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विज्ञान प्रदर्शनी में बच्चों के मॉडलों की हुई जांच
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कठुआ। भारत सरकार की इंस्पायर योजना के तहत बुधवार को गवर्नमेंट मिडिल स्कूल चक शेखां में डाइट बसोहली में विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में जिला कठुआ और सांबा के विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया और अपनी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न मॉडल प्रदर्शित किए। मुख्य अतिथि के तौर पर मुख्य शिक्षा अधिकारी बिशन सिंह उपस्थित रहे। उन्होंने मॉडल्स की जांच की।
मुख्य शिक्षा अधिकारी ने बताया कि हर वर्ष भारत सरकार की योजना इंस्पायर के तहत इस प्रदर्शनी का आयोजन किया जाता है, जिसमें बच्चों को विज्ञान विषय पर मॉडल बनाने होते हैं। उन्होंने बताया कि हर वर्ष जिला से डेढ़ सौ के करीब मॉडल्स की सूची पंजीकृत दिल्ली में की जाती है। इसके बाद चयनित विषय पर मॉडलों को इस प्रदर्शनी में दर्शाया जाता है। उन्हें बताया कि इस साल जिला कठुआ से 48 और जिला सांबा से 12 स्कूलों ने हिस्सा लिया है। उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शनी के माध्यम से बच्चे अपने नए-नए विचारों को मॉडल्स के द्वारा प्रदर्शित करते हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष भी बच्चों ने वाटर मैनेजमेंट, सॉइल मैनेजमेंट, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, फ्लड मैनेजमेंट, कंपोस्ट खाद, सोलर एनर्जी, विंड एनर्जी जैसे विषयों पर मॉडल्स बनाए हैं। जहां से चयनित होने वाले माडलस को संभाग स्तर पर जाने का मौका मिलेगा।
मॉडल्स में नयापन गायब दिखा
दो जिलों की इस विज्ञान प्रदर्शनी में इस बार कुछ नया देखने को नहीं मिला। कुल साठ मॉडलों में करीब-करीब सब मॉडल की एक जैसे ही थीम थी। जिसे केवल सब टाइटल के हिसाब से अलग अलग किया गया था। बच्चों ने वायु प्रदूषण, वाटर मैनेजमेंट, कंपोस्ट खाद, सोलर एनर्जी, विंड एनर्जी विषयों पर माडल बनाए थे। कुछ माडलों अलार्म को भी दर्शाया गया। इस संबंध में जब आयोजकों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि बच्चों के विचारों पर कोई रोक नहीं लगाई जा सकती है। माडलों का विषय दिल्ली से चयनित होता है। विषयों में एक जैसे थीम के सवाल पर उन्होंने कन्नी काट ली। गौरतलब है कि हर वर्ष इस योजना के तहत राशि भी आती है जो बच्चों को मिलती है। लेकिन व्यवहारिक शिक्षा और प्रायोगिक शिक्षा के सिद्धांत को हर बार एक जैसे मॉडलों से कैसे पूरा किया जा सकता है।
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रटा रटाया जवाब
माडलों की जांच के दौरान जब निर्णायक मंडल के सदस्यों ने बच्चों से उनके मॉडल पर सवाल पूछे तो उनको रटा-रटाया जवाब मिला। ज्यादा सवाल पर बच्चे चुप्पी साध गए। ऐसा लगा जैसे बच्चों को मॉडल बनाकर दे दिए गए और जवाब भी रटवा दिया गया।
मुख्य शिक्षा अधिकारी ने बताया कि हर वर्ष भारत सरकार की योजना इंस्पायर के तहत इस प्रदर्शनी का आयोजन किया जाता है, जिसमें बच्चों को विज्ञान विषय पर मॉडल बनाने होते हैं। उन्होंने बताया कि हर वर्ष जिला से डेढ़ सौ के करीब मॉडल्स की सूची पंजीकृत दिल्ली में की जाती है। इसके बाद चयनित विषय पर मॉडलों को इस प्रदर्शनी में दर्शाया जाता है। उन्हें बताया कि इस साल जिला कठुआ से 48 और जिला सांबा से 12 स्कूलों ने हिस्सा लिया है। उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शनी के माध्यम से बच्चे अपने नए-नए विचारों को मॉडल्स के द्वारा प्रदर्शित करते हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष भी बच्चों ने वाटर मैनेजमेंट, सॉइल मैनेजमेंट, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, फ्लड मैनेजमेंट, कंपोस्ट खाद, सोलर एनर्जी, विंड एनर्जी जैसे विषयों पर मॉडल्स बनाए हैं। जहां से चयनित होने वाले माडलस को संभाग स्तर पर जाने का मौका मिलेगा।
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मॉडल्स में नयापन गायब दिखा
दो जिलों की इस विज्ञान प्रदर्शनी में इस बार कुछ नया देखने को नहीं मिला। कुल साठ मॉडलों में करीब-करीब सब मॉडल की एक जैसे ही थीम थी। जिसे केवल सब टाइटल के हिसाब से अलग अलग किया गया था। बच्चों ने वायु प्रदूषण, वाटर मैनेजमेंट, कंपोस्ट खाद, सोलर एनर्जी, विंड एनर्जी विषयों पर माडल बनाए थे। कुछ माडलों अलार्म को भी दर्शाया गया। इस संबंध में जब आयोजकों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि बच्चों के विचारों पर कोई रोक नहीं लगाई जा सकती है। माडलों का विषय दिल्ली से चयनित होता है। विषयों में एक जैसे थीम के सवाल पर उन्होंने कन्नी काट ली। गौरतलब है कि हर वर्ष इस योजना के तहत राशि भी आती है जो बच्चों को मिलती है। लेकिन व्यवहारिक शिक्षा और प्रायोगिक शिक्षा के सिद्धांत को हर बार एक जैसे मॉडलों से कैसे पूरा किया जा सकता है।
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रटा रटाया जवाब
माडलों की जांच के दौरान जब निर्णायक मंडल के सदस्यों ने बच्चों से उनके मॉडल पर सवाल पूछे तो उनको रटा-रटाया जवाब मिला। ज्यादा सवाल पर बच्चे चुप्पी साध गए। ऐसा लगा जैसे बच्चों को मॉडल बनाकर दे दिए गए और जवाब भी रटवा दिया गया।