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जम्मू-कश्मीर: सेना में बदलेगा पुराना ग्रेनेड, नया मल्टी मोड ग्रेनेड लेगा स्थान

Mon, 08 Feb 2021 11:51 AM IST
करिश्मा चिब न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Mon, 08 Feb 2021 11:51 AM IST
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Jammu and Kashmir: army will replace old grenade with new multi-mode grenade
Indian Army Soldiers - फोटो : PTI (File Photo)

सेना में अब पुराना ग्रेनेड बदलेगा। इसके स्थान पर भारत निर्मित नया मल्टी मोड ग्रेनेड स्थान लेगा। सेना ने आत्मनिर्भर भारत के तहत इसके निर्माण के लिए गुलमर्ग में सोलर इंडस्ट्री के साथ रविवार को करार किया है। पहले चरण में एक लाख ग्रेनेड का सेना ने आर्डर भी दिया है। एमओयू पर सेना की डग्गर डिविजन के जीओसी वीरेंद्र वत्स तथा सोलर इंडस्ट्री के प्रतिनिधि रमीत अरोड़ा ने हस्ताक्षर किए।

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अरोड़ा ने बताया कि आत्मनिर्भर भारत के तहत सोलर इंडस्ट्री सेना के लिए हथियारों का निर्माण कर रही है। इसके लिए पहले चरण में ग्रेनेड का निर्माण किया जा रहा है जो अपनी तरह का पहला ग्रेनेड होगा। यह मल्टी मोड ग्रेनेड पुराने ग्रेनेड का स्थान लेगा। अब तक सेना प्रथम विश्व युद्ध के समय के ग्रेनेड-36 का इस्तेमाल कर रही है। सोलर इंडस्ट्री को एक लाख ग्रेनेड की आपूर्ति का आर्डर मिल गया है। इसका निर्माण इसी महीने शुरू हो जाएगा।
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गुलमर्ग में 100 फीट ऊंचा तिरंगा फहरेगा
अरोड़ा ने बताया कि गुलमर्ग में 100 फीट ऊंचा तिरंगा फहरेगा। यह कश्मीर घाटी में पहला इतना ऊंचा तिरंगा होगा जिसकी कई विशेषताएं होंगी। सेना ने कंपनी के पास तिरंगा के लिए संपर्क किया था। उन्होंने इसकी प्रतिकृति प्रदर्शित करते हुए कहा कि इसकी कई खूबियां होंगी। यह कश्मीर तथा देश की जनता को समर्पित होगा।
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वजन कम होने से जवानों के लिए सुविधाजनक
मल्टी मोड ग्रेनेड का वजन कम होने की वजह से यह जवानों के लिए काफी सुविधाजनक होगा। पैरा ड्रापिंग की स्थिति में काफी सुरक्षित है। इसके रखरखाव की जरूरत नहीं है। यह दो तरह का डिफेंसिव तथा आफेंसिव मोड का होता है। डिफेंसिव मोड का इस्तेमाल वैसे समय में होता है जब दुश्मन खुले में हो और जवान किसी ठिकाने में। इससे विस्फोट से दस मीटर के दायरे में नुकसान होता है। आफेंसिव मोड में विस्फोट से पांच मीटर के दायरे में नुकसान होता है। इसका वजन 250 से 490 ग्राम तक होता है।

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