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जम्मू-कश्मीर: सीआरपीएफ कांस्टेबल को जमानत से इंकार, कुलगाम में तीन साथी कर्मियों की कर दी थी हत्या
Thu, 30 Sep 2021 03:19 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Thu, 30 Sep 2021 03:19 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट भी कहता है कि यदि किसी को सजा मिल जाए तो उसे निर्दोष बताने का कोई आधार नजर नहीं आता। इन दलीलों के साथ जमानत अर्जी को खारिज कर दिया गया।
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कोर्ट का आदेश।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
साथी कर्मियों की हत्या करने वाले सीआरपीएफ कर्मी की जमानत अर्जी को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। आरोपी संजय कुमार को ट्रायल कोर्ट सजा भी सुना चुका है और वह दस साल से जेल में है। 24 दिसंबर 2011 को कुलगाम में तैनात 18 बटालियन सीआरपीएफ के जवान संजय ने अपनी इंसास राइफल से अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी। इसमें कई जवान घायल हो गए। घायलों में तीन ने दम तोड़ दिया था। चीफ जस्टिस पंकज मित्थल और जस्टिस विनोद चटर्जी कौल ने संजय की जमानत अर्जी पर सुनवाई की।
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खंडपीठ ने कहा कि अपीलकर्ता एक अनुशासित फोर्स का जवान है, जिससे इस तरह वारदात की उम्मीद नहीं की जा सकती। हालांकि जमानत के लिए यह आधार न भी माना जाए तो कोई और आधार भी नजर नहीं आता, क्योंकि अपीलकर्ता 10 साल से सजा काट रहा है, ऐसे में जमानत का इसमें कोई आधार नहीं बनता। सुप्रीम कोर्ट भी कहता है कि यदि किसी को सजा मिल जाए तो उसे निर्दोष बताने का कोई आधार नजर नहीं आता। इन दलीलों के साथ जमानत अर्जी को खारिज कर दिया गया।
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नशा तस्कर को दस साल कैद की सजा
रामबन जिला कोर्ट ने नशा तस्कर को एक मामले में दस साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। आरोपी आबिद सौफी को 2017 में बड़ी मात्रा में भुक्की के साथ पकड़ा गया था। जिला जज हक नवाज जरगर ने मामले पर सुनवाई करते हुए उक्त फैसला सुनाया। दोनों तरफ की दलीलें सुनने के बाद जज ने कहा कि नशा स्वास्थ्य और आम लोगों दोनों के लिए ही खतरनाक है। जो जान तक ले सकता है। सिर्फ मैट्रोपोलिटन शहरों में ही नहीं, बल्कि दूर दराज ग्रामीण क्षेत्रों में नशा पैर पसार चुका है। जिस पर सख्त कार्रवाई और अंकुश जरूरी है। लिहाजा इसमें कोई रियायत नहीं।