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जम्मू-कश्मीर: ऐतिहासिक बिक्रम चौक रेलवे स्टेशन बनेगा धरोहर, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
Wed, 09 Jun 2021 11:57 AM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Wed, 09 Jun 2021 11:57 AM IST
सार
स्टेशन की ड्रोन से तस्वीरें लेने के साथ इमारतों और क्षेत्रों को चिह्नित कर विकसित किया जाएगा।
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बिक्रम चौक फ्लाईओवर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मंदिरों के शहर में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए ऐतिहासिक बिक्रम चौक रेलवे स्टेशन को विरासत स्थल (धरोहर) के रूप में विकसित किया जाएगा। मंगलवार को मंडलायुक्त डॉ. राघव लंगर ने इस ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन साइट का दौरा किया। उन्होंने अधिकारियों को यहां नवीनीकरण आवश्यकताओं का आकलन करने के साथ पुनर्निर्माण योजना को अमल में लाने के लिए प्रारंभिक कार्य शुरू करने के निर्देश दिए।
उन्होंने अधिकारियों को ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन के उपलब्ध चित्रों का अवलोकन करने को कहा, ताकि प्राचीन गौरव को बहाल किया जा सके। डॉ. लंगर ने तहसीलदार दक्षिण और जेडीए को एक सीमांकन अभ्यास करने, सर्वेक्षण, साइट के अन्य विवरण के साथ रिपोर्ट जमा करवाने के साथ पुराने रेलवे स्टेशन के ड्रोन शॉट्स लेने, इमारतों और क्षेत्रों को चिह्नित करने के निर्देश दिए।
मंडलायुक्त को बताया गया कि तत्कालीन राज्य के रेलवे विभाग की भूमि को 1954 को परिवहन विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया था और वर्तमान में जेकेआरटीसी यार्ड और कार्यशाला वहां स्थित है। पर्यटन विभाग और जेएससीएल को परियोजना की सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं सहित रेलवे स्टेशन के नवीनीकरण के लिए एक परियोजना रिपोर्ट बनाने के लिए कहा गया।
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रेलवे स्टेशन का ऐतिहासिक और विरासत महत्व
मंडलायुक्त ने बताया कि सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने और नए आकर्षित स्थलों का विस्तार करने की प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने ऐतिहासिक बिक्रम चौक रेलवे स्टेशन का निरीक्षण कर पाया कि विभिन्न स्थल चिह्न और अवशेष अभी भी साइट पर उपलब्ध हैं। कहा कि इस पुराने रेलवे स्टेशन का ऐतिहासिक और विरासत महत्व है, इसकी पिछली स्थिति बहाल करने के लिए उचित प्रयास किए जाने की जरूरत है। इसके नवीनीकरण से जम्मू-कश्मीर में विरासत पर्यटन में एक और आयाम जुड़ जाएगा।
यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: नहीं दिखा कोरोना का डर, नरवाल सब्जी मंडी में उमड़ी लोगों की भीड़, देखिए तस्वीरें
भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद बंद कर दिया था रेलमार्ग
प्रासंगिक रूप से पुराना रेलवे स्टेशन (बिक्रम चौक में) जम्मू-सियालकोट लाइन पर था, यह रेलमार्ग 43 किलोमीटर था और व्यापार के साथ वाणिज्य के लिए प्रयोग में लाया जाता था। यह मार्ग मुख्यत: चीनी और शक्कर के व्यापार के काम में लिया जाता था। इसमें मीरां साहिब, रणबीर सिंह पोरा और सुचेतगढ़ कस्बे आते थे। 1897 में बने इस रेलवे स्टेशन का भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद सियालकोट से रेल लिंक टूट गया।
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उन्होंने अधिकारियों को ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन के उपलब्ध चित्रों का अवलोकन करने को कहा, ताकि प्राचीन गौरव को बहाल किया जा सके। डॉ. लंगर ने तहसीलदार दक्षिण और जेडीए को एक सीमांकन अभ्यास करने, सर्वेक्षण, साइट के अन्य विवरण के साथ रिपोर्ट जमा करवाने के साथ पुराने रेलवे स्टेशन के ड्रोन शॉट्स लेने, इमारतों और क्षेत्रों को चिह्नित करने के निर्देश दिए।
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मंडलायुक्त को बताया गया कि तत्कालीन राज्य के रेलवे विभाग की भूमि को 1954 को परिवहन विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया था और वर्तमान में जेकेआरटीसी यार्ड और कार्यशाला वहां स्थित है। पर्यटन विभाग और जेएससीएल को परियोजना की सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं सहित रेलवे स्टेशन के नवीनीकरण के लिए एक परियोजना रिपोर्ट बनाने के लिए कहा गया।
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रेलवे स्टेशन का ऐतिहासिक और विरासत महत्व
मंडलायुक्त ने बताया कि सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने और नए आकर्षित स्थलों का विस्तार करने की प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने ऐतिहासिक बिक्रम चौक रेलवे स्टेशन का निरीक्षण कर पाया कि विभिन्न स्थल चिह्न और अवशेष अभी भी साइट पर उपलब्ध हैं। कहा कि इस पुराने रेलवे स्टेशन का ऐतिहासिक और विरासत महत्व है, इसकी पिछली स्थिति बहाल करने के लिए उचित प्रयास किए जाने की जरूरत है। इसके नवीनीकरण से जम्मू-कश्मीर में विरासत पर्यटन में एक और आयाम जुड़ जाएगा।
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भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद बंद कर दिया था रेलमार्ग
प्रासंगिक रूप से पुराना रेलवे स्टेशन (बिक्रम चौक में) जम्मू-सियालकोट लाइन पर था, यह रेलमार्ग 43 किलोमीटर था और व्यापार के साथ वाणिज्य के लिए प्रयोग में लाया जाता था। यह मार्ग मुख्यत: चीनी और शक्कर के व्यापार के काम में लिया जाता था। इसमें मीरां साहिब, रणबीर सिंह पोरा और सुचेतगढ़ कस्बे आते थे। 1897 में बने इस रेलवे स्टेशन का भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद सियालकोट से रेल लिंक टूट गया।