जम्मू-कश्मीर: नई शिक्षा नीति का धीरे-धीरे प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में हो रहा प्रचार
केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू में जम्मू -कश्मीर और लद्दाख के पत्रकारों को प्रशिक्षण देने के लिए प्रपोजल तैयार किया गया है। उपराज्यपाल देंगे राशि की मंजूरी।
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नई शिक्षा नीति 2020 के तहत जम्मू के उच्च शिक्षण और तकनीकी संस्थानों में बदलाव आना शुरू हो गया है। सभी संस्थानों ने नीति को सफल बनाने की तैयारियां की हैं। सरकार ने जिस उद्देश्य से भारत में शिक्षा नीति को लागू किया है। उस उद्देश्य को पूरा करने के लिए तमाम संस्थान प्रयास कर रहे हैं। इससे आत्म निर्भर भारत बनाने में आसानी होगी। हालांकि कोरोना महामारी के चलते दो सालों से संस्थानों कक्षाओं समेत तमाम गतिविधियां ऑफलाइन मोड के बजाए ऑनलाइन मोड से जारी हैं। लेकिन नई नीति के तहत ऑनलाइन मोड से कार्यक्रम चले हैं। जिसमें अलग-अलग क्षेेत्रों से विशेषज्ञ छात्रों के आत्मनिर्भर बनने के गुर सिखा रहे हैं।
शेर-ए कश्मीर कृषि विज्ञान विवि जम्मू में आत्म निर्भर भारत बनाने के लिए इस बार हार्टीकल्चर और सीड साइंसस में बीएई कोर्स की शुरूआत की गई है। विवि के डीन अकेडमिक अफेयर्स डॉ. बिक्रम ने बताया कि केंद्र के हार्टीकल्चर और सीड साइंसेस में जितने आवेदन पत्र निकलते हैं। उनमें प्रदेश के छात्र आवेदन नहीं कर सकते हैं।इसका मुख्य कारण छात्रों के पास संबंधित विषयों में डिग्री नहीं होती। इसी को ध्यान में रखते हुए नई शिक्षा नीति के बैठक में यह दो कोर्स शुरू करने का निर्णय लिया था।
इसके अलावा आत्म निर्भर भारत बनाने के लिए किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। किसानों को नए -नए बीजों की खेती करने डेरी उत्पादन के बारे में जानकारी दी जा रही है। तमाम प्रक्रियाओं के माध्यम से स्वदेशी चीजों को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि स्वदेशी चीजों का प्रचार- प्रसार होने से विदेशी चीजों का बहिष्कार किया जाएगा। इससे भारत विकास करेगा। भारतीय प्रबंधन संस्थान में नई शिक्षा नीति के अधीन 60 प्रौढ़ छात्रों को आपीएम कोर्स में प्रवेश दिया गया है। दस वर्षों से अधिक अनुभव के आधार पर इन्हें प्रवेश दिया गया है।
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ससंस्थान की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार नई नीति के तहत छात्रों को उद्यमी और स्किल्ड बनाने के लिए समय-समय पर कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है। इसमे भिन्न-भिन्न क्षेत्रों से विशेषज्ञ छात्रों को आत्म निर्भर बनने के लिए प्रेरित करते हैं। जम्मू विवि के डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. प्रकाश अंताल ने बताया गत पिछली बैठक में नई शिक्षा नीति को विवि में पूरी तरह से जल्द लागू करने के लिए बैठक हुई थी। कोरोना से उपजे हालातों की वजह से सभी ऑफलाइन गतिविधियां ठप हो गई है। धीरे -धीरे विवि को दोबारा से मुख्य धारा में लाने काम शुरू हो गया है।
प्रदेश के तमाम पत्रकारों के लिए सार्टिफिकेट कोर्स करने के लिए प्रपोजल तैयार
शोधार्थियों समेत न्यूनतम संख्या में छात्र भी विवि में आने शुरू हो गए हैं। लॉकडाउन के दौरान भी पढ़ाई के साथ तमाम केरिकुलर एक्टविटिज ऑनलाइन मोड नई शिक्षा के तहत करवाई गई हैं। विवि में छात्रों को उद्यमी बनाने के लिए इंकबेशन इनोवेशन सेंट्र भी खोला गया है। आयोग की ओर से नई शिक्षा नीति लागू करने के निर्देश जारी होती ही इन विकासात्मक कार्यों धीरे-धीरे शुरू किया गया है। केंद्रीय विवि जम्मू के शिक्षा विभाग के प्रो.जे एन बालिया ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत प्रदेश के तमाम पत्रकारों के लिए सार्टिफिकेट कोर्स करने के लिए प्रपोजल तैयार करके उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को सबमिट किया गया है। वहां समंजूरी मिलते ही जम्मू -कश्मीर और लद्दाख यूटी पत्राकारों को विवि में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
बीच में कोर्स छोड़ने पर डिग्री के बजाए मिलेगा डिप्लोमा
इसके अलावा मीडिया विभाग में इस नीति के अधीन तवी धारा रेडियो भी शुरू होने जा रहा है। चार महीने के बाद काम शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि नई नीति के अनुसार मल्टी एंट्री और मल्टी एक्जिट एजुकेशन को भी विवि में शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसका लाभ उन छात्रों को होगा। जो कोर्स आधा करने के बाद छोड़ने के इच्छुक होंगे। उन्हें डिग्री के बजाए डिप्लोमा दिया जाएगा।