खरीफ के बाद रबी पर भी दहशत का साया
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कठुआ (ब्यूरो)। भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर तनावपूर्ण हालात ने स्थानीय ग्रामीणों को फिर दहशत के साए तले लाकर खड़ा कर दिया है।
हीरानगर सब डिवीजन के दर्जनों गांव तो बिलकुल जीरो लाइन से सटे हुए हैं। ऐसे में पुंछ और अरनिया में पाकिस्तान की गोलाबारी की दहशत सीमा से सटे इलाकों में पसर गई है।
सहमे ग्रामीणों के लिए घरों से बाहर निकलकर सहजता से आवाजाही करना भी मुश्किल हो गया है। सबसे ज्यादा परेशान किसान हैं जिन्हें पाकिस्तानी गोलीबारी की आशंका के बीच तारबंदी के उस पर खेतों में जाने से परहेज करना पड़ रहा है।
दरअसल सीजफायर उल्लंघन की घटना किसी भी इलाके में हो पर उसका असर सीमावर्ती ग्रामीणों पर पड़ता है। सुरक्षा तंत्र की सख्ती बढ़ जाती है और गोलीबारी की आशंकाओं से दहशत हावी हो जाती है।
भारत पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा से बिल्कुल सटे बोबिया, करोल माथरेयां, पहाड़पुर, मनियारी, रठुआ और पानसर जैसे गांवों में एक तरफ ग्रामीणों में रोेष है तो दूसरी तरफ दहशत भी है।
बॉर्डर यूनियन के पदाधिकारी भारत भूषण और नानक चंद के अनुसार तारबंदी के उस पार 20 हजार कनाल से अधिक कृषि भूमि है। बड़ी संख्या में ऐसे कुनबे भी हैं जिनकी सारी भूमि तारबंदी के उस पार है।
खरीफ सीजन में तनावपूर्ण हालात की वजह से खेती नहीं हो सकी। ऐसे में किसान रबी सीजन की तैयारी के लिए सोच रहे थे लेकिन सीजफायर उल्लंघन की बढ़ी घटनाओं ने ग्रामीणों को सहमा दिया है।
यूनियन पदाधिकारियों के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय सीमा के हालात बेहद संवेदनशील रहते हैं और किसी भी समय फायरिंग शुरू होने का डर रहता है। ऐसे हालात में प्रशासन और सरकार को सीमावर्ती ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए स्थाई व्यवस्था करनी चाहिए।