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सत्यपाल मलिक EXCLUSIVE: जम्मू कश्मीर विधानसभा भंग मामले पर बोले, चार दिन में गिर जाती सरकार

Thu, 22 Nov 2018 02:56 PM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 22 Nov 2018 02:56 PM IST
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Jammu Kashmir Assembly Dissolved Satyapal Malik speaks  Exclusively to Amar Ujala
जम्मू-कश्मीर विधानसभा मामले पर बोले सत्यपाल मलिक
जम्मू-कश्मीर विधानसभा भंग मामले पर अमर उजाला ने पूरे घटनाक्रम के केंद्र में बने राज्यपाल सत्यपाल मलिक से एक्सक्लूसिव बातचीत की। विधानसभा भंग होने की वजहों को लेकर वो काफी तल्ख नजर आए। सत्यपाल मलिक ने कहा, "मैंने पहले भी कहा था कि मैं जोड़-तोड़ की सरकारों के पक्ष में नहीं हूं। मुझे 15 दिन से शिकायतें मिल रही थीं कि बड़े पैमाने पर लोगों को डराया-धमकाया जा रहा है। पैसे का लालच दिया जा रहा है। महबूबा मुफ्ती ने खुद शिकायत की थी। 
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'चार दिन नहीं चलती सरकार'

जिस तरह से पीडीपी-नेशनल कॉन्फ्रेन्स-कांग्रेस के साथ आने की बात कही जा रही थी, उसको लेकर भी सत्यपाल मलिक ने कहा कि ये नैसर्गिक गठबंधन नजर नहीं आता। ये दोस्त नहीं हैं। कभी मिलकर चुनाव नहीं लड़े। बहुमत को लेकर भी संशय था। ये सरकार बनती भी तो चार दिन नहीं चलती। 
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सत्यपाल मलिक ने कहा कि ये ताकतें पंचायत चुनाव भी नहीं चाहती थीं। ये जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को पनपने देना नहीं चाहते। मैंने राज्य के पक्ष में फैसला लिया है, न इस पक्ष का फायदा है, न उस पक्ष का। पिछले कुछ समय में सूबे में जो हालात बिगड़ रहे थे हमने उसको संभाला है।

फैक्स मशीन पर बवाल

बुधवार रात से ही फैक्स मशीन को लेकर विवाद छिड़ा है। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वन-वे फैक्स मशीन की भी जांच होनी चाहिए। जब हमने ये सवाल खुद सत्यपाल मलिक से पूछा तो उनका कहना था, "फैक्स मशीन, संचार का अकेला माध्यम नहीं है। वो किसी को यहां फ्लाइट से भेज सकते थे। पांच महीने से विधानसभा इसी तरह चल रही है। बुधवार को शासकीय छुट्टी थी। मेरा खानसामा भी छुट्टी पर था। अगर फैक्स मशीन चलाने वाला छुट्टी पर था तो उसके लिए मैं जिम्मेदार नहीं हूं। अगर महबूबा मुफ्ती का फैक्स आता भी तो भी मैं वही फैसला करता जो मैंने किया है।"

महबूबा ने की थी शिकायत

सत्यपाल मलिक ने अमर उजाला से खास बातचीत में ये भी कहा कि उन्हें कुछ दिन पहले महबूबा मुफ्ती ने शिकायत की थी। मलिक के मुताबिक, महबूबा ने कहा कि उनके कुछ विधायकों को डराया जा रहा है। जेल का डर दिखाया जा रहा है। सज्जाद लोन की तरफ से भी इसी तरह की शिकायत थी। महबूबा और उमर अब्दुल्ला कह रहे हैं कि विधानसभा भंग होना उनकी जीत है तो बाकी लोग अब क्यों दुखी हैं। ये लोग सिर्फ अपने विधायक टूटने के डर से इकट्ठा हुए थे।

सत्यपाल मलिक ने कहा कि 19 दिसंबर को राज्यपाल शासन खत्म होने के बाद राष्ट्रपति शासन लगेगा। इस दौरान चुनाव आयोग तय करेगा कि राज्य में कब और कैसे चुनाव होंगे।
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