के दो एसी लगाए ताकि किसी भी मौसम में मशरूम की खेती की जा सके। इसके बाद बाजार की मांग को देखते हुए 2019 में मशरूम खाद का भी उत्पादन शुरू किया। वर्तमान में वह सालाना 25 से 30 टन मशरूम और 500 टन पाश्चुरिकृत खाद तैयार कर रहे हैं।
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